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हैप्‍पी बर्थ डे: शरद पवार से जुड़े 18 विवाद

Updated Dec 12, 2012 at 14:35 pm IST |

 

12 दिसंबर 2012 
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एनसीपी नेता और केंद्रीय मंत्री शरद पवार का आज जन्‍मदिन है। 2014 आम चुनाव करीब आ रहे हैं और इसमें शक नहीं कि पवार की भूमिका बेहद अहम होने जा रही है। एक ओर जहां शिवसेना पवार को एनडीए में लाने के लिए डोरे डाल रही है, वहीं कांग्रेस के साथ उनके तनावपूर्ण रिश्‍ते बने हैं, लेकिन चल रहे हैं। पवार और विवाद हमेशा से जुड़े रहे हैं। आइए उनके जन्‍मदिन पर जानते हैं पवार से जुड़े 18 विवाद...


* शरद पवार एक समय कांग्रेस के कद्दावर नेता हुआ करते थे, लेकिन सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर उन्‍होंने पार्टी छोड़ दी और राष्‍ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की स्‍थापना की। हालांकि, कुछ समय बाद ही उन्‍होंने कांग्रेस से हाथ मिला लिया। उनके इस कदम कड़ी आलोचना हुई और सत्‍तालोभी होने के आरोप भी लगे।   

* शरद पवार पर अपराधियों के साथ साठगांठ के भी आरोप लगे। 2002-2003 में महाराष्‍ट्र के तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री सुधाकर राव ने पवार पर ये संगीन आरोप लगाए थे। उन्‍होंने खुलासा किया था पवार ने पप्‍पू कलानी और हितेंद्र ठाकुर जैसे दबंगों की उनसे पैरवी की थी।

* शरद पवार के साथ विवाद हमेशा जुड़े रहे हैं। फिर चाहे भ्रष्‍टाचार के मामलों की बात हो या खेल में राजनीति करने की। उनके बारे में कहा जाता है जहां पर पैसा है, वहां शरद पवार हैं। दुनिया के सबसे अमीर भारतीय क्रिकेट के वो अध्‍यक्ष रहे। वो आईसीसी के भी अध्‍यक्ष रहे। इसके साथ ही वो केंद्र में मंत्री पद पर भी बने रहे।

* शरद पवार पर राजनीति में परिवारवाद को बढा़वा देने के आरोप लगे। उन्‍होंने केंद्र में अपनी बेटी सुप्रिय सुले और राज्‍य में भतीजे अजित पवार को आगे बढ़ाया। सुप्रिया सुले और अजित पवार दोनों पर कई घोटालों में संगीन आरोप लगे हैं।

* भ्रष्‍टाचार के आरोपों पर शरद पवार ने कभी कोई सफाई नहीं दी। फिर चाहे लवासा घोटाले की बात हो या शुगर मिल के लिए लामबंदी करने के आरोप। महंगाई के मुद्दे पर तो एक बार शरद पवार नेशनल मीडिया में सुर्खी बन बए थे। महंगाई को बढ़ावा देने वाले उनके बयानों पर पूरा देश खिन्‍न हो गया, लेकिन पवार इससे बेफिक्र होकर ये कह रहे थे कि इससे किसानों और शुगर मिलों को लाभ होगा। 

* महंगाई को लेकर बयानों से खफा एक व्‍यक्‍ित का गुस्‍सा तो शरद पवार पर कुछ तरह फूटा कि उसने उनके गाल पर तमाचा तक जड़ दिया था। हालांकि पवार ने इस मुद्दे को तूल नहीं दिया था। पवार के गाल पर तमाचे के बाद अन्‍ना हजारे ने भी चुटकी थी।  

* कृषि मंत्रालय से पवार का विशेष लगाव रहा है। उन पर चीनी और खाने पीने की सामग्री के दाम बढ़ाने के आरोप लगते रहे हैं। 2007 बीजेपी ने पवार पर गेहूं के आयात में घोटाले का आरोप लगाया था, लेकिन पवार पर जब जब आरोप लगे बात आई गई हो गई। हाल के दिनों में उनकी कई कंपनियां जैसे डायनामिक्‍स डेरी विवादों में रहीं। 

* एक मीडिया चैनल ने तो उनकी पूरी पार्टी की शुगर मिलों का चिट्ठा खोलकर रख दिया था, लेकिन पवार की सभी राजनीतिक दलों के साथ अच्‍छी पैठ होने की वजह से कभी वो जांच के फंदे में फंसे।

* 2011 में 2जी घोटाले की जांच के दौरान नीरा राडिया ने सीबीआई को बताया कि उनके मुताबिक डीबी रियलिटी का कंट्रोल पवार के ही हाथ में है। इसके अलावा लवासा घोटाले में तो पवार की पूरी फैमिली घिर गई, लेकिन किसी का बाल भी बांका नहीं हुआ।

* 2011 शरद पवार की संपत्ति पर भी विवाद खड़ा हुआ। उन्‍होंने अपनी संपत्ति 12 करोड़ की घोषित की थी, लेकिन उन संपत्ति इससे कहीं ज्‍यादा बताई गई।

* 2012 में उनके भतीजे और महाराष्‍ट्र की कांग्रेस व एनसीपी सरकार में उपमुख्‍यमंत्री रहे अजित पवार का नाम सिंचाई घोटाले में आया। उन्‍होंने इस्‍तीफा दे दिया, लेकिन जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ही हुई। 

* क्रिकेट पर पवार की पैठ किसी से छुपी नहीं रही। 2010 में आईपीएल पर टैक्‍स लगाने की योजना थी, लेकिन कहा जाता है कि पवार के प्रभाव की वजह से वो योजना धरी की धरी रह गई। इतना ही नहीं बीसीसीआई को खेल मंत्रालय के अधीन लाने की बात भी पवार के कारण ही दब जाती है। इस मामले पर अजय माखन और पवार खेमा आमने-सामने आ चुका है। 

* पवार का नाम अंडरवर्ल्‍ड दाफद इब्राहिम के साथ भी जुड़ा रहा। इन आरोपों की पुष्टि शाहिद बलवा के खुलासों से भी हुई। 2जी घोटाले की जांच में इस ओर भी ध्‍यान दिया जा रहा है।

* हजारों करोड़ का स्‍टांप घोटाला करने वाले अब्‍दुल करीम तेलगी ने नार्को टेस्‍ट में शरद पवार और छगन भुजबल का भी नाम लिया था। हालांकि, हर मामले की तरह इस मामले में भी कुछ आगे नहीं हो सका। 


* शरद पवार पहली बार विधासभा के लिए बारामती से 1967 में चुने गए। यशवंत राव चव्‍हाण् को शरद पवार को गॉडफादर माना जाता है। 


* शरद पवार ने 1978 में जनता पार्टी के साथ मिलकर महाराष्‍ट्र में सरकार बनाई और खुद राज्‍य के मुख्‍यमंत्री बने। ये वो दौर था जब इंदिरा गांधी की लोकप्रियता घट रही थी। उस वक्‍त पवार कांग्रेस (एस) बनाई थी।

* शरद पवार ने 1984 में पहली बार लोकसभा चुनाव जीता। इसके बाद 1985 में वो फिर विधानसभा के लिए चुने गए और उन्‍होंने केंद्र की राजनीति छोड़कर महाराष्‍ट्र की पॉलिटिक्‍स पर ध्‍यान देना ठीक समझा। 

* राजीव गांधी की हत्‍या के बाद जब प्रधानमंत्री पद के लिए पार्टी की बैठक हुई तो पीवी नरसिम्‍हा राव के साथ पवार का नाम सबसे आगे था, लेकिन तब से अब तक उनकी ये हसरत पूरी न हो सकी है।


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पाठकों की राय | 12 Dec 2012

Dec 13, 2012

मा- शरद पवार यांना वाढदिवसाच्या हर्दिकशुभेच्छा प्रंतु कोणाच्या शुभप्रर्सांग आसे आरोपलावणे चुकिचे आहेही आपली स्नासूकृती नाही

kailas u bhosale pusad

Dec 12, 2012

चोर है

RAVI tohana


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