कर्टेले एम्ब्रोस और हरभजन सिंह में क्या समानता है? इस सवाल को सुनकर शायद कोई भी चौंक जाए। दोनों गेंदबाजों में कोई समानता नहीं है। एक महान तेज गेंदबाज, सिर्फ महान तेज गेंदबाज नहीं बल्कि कई दिग्गजों की सर्वकालिक महान टीम में शामिल होने वाला नाम। दूसरा एक बेहतरीन स्पिनर, महान कहने पर शायद बहुत लोगों को ऐतराज़ हो। और दुनिया की सर्वकालिक महान टीम की बात तो दूर, जब क्रिकेट की मशहूर वेबसाइट cricinfo.com ने भारतीय इतिहास की महानतम टीम चुनी तो उसमें भी ऑफ स्पिनर के तौर पर हरभजन का नाम ना होकर ईरापल्ली प्रसन्ना शामिल थे। इसे इत्तेफाक कहें या कुछ और लेकिन सच्चाई ये है कि वेस्टइंडीज के पूर्व तेज गेंदबाज एम्ब्रोस से हरभजन ने सिर्फ 1 मैच ज्यादा यानि कि 99 मैच खेले हैं। और ये समानता सिर्फ मैचों की संख्या को लेकर सीमित नहीं है। एम्ब्रोस ने अगर इस दौरान 405 विकेट लिए....
अक्टूबर 2003, दिल्ली का पालम क्रिकेट मैदान। भारत दौरे पर ट्राएंग्युलर सीरीज़ खेलने आई ऑस्ट्रेलियाई टीम में एक से बढ़कर एक धुरंधर नाम शामिल हैं। एडम गिलक्रिस्ट, मैथ्यू हेडेन, रिकी पॉन्टिंग, डेमियन मार्टिन, एंड्रयू साइमंड्स और माइकल बेवन जैसे बल्लेबाज़ अगर किसी टीम में शामिल हों तो वहां पर किसी भी युवा खिलाड़ी को दौरे पर कैसे मौका मिल सकता है, जब तक कि इनमें से कोई एक खिलाड़ी अनफिट हो जाए या फिर दौरे पर बहुत ही ज़्यादा उनका फॉर्म बिगड़ जाए। लेकिन, पालम के इस मैदान पर ऑस्ट्रेलिया के एक युवा बल्लेबाज़ को नेट पर बल्लेबाज़ी करते देखते हुए अच्छा लगता है। अच्छा लगने की वजह उसकी बल्लेबाज़ी से ज़्यादा है उसका स्वभाव। दरअसल, हुआ यूं कि मैदान में बड़े शॉट्स खेलने का अभ्यास करते हुए इस बल्लेबाज़ की एक गेंद सीधे एक निजी टीवी चैनल के कैमरे पर लगती है और इसका थोड़ा नुकसान भी उस....
सचिन तेंदुलकर ने वन-डे क्रिकेट को अलविदा कह दिया है और अब हर किसी की ज़ुबां पर अगला सवाल यही है कि वो टेस्ट क्रिकेट कब तक खेलेंगे। कुछ लोगों का मानना है कि शायद वन-डे रिटायरमेंट के बाद उनका अगला लक्ष्य 200 टेस्ट खेलना है। लेकिन, इसके लिए उन्हें फिलहाल 6 और टेस्ट खेलने होंगे जिसका मतलब होगा ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ घरेलू सीरीज़ में 4 मैचों के अलावा अगले साल के साउथ अफ्रीका दौरे पर टेस्ट सीरीज़ में खेलना। तेंदुलकर के हाल की फॉर्म देखते हुए एक साल बाद के टेस्ट करियर की बात करना मुश्किल है। हां, इतना तय है कि ऑस्ट्रेलिया सीरीज़ में वो खेलेंगे ज़रूर। अब, ये सीरीज़ उनकी आखिरी सीरीज़ होती है या नहीं इस पर सस्पेंस फिलहाल वैसा ही बरकरार रहेगा जैसा कि वन-डे संन्यास को लेकर पिछले एक साल से था। इंग्लैंड सीरीज़ में सचिन शतक को क्या रनों के लिए जूझते दिखाई....
भारतीय क्रिकेट मौजूदा समय में बड़े संकट के दौर से गुजर रहा है। कोई कप्तान महेंद्र सिंह धोनी पर निशाना साध रहा है तो कोई सचिन तेंदुलकर पर लेकिन, कोच डंकन फ्लैचर की बात बहुत कम लोग कर रहे हैं। आखिर फ्लैचर की नाकामी पर सवाल क्यों नहीं उठ रहे हैं? फ्लैचर क्रिकेट इतिहास में सबसे ज्यादा टेस्ट गंवाने वाले कोच हैं। ये रिकॉर्ड डेव व्हॉटमोर के नाम भी है लेकिन व्हॉटमोर ने अपने करियर में बांग्लादेश और श्रीलंका जैसी कमजोर टीमों के लिए कोचिंग की जबकि फ्लैचर को इंग्लैंड और भारत जैसी टीमें मिली हैं। 5 नवंबर को मुंबई में इंग्लैंड के खिलाफ पहले 2 टेस्ट मैच के लिए टीम इंडिया का चयन होना था। नए सीजन में नई चयन समिति के साथ भारतीय क्रिकेट की दिशा क्या होगी इस पर कप्तान एम एस धोनी और कोच डंकन फ्लैचर की राय काफी मायने रखती। धोनी तो मुंबई में....
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट मौजूदा समय में बड़े संकट के दौर से गुजर रहा है। कोई कप्तान महेंद्र सिंह धोनी पर निशाना साध रहा है तो कोई सचिन तेंदुलकर पर लेकिन, कोच डंकन फ्लैचर की बात बहुत कम लोग कर रहे हैं। आखिर फ्लैचर की नाकामी पर सवाल क्यों नहीं उठ रहे हैं? फ्लैचर क्रिकेट इतिहास में सबसे ज्यादा टेस्ट गंवाने वाले कोच हैं। ये रिकॉर्ड डेव व्हॉटमोर के नाम भी है लेकिन व्हॉटमोर ने अपने करियर में बांग्लादेश और श्रीलंका जैसी कमजोर टीमों के लिए कोचिंग की जबकि फ्लैचर को इंग्लैंड और भारत जैसी टीमें मिली हैं। 5 नवंबर को मुंबई में इंग्लैंड के खिलाफ पहले 2 टेस्ट मैच के लिए टीम इंडिया का चयन होना था। नए सीजन में नई चयन समिति के साथ भारतीय क्रिकेट की दिशा क्या होगी इस पर कप्तान एम एस धोनी और कोच डंकन फ्लैचर की राय काफी मायने रखती। धोनी तो....
आज की रफ्तार भरी जिंदगी में ठहराव का वक्त ही कहां है। मैदान में तो और भी नहीं। राहुल द्रविड़ रिटायर्ड होकर अब कमेंट्री बॉक्स में नजर आ रहे हैं तो सौरव गांगुली पहले से ही इस विधा में अपने को लगभग स्थापित कर चुके हैं। टी-20 क्रिकेट की चकाचौंध के बीच भला वीवीएस लक्ष्मण को कौन याद करे। आखिर लक्ष्मण को तो हमेशा से ही भारतीय क्रिकेट में नजरअंदाज किया गया है। ऐसे में नया क्या है? लक्ष्मण ने पिछले महीने अचानक संन्यास की घोषणा की लेकिन न तो मीडिया के बड़े अखबारों में उनकी तारीफ में कसीदे गढ़े गए और ना ही न्यूज़ चैनल्स में उनके लिए कई प्रोग्राम बनाए गए। शायद लक्ष्मण की त्रासदी ही यही रही कि इस सज्जन खिलाड़ी को हर कोई पसंद तो दिल से करता है लेकिन बात जब उन्हें सम्मान देने की आती है तो हर कोई पीछे हट जाता है। टी-20....
बैंगलोर टेस्ट में जीत के साथ ही महेंद्र सिंह धोनी बने भारतीय जमीं पर सबसे कामयाब कप्तान। भारत में अजहरुद्दीन के 13 टेस्ट जीत के रिकॉर्ड को तोड़ा और इंग्लैंड तथा ऑस्ट्रेलिया में 0-4 की हार के सिलसिले को तोड़ा। ऐसे में एक बार फिर से चर्चा गरम हुई कि क्या धोनी हैं भारतीय इतिहास के सबसे कामयाब कप्तान? सुनने में ये बात अजीब सी लगे आखिर जिस कप्तान ने टी-20 वर्ल्ड कप जिताया, वन-डे वर्ल्ड कप जिताया और टेस्ट क्रिकेट में नंबर-1 पर पहुंचाया तो उसको महानतम कहने में हिचकिचाहट कैसी? लेकिन, धोनी को अब भी भारत का महानतम कप्तान कहने से कई लोगों को हिचकिचाहट होती है। और इसकी सबसे बड़ी वजह है विदेशी जमीं पर टेस्ट क्रिकेट में जीतने वाले मैचों की कम संख्या। अंकों के इस मामले में टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली बाजी मार ले जाते हैं। गांगुली ने भारत से बाहर 11....
गौतम गंभीर-'हां, मैं तैयार हूं। टेस्ट टीम की कप्तानी की जिम्मेदारी लेने के लिए मैं तैयार हूं।'- गौतम गंभीर- कप्तान कोलकाता नाइट राइडर्स आईपीएल सीजन 5 में कोलकाता नाइट राइडर्स की जीत का जश्न खत्म हुए कुछ घंटे ही बीते थे कि विजेता कप्तान गौतम गंभीर ने मौके का भरपूर फयदा उठाने की कोशिश की। गंभीर दिल्ली में कुछ चुनिंदा टीवी चैनल्स के स्टूडियो में गए और इटंरव्यू के दौरान उन्होंने अपनी क्लब की टीम की इस जीत के साथ टीम इंडिया के लिए अपनी कप्तानी का दावा ठोक दिया। गंभीर का बयान और उसकी टाइमिंग दरअसल काफी दिलचस्प रही थी जो गंभीर लगातार पूरे टूर्नामेंट में इस बात पर ज़ोर देते रहे थे कि कप्तान कोई महान नहीं होता है बल्कि टीमें महान होती है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए इशारे ही इशारों में कई बार ये कहने की कोशिश की टीम इंडिया की कप्तानी करने पर जीत....
जनवरी 2011 में कटक में ईस्ट जोन और सेंट्रल जोन के बीच दलीप ट्रॉफी का क्वार्टर-फाइनल मैच खेला जा रहा था। पहली पारी में दोनों टीमों ने बड़ा स्कोर खड़ा किया लेकिन अशोक डिंडा की बेहतरीन गेंदबाजी के चलते उनकी टीम ईस्ट जोन को 37 रनों की बढ़त मिली। डिंडा ने 38.1 ओवर की मैराथन गेंदबाजी करते हुए अहम विकेट झटके। दूसरी पारी में सेंट्रल के लिए आरपी सिंह और पंकज सिंह ने बेहतरीन गेंदबाजी करते हुए ईस्ट को महज 96 रन पर समेट दिया। अब सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए ईस्ट को 133 रन का मामूली स्कोर डिफेंड करना था। जाहिर सी बात है कि ऐसे मुश्किल हालात में टीम जीत के लिए अपने सबसे अच्छे गेंदबाज पर ही निर्भर करेगी। खासकर, उस गेंदबाज़ से उम्मीदें और बढ़ जाती हैं जिसने मैच की पहली पारी में बेहतरीन गेंदबाजी की हो। लेकिन, यहां से कहानी पलट गई। सेंट्रल के लिए....
आईपीएल 2008 से ठीक पहले सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण, वीरेंद्र सहवाग और युवराज सिंह को ऑयकन खिलाड़ी का दर्जा दिया गया ताकि इस टूर्नामेंट को पहले आयोजन से ही दुरुस्त तरीके से ऐसे स्थापित कर दिया जाए जिससे कि ये पूरे भारत में पहले दिन से ही लोकप्रिय हो जाए। इसके बाद नीलामी में एम एस धोनी चेन्नई सुपर किंग्स और शेन वॉर्न राजस्थन रॉयल्स के लिए बिके तो मानो एक सपने वाली पटकथा पूरी तरह से पर्द पर सामने आ गयी। 6 ऑयकन खिलाड़ियों के अलावा एक टीम की कमान पहली बार टी-20 वर्ल्ड कप जिताने वाले करिश्माई कप्तान धोनी के हाथ में तो एक और टीम की कमान क्रिकेट के सबसे बड़े शो-मैन और संभवत महानतम गेंदबाज़ शेन वॉर्न को मिली तो आईपीएल के सुपर हिट होने की बुनियाद भी पड़ गयी। पहले तीन आईपीएल में तो कामयाबी की गाड़ी ऐसी रफ्तार से चली....









