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दारैन शाहिदी
Friday , February 18, 2011

कैसे रुकेगी वर्ल्ड कप में मैच फिक्सिंग?


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भारतीयों के लिए बेशक विश्वकप किसी उत्सव से कम नहीं लेकिन ग्लैमर और रोमांच के बीच इस बड़े आयोजन का एक पहलू ऐसा भी है जिसने आईसीसी के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। बात मैच फिक्सिंग की हो रही है। विश्वकप के भव्य आगाज के बीच ये चिंता दब जरूर गई है लेकिन खत्म नहीं हुई है। आईसीसी डरी हुई है कि कहीं फिक्सिंग का वायरस विश्वकप में न आ जाए। इसीलिए आईसीसी ने न सिर्फ अपनी गाइडलाइंस सख्त की हैं बल्कि ट्विटर जैसी साइटों को खिलाड़ियों की पहुंच से दूर रखने के लिए उन पर बैन लगा दिया है। अब खिलाड़ी वर्ल्डकप मैचों के दौरान ट्विटर का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। फिक्सिंग रोकने के लिए सुना है। आईसीसी ने एक फूल प्रूफ प्लान भी तैयार किया है। जिसके मुताबिक कई टीमों के खिलाड़ियों पर आईसीसी ने निगरानी बिठा दी है। रडार में तो सब हैं। ऑस्ट्रेलियन....

Tuesday , January 18, 2011

श्रीशांत को व्यवहार की वजह से निकालना गलत


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सबसे पहले ये देखना होगा कि जो चयन हुआ है वो जितने विकल्प थे उनके हिसाब से हुआ है। पहले 30 संभावित खिलाड़ियों की लिस्ट बनी। उस लिस्ट में से ही 15 खिलाड़ियों को चुना गया। जो विकल्प थे उसमें कुछ ऐसे नाम थे जिन्हें आप नजरंदाज नहीं कर सकते जैसे कि सचिन, सहवाग, गंभीर, हरभजन और युवराज। उसके बाद जो विकल्प बचे वो सीमित थे। उसमें ये थे कि पार्थिव को लें या रोहित शर्मा को लें। तीन स्पिनर को रखें या नहीं। उसमें पीयूष का और आर. अश्विन का नाम था। हालांकि कई लोग कह रहे थे कि पीयूष को न रख कर किसी और को मौका दिया जा सकता था। मेरा मानना है कि टीम के चुनाव में कप्तान की भूमिका काफी अहम होती है। उनकी राय ली जाती है। धोनी ने पहले भी कहा था कि हम जिस ग्रुप में हैं उसमें इंग्लैंड जैसी मजबूत....

Monday , January 25, 2010

कसाब का बकरा


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दिल्ली के जामा मस्जिद पर बकरे बिक रहे थे। एक से एक मोटे ताज़े। सबकी अलग-अलग कीमत थी। किसी का नाम शाहरुख़ खान किसी का नाम सलमान खान। खूबसूरत और हट्टे कट्टे। पैरों में घुंघरू और दाढ़ी में रंग लगे बकरों की कीमत कसाब यानी कसाई लोग चीख-चीख कर बता रहे थे। कई जगह एक से ज्यादा खरीदार होते तो बोली लगती कुछ कुछ आईपीएल की तरह। कई जगह लोग एक से ज्यादा बकरे भी खरीद रहे थे कि दो-दो बकरों की लड़ाई करवायेंगे। मज़ा आयेगा और कुछ पैसे भी बन जायेंगे। 10 हज़ार एक, दस हज़ार दो, और दस हज़ार तीन। ये लो साहब चर्बीदार 80 किलो का शाहरुख़ खान आपका हुआ। अमीर मालिक के हाथों खरीदे जाने पर बकरा भी खुश होता कि मालिक अमीर है जब तक लड़वायेगा तर माल भी खिलायेगा। रामपुर और मुल्तानपुर के बकरों की कीमत सबसे ज्यादा थी। रामपुर वाले बिक....

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