26 जुलाई 2014

न्यूजलैटर सब्सक्राइब करें

CLOSE

Sign Up


शायरी: ‘चलो अपनी मोहब्बत सभी को बांट आएं..’

Updated Aug 16, 2012 at 12:11 pm IST |

 

diamondpublication.com

जांनिसार अख़्तर की शायरी


हमारे शहर में बेचेहरा लोग बसते हैं
कभी-कभी कोई चेहरा दिखाई पड़ता है

चलो कि अपनी मोहब्बत सभी को बाँट आएँ
हर एक प्यार का भूखा दिखाई पड़ता है

न कोई ख्व़ाब, न कोई ख़लिश, न कोई खुमार
ये आदमी तो अधूरा दिखाई पड़ता है

(साभारः तनहा सफ़र की रात, डायमंड प्रकाशन, सर्वाधिकार सुरक्षित।)

 
 

 

आजादी@65: राजा ने कैसे समझाया स्वदेशी का मोल?


 

 

 

यह खबर आपको कैसी लगी

10 में से 4 वोट मिले

पाठकों की राय | 16 Aug 2012


कृपया ध्यान रखें: अपनी राय देते समय किसी प्रकार के अभद्र शब्द, भाषा का इस्तेमाल न करें। अभद्र शब्दों का इस्तेमाल आपको इस साइट पर राय देने से प्रतिबंधित किए जाने का कारण बन सकता है। सभी टिप्पणियां समुचित जांच के बाद प्रकशित की जाएंगी।
नाम
शहर
इमेल

आज के वीडियो

प्रमुख ख़बरें

Live TV  |  Stock Market India  |  IBNLive News  |  Cricket News  |  In.com  |  Latest Movie Songs  |  Latest Videos  |  Play Online Games  |  Rss Feed  |  हमारे बारे में  |  हमारा पता  |  हमें बताइए  |  विज्ञापन  |  अस्वीकरण  |  गोपनीयता  |  शर्तें  |  साइट जानकारी
© 2011, Web18 Software Services Ltd. All Rights Reserved.