13 अप्रैल को केरल के 971 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होगा। 13 अप्रैल को ही केरल विधानसभा के 140 सदस्यों के भविष्य का फैसला होगा। कौन इस बार बाज़ी मारेगा एलडीएफ या फिर यूडीएफ? अगर केरल की आबादी की बात करें तो यहां हिन्दू 56 फीसदी, ईसाई 19 फीसदी और मुस्लिम 25 फीसदी हैं। यही वजह है कि हर कोई पार्टी मुस्लिम वोट हासिल करना चाहती है। हालांकि मुसलमानों को लेकर केरल में एक पार्टी है लेकिन अगर इतिहास देखा जाए तो हमेशा एलडीएफ हो या फिर यूडीएफ मुसलमानों को अपनी तरफ लाने की कोशिश में लगे रहते हैं। यही वजह है कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया और मदनी की पीडीपी जैसे संगठनों के खिलाफ कभी भी सख्त कार्रवाई नहीं की गई। इस बार के चुनाव में भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। दोनों पार्टियां अंदर-अंदर मुस्लिम संगठनों से साथ बात कर रहे हैं। अगर चुनाव क्षेत्रों पर....
हाल ही में हुई कुछ घटनाओं ने हमारे सामने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया कि आखिर किसे हम स्वामी या फिर धर्म गुरु का दर्जा दे सकते हैं जैसे ही मैंने यह ब्लॉग लिखना शरू किया तो मेरे दिमाग में दक्षिण भारत आ गया क्योंकि की दक्षिण भारत हमारे देश का एक ऐसा हिस्सा है जहां से बड़े-बड़े धर्म गुरु ने जन्म लिया और इस देश को इंसानियत का ज्ञान दिया। फेहरिस्त तो लम्बी है लेकिन जगह और वक्त की कमी के कारण यहां पर चंद अज़ीम शख्सियतों का नाम लेने चाहता हूं-तमिलनाडु के महर्षि श्री रमण, केरल के श्री नारायणा गुरु और साईं बाबा, ये ऐसे लोग थे जिन्होंने अपनी ज़िन्दगी धर्म और समाज के लिए त्याग दी और कोशिश करते रहे कि लोगों को इंसानियत सिखाएं। लेकिन पिछले कुछ महीनो में हमने लगातार देखा कि एक के बाद एक धर्म गुरु के काले धंधे सामने आए।....
एक ज़माना था जब लोग स्वामी और संन्यासियों को अपना भगवान मानते थे लेकिन जब आज टीवी पर स्वामी नित्यानंद और इच्छाधारी जैसे बाबाओं को देखते हैं तो रूह कांपने लगती है। पिछले दो हफ्तों से आप सबने हरेक टीवी चैनल पर स्वामी नित्यानंद का आपत्तिजनक विडियो देखा होगा। उसे देखते ही आप यकीनन चोंक गए होंगे लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यह कि आखिर इन लोगों को स्वामी या धर्म गुरु बनने का हक़ किसने दिया। हमने देखा कि किस तरह से नित्यानंद एक तमिल ऐक्ट्रैस के साथ रंग-रलियां मना रहा था लेकिन फिर भी स्वामीजी कह रहे थे कि वो गलत नहीं हैं। स्वामी के विडियो को देख कर लोग भड़क गए। तमिलनाडु से लेकर कर्नाटक तक लोगों में आक्रोश दिखा। लोगों ने स्वामी के आश्रम में तोड़-फोड़ की और अपना गुस्सा प्रकट किया लेकिन स्वामी टस से मस न हुए। पत्रकार स्वामी के आश्रम में पहरेदार....
कर्नाटक में खून की होली के लिए कौन जिम्मेदार है- तस्लीमा नसरीन, फंडामेंटलिस्ट या फिर वह आर्टिकल छापने वाला अखबार? होली रंगों का त्योहार होता है। लोग एक दूसरे के ऊपर रंग फेंक कर अपनी मोहब्बत का इज़हार करते हैं लेकिन कर्नाटक में इस बार की होली सभी जल्द से जल्द भूलाने की कोशिश करेंगे, क्योंकि यह होली रंगों की नहीं बल्कि खून की होली थी, मोहब्बत की नहीं बल्कि नफरत की। होली के दो दिन पहले पूरी दुनिया में ईद मिलाद मनाया जा रहा था। दोनों समुदाय के लोग एक दूसरे को होली और ईद-मिलाद की मुबारकबाद देते थे लेकिन सोमवार को कुछ और ही देखने को मिला। लोग होली के जश्न में डूबे थे। एक दूसरे पर रंग लगा रहे थे कि इस बीच मुस्लिम समुदाय के लोग इन्हीं सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे क्योंकि राज्य के एक स्थानीय अखबार ने बांग्लादेशी लेखक तस्लीमा....
जब अगस्त महीने की 29 तारीख को चंद्रयान-1 से रेडियो सम्पर्क टूटा और चंद्रयान मिशन की यात्रा समाप्त हुई तो सभी ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की लेकिन जब नासा ने यह खुलासा किया की चांद पर पानी मौजूद है और यह पता लगाना संभव हुआ कि चंद्रयान-1 से तो उन सभी बुलंद आवाजों को जवाब मिल गया कि चंद्रयान-1 एक सफल अभियान है। अभी तक कोई भी अभियान सकारात्मक रूप से पानी की मौजूदगी को साबित नहीं कर पाया था। चंद्र सतह पर पानी का पता लगाना चंद्रयान-1 अभियान का एक प्रमुख मकसद था जबकि चांद के इलाके और खनिजों मानचित्रण भी मिशन के प्रमुख उद्देश्यों में से एक थे। गौरतलब है कि चंद्रयान-1 के साथ भेजे गए नासा के उपकरण मून मिनरलोजी मैपर (एम-3) ने चंद्रमा पर परावर्तित प्रकाश की तरंगदैर्ध्य का पता लगाया जो ऊपरी मिट्टी की पतली परत....
भारत की चांद छूने की महत्वाकांक्षी परियोजना चंद्रयान मिशन की यात्रा समाप्त हो गई है लेकिन सवाल यह कि समय से पहले खत्म होकर यह मिशन सफल रहा या फिर असफल। अगर इसरो की मानें तो इसने सभी कामों को पिछले दस महीनों के अंतरिक्ष विचरण के दौरान सफलतापूर्वक अंजाम दे दिया है। चंद्रयान दो साल की अपनी निर्धारित मिशन अवधि को पूरा करने में नाकाम रहा, जो इसरो के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। चंद्रयान-1 के साथ भेजे गए 11 पे-लोड में से 5 भारतीय व 6 विदेशी हैं। प्रक्षेपण के 312 दिन बाद चंद्रयान-1 से इसरो का संपर्क 29 अगस्त देर रात 1.30 बजे अचानक टूट गया और उसके बाद से चंद्रयान कहां है, इसकी कोई जानकारी नहीं है। इसरो वैज्ञानिकों के निरंतर प्रयासों के बाद भी उससे न तो कोई आंकड़ा प्राप्त किया जा सका और न ही कोई संदेश भेजा जा सका।....
जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नज़दीक आती जा रही है वैसे-वैसे कर्नाटक में बीजेपी वोटर्स को लुभाने के नए-नए दांव खेल रही है। दक्षिण भारत में पहली बार सरकार बनाने के बाद, पहली बार हो रहे लोकसभा चुनावों में बीजेपी पूरी तरह से वोटर्स को पटाने की कोशिश मे लगी हुई है। कर्नाटक में हाल में हुए सांप्रदायिक दंगे और मोरल पोलिसिंग जैसे घावों से बचने के लिए बीजेपी राज़्य में नेताओं से लेकर अभिनेताओं तक को वोट जुटाने में लगा रही है। बीजेपी ने इस बार अपने चुनावी प्रचार को एक नया रूप दिया है और वो है रंगमंच द्वारा प्रचार करना। बीजेपी ने एक नौटंकी टोली को अपने चुनावी प्रचार का हिस्सा बनाया है। इसकी शुरुआत बैंगलुरू साउथ के उम्मीदवार अनंत कुमार ने की। अनंत कुमार ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में विभिन्न जगहों पर इस टोली को साथ लेकर अपना चुनावी प्रचार शरू किया। अनंत कुमार खुद....
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू से करीब 250 किमी दूर स्थित दावणगेरे में कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने सोमवार को अपनी पार्टी के चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत की। हालांकि रैली मे लोगों की काफी भीड़ थी लेकिन अगर किसी चीज की कमी थी तो वो थी सोनिया गांधी के जोश में। सोनिया गांधी ने भाषण की शुरुआत करते हुए बीजेपी पर निशाना साधा और राज्य की जनता से फिर सत्ता में आने पर विकास व प्रगति का वादा किया। गौर करने वाली बात यह कि सोनिया गांधी के भाषण मे वो जोश और जुनून नहीं दिखा, शायद उसकी वजह राज्य कांग्रेस में चल रहे टिकट बंटवारे को लेकर विवाद ही था। बताता चलूं कि राज्य कांग्रेस में काफी दिनों से यह विवाद चल रहा है हालांकी इस विवाद को सुलझाने के लिए गुलाम नबी आजाद भी आए थे लेकिन कुछ न हो सका, क्योंकि राज्य कांग्रेस....
लोकसभा चुनाव के लिए 9 दलों ने तीसरा मोर्चा खड़ा कर दिया है। इसकी औपचारिक घोषणा यहां बेंगलुरू से 45 किमी दूर स्थित टूमकूर में एक विशाल रैली में की गई। 1988 में जनता दल के गठन के गवाह बने कर्नाटक से ही तीसरे मोर्चे के सफर का आगाज हुआ था। इस ऐतिहासिक मौके पर सीपीएम नेता प्रकाश कारत, सीपीआई के नेता एबी बर्धन, टीडीपी नेता चंद्रबाबू नायडू, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा, बहुजन समाजवादी पार्टी की ओर से मायावती के प्रतिनिधि सतीश चंद्र मिश्रा, अन्नाद्रमुक के वी. मैत्रेयन, टीआरएस, आरएसपी,फॉरवर्ड ब्लॉक और भजनलाल की हरियाणा जनहित पार्टी के नेता मौजूद थे। इस मौके पर पूर्व प्रधानमंत्री और एच.डी. देवगौड़ा ने लोगों से आगामी आम चुनावों में लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष सरकार चुनने की अपील की। रैली को संबोधित करते हुए सीपीएम नेता प्रकाश करात ने कहा- यह ऐतिहासिक क्षण है जब सभी लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और वाम दल एक....









