मृत्युंजय कुमार झा
Tuesday , August 27, 2013

84 कोसी परिक्रमा के बहाने


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अयोध्या एक बार फिर सुर्खियों में है। विश्व हिंदू परिषद की 84 कोसी परिक्रमा पहले ही दिन फ्लॉप रही। बीजेपी और विश्व हिंदू परिषद की कोशिश थी कि राम के नाम पर एक बार फिर वो 90 के दशक को दोहरा सकेंगे। मेरे जेहन में एक बार फिर अयोध्या की यादें ताजा हो उठी हैं। 1990 में बतौर पत्रकार पहली बार अयोध्या गया था। मुलायम सिंह उस वक्त उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। एक साल पहले जून 1989 में हिमाचल प्रदेश के पालनपुर में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में राम मंदिर बनाने का प्रस्ताव पारित किया गया। इसे रामजन्म भूमि आंदोलन का नाम दिया गया। दो महीने बाद 25 सितंबर 1990 को लालकृष्ण आडवाणी ने सोमनाथ से अपनी यात्रा की शुरुआत की। एयरकंडीशंड बस को रथ में तब्दील किया गया और आडवाणी उसके सारथी बने। बीजेपी की योजना थी कि आडवाणी का रथ 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या में प्रवेश....

Wednesday, November 07, 2012

बिल्कुल अलग है चीन का होने वाला मुखिया


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अमेरिका में चुनाव के नतीजे आ गए। बराक ओबामा अगले 4 सालों के लिए वर्ल्ड स्टेज पर प्रमुख भूमिका में बने रहेंगे और अब दुनिया की निगाहें 8 नवंबर से चीन की राजधानी बीजिंग में शुरू हो रही कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की 18वीं कांग्रेस पर टिकी हैं। 7 दिनों की इस बैठक में उन लोगों को सत्ता सौंपने की प्रक्रिया शुरू होगी जो अगले 10 साल तक चीन का भविष्य तय करेंगे। इस बैठक में यह भी तय होगा कि चीन में आर्थिक और सामाजिक सुधारों को किस हद तक स्वतंत्रता दी जाएगी। क्या वहां बढ़ रही अमीर और गरीब के बीच की खाई पाटने की कोशिश की जाएगी, सवाल कई हैं लेकिन फिलहाल जवाब कोई नहीं। हां, एक बात तो तय है कि दुनिया की इस दूसरी सबसे बड़ी इकॉनमी में कुछ भी हो, इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा ही। निगाहें चीन के भावी नेता शी जिनपिंग पर....

Wednesday, October 17, 2012

1962 की लड़ाई और हैंडरसन ब्रूक्स-भगत की रिपोर्ट का जिन्न


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50 साल बीत चुके हैं जब चीन ने भारत के नेफा और लद्दाख क्षेत्र पर हमला किया था। इस शर्मनाक हार से पूरा देश इस कदर हिल चुका था कि आज भी उस हार के जख्म ताजा हैं। जख्म नहीं भरे हैं, इसकी एक वजह यह भी है कि ज्यादातर लोगों को इसकी सही जानकारी नहीं मिल पाई। हमने सिर्फ सुना है,पढ़ा है कि किस कदर ये लड़ाई लड़ी गई,किस कदर हमने मुंह की खाई लेकिन इस लड़ाई की असली वजह क्या थी उस पर आज भी पर्दा पड़ा हुआ है। पहली बार 1993 में भारतीय रक्षा मंत्रालय ने 'ऑफिशियल हिस्ट्री ऑफ 1962 वॉर' जारी की जिससे इस लड़ाई के बारे में जानकारी मिली। इसके लेखक रिटायर्ड कर्नल अनिल अठाले के मुताबिक उन्होंने ब्रूक्स-भगत की रिपोर्ट के आधार पर ही इसे लिखा है। हालांकि इस रिपोर्ट में भारत की सामरिक रणनीति की समीक्षा की गई....

Monday , August 17, 2009

शाहरुख है तो क्या...


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शनिवार की सुबह से ही पूरे देश में हड़कंप मचा है। शाहरुख खान को अमेरिका के नेवार्क इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रोक कर वहां के इमिग्रेशन अधिकारियों ने पूछताछ की है। किंग खान का कहना है कि उन्हें जिल्लत झेलनी पड़ी है और दो घंटे से भी ज्यादा उनसे ऊल-जलूल सवाल पूछे गए, अपमानित किया गया और ये सिर्फ इसलिए कि वह एक धर्म विशेष से ताल्लुक रखते हैं। फिर क्या था, इस गुस्ताखी के खिलाफ पूरी भारत सरकार खड़ी हो गई। एक केन्द्रीय मंत्री अंबिका सोनी ने तो यहां तक कह दिया कि हमें भी टिट फॉर टैट की नीति अपनानी चाहिए। हमें भी अमेरिकियों से यही सुलूक करना चाहिए। जरूर करो भाई किसने रोका है लेकिन हमारे यहां तो यही साफ नहीं है कि हवाई अड्डे पर किसे वीआईपी का दर्जा दिया जाए और किसे नहीं। बतौर भारत के रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस अमेरिकी प्रशासन की वीआईपी लिस्ट....

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मृत्युंजय कुमार झा के बारे में कुछ और

मृत्युंजय कुमार झा बीते 23 सालों से टीवी पत्रकारिता में हैं। देश की पहली वीडियो न्यूज मैगजीन की शुरुआत से ही उसके साथ जुड़े। आज तक के फाउंडर मेंबर रहे। 16 साल तक टीवी टुडे में काम करने के बाद पिछले सात सालों से आईबीएन7 में इक्जेक्यूटिव एडिटर के रूप में कार्यरत।
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