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सफदरजंग से सिंगापुर तक सरकारी खुफिया ऑपरेशन की पूरी कहानी

Updated Dec 29, 2012 at 13:19 pm IST |

 

29 दिसंबर 2012
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दिल्‍ली गैंगरेप को लेकर पूरे देश में फैले आक्रोश की वजह से सरकार इस कदर डर गई थी उसे लड़की को अस्पताल से निकालने के लिए खुफिया ऑपरेशन चलाना पड़ा था। ये जानते हुए भी कि ऐसा करने से लड़की की जान खतरे में पड़ सकती है, लेकिन सरकार को लड़की की चिंता ही कहां थी? उसे बस एक ही खौफ सता रहा था कि देश में लड़की की मौत कहीं राष्‍ट्रव्‍यापी आंदोलन न खड़ा कर दे। सो उसने खुफिया ऑपरेशन की पूरी तैयारी कर ली। ये ऑपरेशन इतना खुफिया था कि स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय को भी इसकी जानकारी नहीं थी। लड़की को कैसे अस्‍पताल से निकाला जाएगा, कितने लोग उसे बाहर लेकर आएंगे, वो किन कपड़ों में होंगे, कौन-कौन से डॉक्‍टर उसके साथ जाएंगे। लड़की को किस रास्‍ते से ले जाएगा, इन सभी बातों पर दिल्‍ली पुलिस ने डॉक्‍टरों की टीम के साथ मिलकर पूरा प्‍लान बनाया और फिर वो गैंगरेप की शिकार लड़की को मौत के सफर पर लेकर चल पड़े। हालांकि, इस खुफिया ऑपरेशन को गुप्‍त रखने की पूरी तैयारी थी, लेकिन फिर भी मीडिया को इसकी भनक लग ही गई थी और एक फोटोग्राफर पुलिस से भी उस्‍ताद निकला। वो भी बुर्का पहनकर घूम रहीं महिलाओं के बीच बुर्का पहनकर ही शामिल हो गया। बाद में उसी ने लड़की के पासपोर्ट फोटो भी निकाली।       

सबसे पहले ICU के बाहर आईं तीन एंबुलेंस

दिल्‍ली पुलिस ने मीडिया की नजरों से इस खुफिया ऑपरेशन के लिए अपने प्‍लान के तहत सफदरजंग अस्‍पताल के बाहर तीन एंबुलेंस तैनात कीं, ताकि किसी को ये पता न चल सके कि किस गाड़ी में कौन है? इतना ही नहीं एंबुलेंस के ड्राइवर को ये भी बताया गया था कि वो सीधे एयरपोर्ट जाने वाले रास्‍ते की ओर न जाए बल्कि उसे ऐसे रास्‍ते से ले जहां कन्‍फ्यूजन बना रहे। 

मुस्लिम लड़की को कराया गया अस्‍पताल में भर्ती

पुलिस ने जिन तीन एंबुलेंसों को अस्‍पताल के बाहर खड़ा किया था, उनमें एक एंबुलेंस मेदांता की थी। इसी बीच बुर्का पहनकर महिलाएं अस्‍पताल के बाहर घूमने लगीं। कुछ देर में पुलिस एक मुस्लिम लड़की को अस्‍पताल लेकर आई और उसे एडमिट कराया। बाद में तीन एंबुलेंस अस्‍पताल से निकलीं। वो फोटाग्राफर चकरा गया कि कौन सी एंबुलेंस में गैंगरेप की शिकार लड़की को ले जाया जा रहा है।  

नकली परिवार को लेकर निकलीं दो एंबुलेंस

तीनों एंबुलेंस अस्‍पताल से बाहर निकलीं, जिनमें से दो एंबुलेंस में वो नकली परिवार थे, जिन्‍हें भ्रम की स्थिति पैदा करने के लिए लाया गया था। एंबुलेंस का पीछा करने का वाला फोटोग्राफर समझ नहीं पा रहा था कि अब वो क्‍या करे। इस काफिले में तीसरी एंबुलेंस मेदांता अस्‍पताल की थी। वो इसी उधेड़बुन में था और तभी उसे पता चला कि लड़की मेदांता की तीसरी एंबुलेंस में है, लेकिन एंबुलेंस को देखकर समझ नहीं आ रहा था कि वो मेदांता जा रही है या एयरपोर्ट। फोटोग्राफर इसी गफलत में था और अचानक उसने देखा कि एंबुलेंस एयरपोर्ट की ओर मुड़ गई। तब जाकर उसे राहत मिली। इसी फोटोग्राफर लड़की के पासपोर्ट की फोटो भी निकाली।

 

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पाठकों की राय | 29 Dec 2012

Dec 29, 2012

इस कार्रर्वाही से जाहिर है कि सरकार किस तरह अपनी मशीनरी का इस्तेमाल कर अपने आप को बचाने में लगी रहती है. ऐसे में सरकार से कोई उम्मीद करना बेकार है. जनता को अपनी सुरक्षा खुद करनी होगी. अपनी सुरक्षा को दस्ते बनाने होंगे. यानी कि यूथ मिलिशिया.

rdtyagi meerut

Dec 29, 2012

इस समयसरकार अपनी सोच रही हे ना देश की ना जनता की ये तो सिर्फ़ दिखावा था अपने को बचाने का कॉंग्रेस को शिर्फ अपनी लगी देश चाहे डूबे हम आम जनता ऐसे मरते रहेंगे ओर बेवकूफ़ बनते रहेगे ये सब होने के बाद भी हिमाचल मे कॉंग्रेस आ गई ये सब कमी हमारी हे इस गंदगी रूपी कॉंग्रेस को हम सब मिलकर राज्य ही नही देश मे कही कोई मंत्री ही ना हो इसका अब खेल ख़तम करो ओर देश को बचाओ जे हिंद वन्दे मा तर्म

sumer delhi

Dec 29, 2012

अफ़सोस होता है अपने पुरुष होने पर मुझे ,,, ओर उससे बी ज़्यादा अफ़सोस तब होगा अगर उसके दोषियो को एक ऐसी सज़ा ना दिला पाय जिसके बाद कोई बी पुरुष एक लड़की की तरफ हाथ बड़ाने की तो क्या नज़र उठाने मई भे उसके पसीने निकल पड़े .. सिर्फ़ कहने से हे कुछ नही होगा हमे ही अब कुछ करना होगा ओर वो तभी होगा जब हम आगे बड़े ओर ज़िम्मेदारी उठे... हमारे राज नेता शायद ये भूल चुके है की वो जहा है उन्हे हमने ही भेजा है वाहा ,,, ओर अब अगर दोषियो को एक ज़िम्मेदार सज़ा नही दे जाती है तो जनता उन्हे वाहा भे भेज सकती है जहा से वापसी मुश्किल हो सकती है.

Sachin Gupta New Delhi

Dec 29, 2012

सरकार जो चाह रही थी उसने वो किया, सरकार सायद उस लड़की के मरने का इंतज़ार कर रही थी तभी तो इतनी देरी हो रही है जबकि सारी सच्चाई पूरी दुनिया जान रही है की ऐसा करने वाल कौन है और वो भी पुलिस के क़ब्ज़े मे है तब भी इतनी देरी ! भगवान ना करे कहीं किसी दिन इनके अपने के साथ ऐसा ना हो जाए फिर ये क्या करेंगे ? अब भी सरकार नही जाग रही है सब लोग यही कह रहे हैं की कड़ी से कड़ी सज़ा दिलाएँगे ये बात सोनिया और मनमोहन जी भी कह रहें हैं वाह क्या बात है, सब कुच्छ आपके हाथ मे रहते हुए ये बात सोनिया, मनमोहन और जो भी बड़े नेता ये कह रहे हैं उनको थोड़ी सी भी शर्म नहीं आती, अरे उन मुजरिमो को पब्लिक के हाथ मे छोड़ देना चाहिए, जिस तरह उन्होने इस लड़की के साथ किया वैसे ही इन सभी लोगों के साथ होना चाहिए! फ़ैसला एक घंटे मे हो जाएगा! दीपक, नूरसराई, नालंदा बिहार

Deepak Kumar Noida


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