भारतीय मुसलमान की हालत फिल्म के पर्दे और राजनीति के मैदान में एक सी है। फिल्मी परदे पर उसका किरदार एक साधारण इंसान का नहीं होता। कभी वो बेइंतेहा रुमानी शायर तो कभी बेवजह अपनी देशभक्ति की मिसाल देता पुलिस अफसर नजर आता है। जिस तरीके से हम बॉलीवुड के परदे पर एक सामान्य मुसलमान की कल्पना नहीं करते उसी तरह राजनीति के मानसपटल पर भी हम एक सामान्य मुसलमान को नदारद पाते हैं। भारतीय राजनीति में मुस्लिमों को हम देश की बाकी जनता से अलग करके देखते हैं। हर कोई मान कर चलता है कि राजनीति का सामान्य नियम मुसलमान पर लागू नहीं होता। ये विचार सिर्फ बाहरी लोगों का फैलाया हुआ नहीं है। खुद मुसलमान नेता और जनता भी ये यकीन करती है कि हो न हो वो कुछ अनूठे हैं। यहीं से भारतीय राजनीति में मुसलमानों को बंधक बनाने की कड़ियां शुरू होती हैं। मिथकों का एक....









