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बिग बॉस 6: व्रजेश हीरजी की जिंदगी की पूरी कहानी, उनकी जुबानी

Updated Dec 12, 2012 at 10:18 am IST |

 

12 दिसम्बर 2012
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बिग बॉस सीजन छह में प्रतियोगी रहे हास्य-चरित्र अभिनेता व्रजेश हीरजी के फिल्मों में आने की कहानी अपने आप में एक फिल्म की स्टोरी की तर्ज पर है। बिग बॉस के घर से निकलने के बाद व्रीजेश हीरजी 'हिन्दी इन डॉट कॉम' के दफ्तर आए और बातों-बातों में 'हिन्दी इन डॉट कॉम' के सभी चाहनेवालों के लिए अपनी जिंदगी की कहानी कही। 'हिन्दी इन डॉट कॉम' के संपादक निमिष कुमार से बात करते हुए व्रजेश ने बताया कि कैसे एक कॉमर्स ग्रेजुएट जो कानून की पढ़ाई करने चला था, एक एडवरटाइजिंग एजेंसी में कॉपीराइटर था, एक दिन बॉलीवुड का सबसे भरोसेमंद और इंटेलीजेंट हास्य-चरित्र अभिनेता बन गया। जानिए व्रजेश हीरजी के फिल्मी सफर की कहानी, खुद व्रजेश हीरजी की जुबानी....

स्कूल के स्टेज से चला कारवां, जो आज तक ना रुका-

“मैं स्कूल के दिनों से ही स्टेज में दिलचस्पी लेने लगा था। मुंबई के सेंट जेवियर स्कूल में पढ़ता था लेकिन पढ़ाई से ज्यादा स्टेज से प्यार होने लगा था। हां, लेकिन कभी सोचा ना था कि एक दिन अभिनेता बन जाउंगा, कैरेटर रोल मिलेंगे और लोगों का इतना प्यार मिलेगा। स्कूल के दिनों में स्टेज जरुर किया था, लेकिन फिल्मों में अभिनेता बनने का अपना सपना कभी नहीं रहा था। स्कूल से पास हुए तो मुंबई के ही एचआर कॉलेज में जा पहुंचे। कॉलेज के दिनों में अब स्टेज जोर मारने लगा, तो सीधे पृथ्वी थियेटर ज्वाइन कर लिया। पृथ्वी थियेटर में नाटक करने लगा। साथ में फैमिली फर्म में फाइनेंस का काम सीखने लगा। इस बीच कानून की पढ़ाई के लिए एलएलबी करना शुरु कर दिया। फिर एक एड एजेंसी में बतौर कॉपी राइटर डेढ़ साल तक एड फिल्मों के लिए कॉपी लिखी। जिंदगी चल रही थी, मालूम नहीं कहां। ये भी मालूम नहीं था कि एक दिन टीवी की दुनिया से यूं साक्षात्कार होगा।

अरे, तुम तो सलमान खान जैसे भी नहीं दिखते-

एक बार निर्माता-निर्देशक रवि वासवानी ने पृथ्वी थियेटर में मेरा नाटक देखा और अपनी एंट्री हो गई टीवी सीरियल्स की दुनिया में। उन दिनों बीआई टीवी नाम का एक चैनल था, जिसके लिए बने एक सीरियल के चार एपिसोड भी किए थे। चैनल कब आया, कब गया, मालूम नहीं चला। सब काम-धाम छोड़कर घर में छह महीने बैठा। घरवालों ने खुद गरियाया। अपने को देखों, फिल्म में हीरो बनोगे। अरे, तुम तो सलमान खान जैसे भी नहीं दिखते। गजब टाइम था। अपना अच्छा-खासा फाइनेंस का काम छोड़कर बैठा था। लॉ करना था, लेकिन नाटक करने लगा। और अब वहां भी कुछ एकदम धांसू नहीं हुआ। कभी-कभी तो लगने लगता था कि ये टीवी सीरियल की दुनिया, ये एक्टिंग-वैक्टिंग अपने बस की बात नहीं है भाई। फिर ऊपर से काम भी नहीं था और ना कुछ जम पा रहा था।

रवि वासवानी ने ओल्ड मंक पिला-पिलाकर राजी किया-

ऐसे वक्त में निर्माता-निर्देशक रवि वासवानी ने मेरा पीछा नहीं छोड़ा। मेरे पीछे पड़ गए। जब मौका मिलता, मुझे पकड़कर ले जाते। ओल्ड मंक पीते और फिर शुरु हो जाते। व्रजेश, खुद को परख। देख अपने को। तेरे अंदर वो टेलेंट हैं। क्यों खाली-फोकट टेंशन ले रहा है। तेरे अंदर वो टेलेंट है कि तू मजा ला देगा। जरा सोच। इतना सब के बाद तो मेरे को भी लगा कि चल एक चांस लेते हैं।

कैडबरी शॉट्स के एड ‘मन में लड्डू फूटा’ जैसा घटा 20 साल पहले-

टीवी में आजकल एक एड बहुत आ रहा है। जिसमें अनुराग कश्यप अपने एक दोस्त पर फोन पर चिल्ला रहे हैं। अपनी फिल्म की कॉस्टिंग को लेकर। उन्हें एक सांवली लड़की चाहिए, जिसके गालों पर तिल हो। नीली आंखों वाली एक मॉडर्न लड़की चाहिए जो हमेशा अपने बालों से खेलती रहती हो, उनकी दो सहेलियां चाहिए जिनमें एक लंबी और एक छोटी हो। और उसी वक्त अनुराग कश्यप की नजर उनपर पड़ती है। ठीक ऐसा ही अपनी लाइफ में हुआ। उन दिनों फिल्म-टीवी की दुनिया में अपना एक ही दोस्त चल रहा था- अमित बहल। एक दिन वो निर्माता-निर्देशक आदि पोचा के दफ्तर में बैठा था। आदि पोचा ‘शांति’ सीरियल बना रहे थे और अपने एक नए टीवी सीरियल के लिए एक कैरेक्टर को लेकर परेशान थे। उस कैरेक्टर को प्ले करने के लिए आदि पोचा को कोई मिल नहीं रहा था। परेशान आदि पोचा अपने दफ्तर में बैठे फोन पर अपने कॉस्टिंग डॉयरेक्टर पर निकल रहे थे ठीक उस कैडबरी एड की तरह। ‘यार, तू मुझे एक सांवला सा, छोटा, दुबला-पतला लड़का ढूंढकर नहीं दे सकता, जिसका सेंस ऑफ ह्यूमर शानदार हो।’ आदि पोचा की बात खत्म होती कि अपने दोस्त ने अपना नाम आगे बढ़ा दिया। बस ऐसे ब्रेक मिला अपने को- सीरियल ‘सॉरी मेरी लॉरी’ में। सीरियल अच्छा चला और अपनी टीवी सीरियल की दुनिया में निकल पड़ी।

शाहरुख-माधुरी-करिश्मा की ‘दिल तो पागल है’ और मैं-

अपनी गाडी चल निकली। लेकिन फिल्मों में ब्रेक अभी नहीं मिला था। इस बीच आदित्य चोपड़ा अपनी फिल्म ‘दिल तो पागल है’ बना रहे थे। वो मुझे अपनी फिल्म में एक रोल देने का मन बना चुके थे। बात लगभग पक्की हो चुकी थी। लेकिन मैं बाहर था, लंदन में। और आदि को अपनी फिल्म शुरु करनी थी, ऐसे में वो रुक नहीं सकते थे और मेरे हाथों आया वो चांस निकल गया। इस पूरे वाकये में आदित्य चोपड़ा का एसोशियेट डॉयरेक्टर बहुत दुखी हुआ। उसको बहुत फील हुआ था। वो मुझे उस कैरेक्टर में देखना चाहता था। लेकिन क्या कर सकते थे। बाद में वहीं रोल निर्देशक शाद अली के भाई ने प्ले किया।

‘डर्टी पिक्चर’ जैसा वाकया और रितिक की ‘कहो ना प्यार है’-

मैं एक बार फिर अपनी नाटकों की दुनिया में बिजी हो गया था। उन दिनों मेरा एक नाटक ‘ऑल दी बेस्ट’ खूब चल रहा था। उसके ५०० से भी ज्यादा शो हुए थे। एक दिन रितिक रोशन अपनी मां के साथ वो प्ले देखने आए। रितिक और उनकी मम्मी को मेरी एक्टिंग पसंद आई। उन दिनों राकेश रोशनजी अपने बेटे को लॉन्च करने के लिए ‘कहो ना प्यार है’ बनाने की तैयारी कर रहे थे। मेरा नाटक देखने के बाद फिल्म ‘कहो ना प्यार है’ में रितिक के दोस्त टोनी के रोल के लिए रितिक और उनकी मां को मैं पसंद आ गया। वो मन बना चुके थे कि फिल्म ‘कहो ना प्यार है’ में टोनी का रोल मुझसे ही कराएंगे। लेकिन मुझसे इसे लेकर तब कोई बात नहीं हुई थी। जब राकेश रोशनजी ने फिल्म की कॉस्टिंग शुरु की तो मेरी ढूंढाई शुरु हुई।

अब इसमें भी एक पेंच था। जिस नाटक ‘ऑल दी बेस्ट’ में रितिक और उनकी मम्मी ने मुझे देखा था, वो कई भाषाओं में बना था। ऐसे में जिस रोल को मैने प्ले किया था, उस रोल को हर भाषा में करने वाले को राकेश रोशन जी ने बुलाया। लेकिन कोई भी मैं नहीं था। रितिक चाहता था कि वो रोल मैं ही करुं, लेकिन अपन थे कि सीन से रफूचक्कर। मेरी खूब खोजखबर ली गई, लेकिन मैं उन्हें नहीं मिल रहा था। ऐसे में परेशान रितिक एक दिन आदि (आदित्य चोपड़ा) के दफ्तर में बैठे थे। आदि ने परेशान देखा तो पूछा। रितिक ने बताया कि मेरी लॉन्चिंग फिल्म में मेरे दोस्त टोनी के किरदार के लिए जिस लड़के को पसंद किया था, वो मिल नहीं रहा। डैडी (राकेश रोशन) अब किसी दूसरे लड़के की तलाश करने के लिए कह रहे हैं, लेकिन आदि मेरा मन कह रहा है कि टोनी के किरदार से जस्टिस वो लड़का ही कर सकता है। आदि के पूछने पर रितिक ने सारी बात बताई कि कैसे उनसे मुझे नाटक ‘ऑल दी बेस्ट’ में परर्फोमेंस के दौरान देखा। अब इसे मेरी किस्मत ही कहेंगे कि आदि का वो एसोशियेट डॉयरेक्टर उस वक्त वहीं बैठा था, जो मुझे आदि की फिल्म ‘दिल तो पागल है’ के लिए कॉस्ट करना चाहता था। उसने रितिक को मेरा फोटो दिखाया और पूछा- क्या ये ही है वो लड़का? मुझे बाद में पता चला कि रितिक उछल पड़ा था। उसी वक्त मेरी बात हुई और बाकी बात आप सब जानते हैं।

‘कहो ना प्यार है’ और चल निकली अपनी गाड़ी-

‘कहो ना प्यार है’ जब सुपर-डुपर हिट हुई तो मजा आ गया। आज भी लोग कहते है कि रितिक के बाद मेरे कैरेक्टर को लोगों ने पसंद किया। उसके बाद से मुझे फिर पीछे मुड़कर देखने की जरुरत ही नहीं पड़ी। फिर तो कई फिल्में की और बहुत से रोल लोगों को बहुत पसंद आए। अभी एक नाटक ‘चाइनीज कॉफी’ कर रहा हूं। कुछ फिल्में हैं। लेकिन अभी तो मन अपनी फिल्म की स्क्रिप्ट पर काम कर रहा हूं। आधी हो गई है। देखते है अब स्क्रिप्ट राइटिंग का मौका कब मिलता है, कब डॉयरेक्शन का ब्रेक मिलता है। लेकिन ‘कहो ना प्यार है’ के बाद मेरा लॉ करने का सपना पूरा नहीं हो सका। मैंने एक्टिंग के दौरान कई साल तक एलएलबी करने की कोशिश की थी, लेकिन अब लगता है लॉ में डिग्री नहीं कर पाउंगा। बॉस, अब तो पॉसीबल नहीं लगता। लेकिन जिंदगी से खुश हूं। आज ‘कहो ना प्यार है’ से आज तक के सफर को देखता हूं तो सुकून महसूस होता है।

धन्यवाद।

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पाठकों की राय | 12 Dec 2012

Dec 12, 2012

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raj mumbai


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