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आज की निवेश टिप: टैक्स बचाने के 5 रामबाण उपाय

Updated Jun 12, 2013 at 11:07 am IST |

 

12 जून 2013
Moneycontrol.com


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टैक्स प्लानिंग आपके पर्सनल फाइनेंस का अहम हिस्सा है। ऐसा कई बार देखा गया है कि कई लोग टैक्स सेविंग के लिए ही निवेश पर विचार करते हैं, ताकि टैक्स बचाने का एक सबूत उनके पास आ जाए। हालांकि इसी समय वित्तीय सलाहकार, बैंक और कई वित्तीय संस्थाएं भी आपको टैक्स बचाने के नुस्खे बताने लगती हैं। ऐसी परिस्थितियों में कोई भी निवेश करने से पहले इसकी समीक्षा करना बेहद जरूरी है, ताकि इस निवेश की आपको कितनी जरूरत है, कहीं ये निवेश पर केवल टैक्स बचाने के लक्ष्य से तो नहीं कर रहे हैं। क्योंकि ऐसे निवेशों में भविष्य में नुकसान उठाना पड़ सकता है।

टैक्स सेविंग के विकल्प, जिसे निवेशक चुन सकते हैं।

1- जीवन बीमा: टैक्स सेविंग का यह बेहद लोकप्रिय विकल्प है, लेकिन कई बार जीवन बीमा के प्राथमिक उद्देशय को भूलकर केवल टैक्स बचाने के उद्देशय के साथ बीमा खरीद लेता है, जबकि कई बार उसे ऐसे किसी इंश्योरेंस प्रोडक्ट की आवश्यकता नहीं होती है। टैक्स बचाने के लिए उद्देशय से जीवन बीमा लेना सही है, लेकिन साथ ही बीमा के मुख्य को नहीं भूलना चाहिए।

2- पीपीएफ: पीपीएफ भी निवेश का एक बेहतर माध्यम है, जहां निवेशक को अच्छा रिटर्न प्राप्त होता है। साथ ही इस स्कीम के तहत सरकार ने 1 लाख रुपये तक के रिटर्न को 80सी के तहत कर मुक्त किया है। ऐसे में टैक्स सेविंग से साथ-साथ लंबी अवधि के नजरिए से निवेश के लिए पीपीएफ एक बेहतर विकल्प है।

3- ईएलएसएस: पिछले 5 साल से इक्विटी बाजार की धीमी चाल ने निवेशकों को खासा परेशानी में डाल रखा है। ईएलएसएस जो कभी निवेशकों की पहली पसंद हुआ करता था, यह भी आज मंदी की मार झेल रहा है। लेकिन ज्यादा जोखिम और लंबी अवधि का नजरिया रखने वाले निवेशक ईएलएसएस के विकल्प को चुन सकते हैं।

4- फिक्स्ड डिपॉजिट: टैक्स बचाने के लिए एफडी का सबसे बेहतर विकल्प है। जिसमें निवेशक के निवेश की सुरक्षा के साथ-साथ टैक्स बेनीफिट भी प्राप्त होता है। निचले वर्ग के करधारकों के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट मौजूदा समय में सबसे पसंदीदा विकल्प बना हुआ है।

5- एनएससी: पुरानी नेशनल सेविंग स्कीम में तब्दीलियां करके इसमें अगले 10 साल के लिए नई स्कीम लाई गई है। जिसमें निवेशक का टैक्स बचने के साथ-साथ निवेश पर मिलने वाले मुनाफे का भी पूरा ख्याल रखा गया है।

सेक्शन 80डी:

इस सेक्शन के अंतर्गत करदाता हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम में 15,000 रुपये खुद के लिए और 20,000 रुपये तक अपने माता-पिता के लिए प्रीमियम भर सकता है। जिसके तहत करदाता टैक्स बचाने के साथ-साथ किसी बुरे वक्त के लिए भी खुद को सुरक्षित कर सकता है।

सेक्शन 80सीसीडी:

नई पेंशन स्कीम में इस सेक्शन के अंतर्गत छूट मिलती है। यदि किसी व्यक्ति ने अपनी सकल आय का 10 फीसदी या फिर अपने आधार वेतन का 10 फीसदी हिस्सा इस स्कीम में लगाया है तो वह सेक्शन 80सीसीडी के तहत कर में छूट पाने का हकदार होता है। हालांकि इस स्कीम के तहत टैक्स में छूट पाने की सीमा 1 लाख रुपये तक ही है। इसका ध्यान रखना भी जरूरी है।

सेक्शन 80सीसीडी(2):

इस सेक्शन के अंतर्गत यदि कोई प्रवर्तक अपने कर्मचारी के आधार वेतन के 10 फीसदी बराबर का हिस्सा नई पेंशन स्कीम में लगता है तो उतनी ही समान रकम कर्मचारी के वेतन से भी काटी जाती है। निवेश के साथ-साथ टैक्स बचाने का यह एक बेहतर माध्यम है।

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