सोमवार, शाम 5 बजे Feb 18, 2013

क्या होता है डिफेंस डील का काला सच?

हाल के हेलिकॉप्टर डील घपले के खुलासे के बाद सब सकते में हैं कि एक कंपनी इतने बड़े स्तर पर घूसखोरी कर ऐसी डील कैसे हथिया सकती है। लेकिन जानकार मानते हैं कि अधिकतर डील पैसे, रसूख, सेक्स के कॉकटेल से ही पूरी होती हैं। कैसे होता है ये सब कुछ। कैसे फंसाते हैं दलाल बड़े-बड़े नेताओं, अफसरों को अपने पंजे में, इनसे जुड़े हर सवाल का जवाब दिया आईबीएन7 के एसोसिएट एडिटर, इन्वेस्टिगेशन नीतीश कुमार ने लाइव चैट में।
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  • क्या इसमे कॉंग्रेस और बीजेपी के नेता समान रूप से जिम्मेवार नहीं हैं? Asked by: Bhagirath ram
  • नीतीश कुमार किसी एक पार्टी का नाम लेना उचित नहीं होगा।लेकिन रक्षा सौदों में दलाली एक ऐसी हकीकत है जिसमें एक पूरा सिंडिकेट काम करता है।इसमें राजनेता,नौकरशाह,दलाल,और सेना के कुछ लोग शामिल हैं
  • क्या डिफेंस डील में दलाली एक सच्चाई है जिससे हमारी सरकार और सेना मुंह छुपाती रहती है? Asked by: रोशन
  • नीतीश कुमार देखिए ये एक हकीकत है।मीडिया के सकारात्मक प्रयासों की वजह से कई रक्षा सौंदों में दलाली का खुलासा हुआ है।इस बात से सरकार या सेना कोई भी इंकार नहीं कर सकती।
  • क्या ये मान लिया जाना चाहिए कि दूसरे विभागों की तरह सेना में भी भ्रष्टाचार फैल चुका है। Asked by: अकांक्षा सक्सेना
  • नीतीश कुमार सेना में पिछले कुछ सालों में कई घोटालों के खुलासे हुए हैं.।सुकना जमीन घोटाला,टेंट घोटाला,रॉशन घोटाला और न जाने क्या क्या?ऐसे में लगता है कि भारतीय सेना भी भ्रष्टाचार से अछूती नहीं रही।
  • भारत हेलीकॉप्टर डील में अब तक कितना पेमेंट कर चुका है। क्या डील कैंसल करने पर वो पैसा भारत को वापस मिलेगा Asked by: अरविंद खुराना
  • नीतीश कुमार भारत ने अब तक 3546 करोड़ की डील का आधा पेमेंट कर दिया है।हालांकि अब तक भारत को बारह में से महज 3 हेलीकॉप्टर मिले हैं।पैसे वापस मिल सकते हैं लेकिन ये एक बेहद जटिल,और लंबी प्रक्रिया है।ये इस बात पर भी निर्भर करेगा कि भारत सरकार डील रद्द होने के बाद इटली की सरकार पर कितना दबाब बना पाती है।
  • दूसरे देशों की तरह भारत में रक्षा सौदों में लॉबिइंग को लीगल क्यों नहीं करार दिया जाता? Asked by: रिहान
  • नीतीश कुमार इसमें कई दिक्कते हैं जिसका खामियाजा भारत जैसे विकासशील देश को भुगतना पड़ सकता है।एक ताकतवर लॉबी जो पैसा, संपर्क और रसूख में दूसरी लॉबी से आगे है वो घटिया क्वॉलिटी के उपकरण भी रसूख के दम पर सेना को बेच सकती है।पूरे सिस्टम में भ्रष्टाचार व्याप्त हैस,पारदर्शिता नहीं है इस वजह से लाबिंग को लीगल करने से इस तरह की कई दिक्कतें आ सकती हैं।
  • जब हमारी खुफिया एजेंसी वायुसेना अध्यक्ष त्यागी की जासूसी कर रही थीं तो उनके खिलाफ सरकार को सबूत क्यों नहीं मुहैया करा पाईं। Asked by: विपिन कुमार
  • नीतीश कुमार खुफिया एजेंसियों के जरिए पूर्व वायुसेना अध्यक्ष एसपी त्यागी की जासूसी का तथ्य अब तक सामने नहीं आया है।
  • रक्षा सौदों के दलालों को भारत में, खासकर दिल्ली में रहने की इजाजत कैसे मिल जाती है। क्या इनके दूसरे धंधे भी होते हैं या ये अपनी पहचान छुपाकर रहते है? Asked by: राजकुमार भदौरिया
  • नीतीश कुमार देखिए सीबीआई जैसी देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी हर साल अनडिजायरेबल कांटैक्ट मैन नाम से दलालों की एक लिस्ट बनाती है।ये टॉप सीक्रेट लिस्ट होती है जिसमें अलग-अलग विभागों में सक्रिय दलालों की जानकारी होती है।बावजूद इसके उनके ऊपर कोई हाथ नहीं डालता।अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं कि ऐसा क्यों होता है।जबाब आसान है।ये बेहद ताकतवर और रसूखदार लोग होते हैं जो राजनेताओं,नौकरशाहों और दूसरे ताकतवर लोगों के रैकेट का हिस्सा होते हैं।
  • ye kaha pr fault hua hai helicopter deal me......reply it Asked by: rupendra singh
  • नीतीश कुमार भारत में रक्षा सौदों के कानून के तहत या डिफेंस प्रोक्येरमेंट प्रॉसीजर के तहत कोई भी देशी या विदेशी कंपनी किसी मिडिलमैन,दलाल या फिर किसी अन्य मध्यस्थ का इस्तेमाल ठेका हासिल करने के लिए नहीं कर सकता।आरोप है कि एडब्लू101 वीवीआई हेलीकॉप्टर का ठेका हासिल करने के लिए इटली की कंपनी फिनमेकानिका ने कई मिडिलमैन या फिर दलालों का इस्तेमाल किया।
  • क्या रक्षा सौदे का बिना दलाली या कमीशन के पूरा होना संभव है? क्या सौदों के दलाल राजनीतिक संरक्षण में पनपते हैं? Asked by: संतोष धीमान
  • नीतीश कुमार ऐसा तभी संभव है जब पूरा सिस्टम क्लीन हो।नीचे के अधिकारी से लेकर देश का रक्षामंत्री तक सभी ईमानदार होना चाहिए।इसमें कोई शक नहीं है कि रक्षा दलाल राजनीतिक संरक्षण में पनपते हैं।रक्षा सौदों में राजनेताओं,नौकरशाहों,रक्षा दलालों और मिलिट्री के अधिकारियों का एक सिंडिकेट काम करता है।
  • क्या सरकार इस घोटाला पर पर्दा डालने की कोशिस तो नही कर रही हे Asked by: आलोक कुमार सिंघानिया
  • नीतीश कुमार फिलहाल ऐसा नहीं कहा जा सकता।वजह,न तो जांच एजेंसी के पास अभी इस मामले से जुड़े पूरे कागजात हैं और न ही सरकार के पास।जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी,जांच एजेंसी के रवैए से ये साफ हो पाएगा।
  • क्या तहलका मामले के बाद सरकार ने रक्षा सौदों को लेकर अपनी नीति में कोई सुधार किया Asked by: गौरव
  • नीतीश कुमार देखिए जिस अंदाज में आए दिन रक्षा सौदों में घोटाले का खुलासा हो रहा है,उससे तो ऐसा लगता नहीं।तहलका के बाद स्कॉरपीनी सबमेरिन डील,बराक मिसाईल डील जैसे कई रक्षा सौदों में घओटाले के आरोप लगे।भारत में जो रक्षा खरीद की शर्तें या डीपीपी यानि डिफेंस प्रोक्योरमेंट प्रोसीजर होता है उसके मुताबिक कंपनी को ग्लोबल टेंडर के जरिए ठेके की दौड़ में शामिल होना होता है।शर्त होती है कि वो किसी हालत में किसी मिडिलमैन या फिर मध्यस्थ का इस्तेमाल ठेका पाने के लिए नहीं करेंगें।बावजूद इसके जो इन सौंदों में एक सिंडिकेट काम कर रहा होता है वो इन शर्तों पर भारी पड़ता है।
  • क्या बिना राजनीतिक संरक्षण के इतनी बड़ी डील में दलाली संभव है? Asked by: परमजीत
  • नीतीश कुमार देखिए बड़े रक्षा सौदों में राजनेताओं,रक्षा दलालों,मिलिट्री के अधिकारियों और नौकरशाहों का एक सिंडिकेट काम करता है।बड़े रक्षा सौदों के लिए शर्ते दलालों की ओर दी जाने वाली शानदार पार्टियों में तय हो जाती हैं।अधिकारियों की तरफ से उन्हें बता दिया जाता है कि वो दरअसल टेंडर की शर्तें कुछ इस अंदाज में रख रहे हैं कि सिर्फ वो ही इसे पूरा कर सकता है।ऐसे में दलालों को राजनीतिक संरक्षण की बात से इंकार नहीं किया जा सकता।
  • भारत अपनी रक्षा जरूरतें खुद क्यों नहीं पूरी कर पाता। क्या इसमें भी विदेशी बड़ी कंपनियों के दबाव में काम होता है। Asked by: दीपक वर्मा
  • नीतीश कुमार इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता।देश को रक्षा उपकरणों के मामले में स्वायत्त नहीं होने देने के पीछे भी रक्षा दलालों,सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठान जो रक्षा उपकरण बनाते हैं उनके अधिकारी और यहां तक कि कुछ मामलों में मंत्रालय के अधिकारियों का एक कार्टल काम करता है।जैसे-टाट्रा ट्रक डील मामले में भारत को 1996-97 तक भारत में ही टाट्रा ट्रक बनाना शुरू कर देना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ।सीएजी ने भी इस पर अपनी रिपोर्ट में आपत्ति उठाई थी।
  • क्या इस घोटाले का सच सामने लाना सीबीआई के बस में है Asked by: अनिमेश
  • नीतीश कुमार फिलहाल ये इतना आसान नजर नहीं आता।ये इस बात से पता चलता है कि इस मामले में खुलासे को करीब एक ङफ्ता बीतने को आया लेकिन देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी अब तक इस मामले में पीई यानि प्रिलिमनरी इंक्वॉइरी तक दर्ज नहीं कर पाई है।पीई का दर्ज होना ये बताता है कि जांच एजेंसी ने अब अधिकारिक तौर से पड़ताल शुरू कर दी है।लेकिन मामले में एफआईआर दर्ज करने की बात तो दूर सीबीआई अब तक पीई भी दर्ज नहीं कर पाई है।
  • kya defence scam per aj tak ke cbi kisi result per phunchi . this is shame full for our nation .as media i think, ibn can open all chapter of tainted politician ,. broker like tyagi and others. Asked by: sukirt
  • नीतीश कुमार आपका कहना बिल्कुल सही है।रक्षा सौदों की पड़ताल को अंजाम तक पहुंचाने के मामले में सीबीआई का रिकार्ड बहुत अच्छा नहीं है।बराक मिसाइल सौदे की जांच हो या फिर हाल फिलहाल के टाट्रा ट्रक डील मामले की जांच।सीबीआई की कोई भी जांच नतीजे पर पहुंचती नजर नहीं आती।न्यूज चैनल के तौर पर तथ्यों को उजागर कर सकते हैं,लेकिन कार्रवाई का जिम्मा जांच एजेंसी और सरकार का है।

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नीतीश कुमार
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