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नवरात्र में चमकेगी किस्मत, करें राशि अनुसार उपाय!

Updated Oct 17, 2012 at 10:31 am IST |

 

17 अक्टूबर 2012
एजेंसियां


मंगलवार से नवरात्र का प्रारंभ हो गया है। नवरात्रि में कोई नौ दिनों तक उपवास रखता है तो कोई चप्पल नहीं पहनता। यदि आप इस नवरात्रि में माता को प्रसन्न करना चाहते हैं तो अपना राशि के अनुसार माता की पूजा करें। इससे आपको माता कि विशेष कृपा तो प्राप्त होगी साथ ही आपकी हर मुश्किल भी आसान होगी:-

मेष- इस राशि के लोगों को स्कंदमाता की विशेष उपासना करनी चाहिए। दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करें। स्कंदमाता करुणामयी है,जो वात्सलयता का भाव रखती है।

वृषभ- वृषभ राशि के लोगों को महागौरी स्वरुप की उपासना से विशेष फल प्राप्त होते हैं। ललिता सह्स्त्र नाम का पाठ करें। जन कल्याण कारी है। अविवाहित कन्याओं को आराधना से उत्तम वर की प्राप्ति होती है।

मिथुन- इस राशि के लोगों को देवी यंत्र स्थापित कर बर्हम चारिणी की उपासना करनी चाहिए साथ ही तारा कवच का पाठ रोज़ करें।मां बर्हम चारिणी ज्ञान प्रदाता और विद्या के अवरोध को दूर करती है।

कर्क- कर्क राशि के लोगों को शैलपुत्री की पूजा उपासना करनी चाहिए। लक्ष्मी सह्स्र्त्रनाम का पाठ करें। भगवती कि वरद मुद्रा अभय दान प्रदान करती है।

सिंह- सिंह राशि के लिए मां कूष्मांडा की साधना विशेष फल करने वाली है। दुर्गा मंत्रो का जप करें। ऐसा माना जाता है कि देवी मां के हास्य मात्र से ही बर्हमांड की उत्पत्ती हुई थी। देवी बलि प्रिया है,अत:साधक को नवरात्र की चतुर्थी को आसुरी प्रवृत्ति यानी बराइयों का बलिदान देवी के चरणों में निवेदित करते है।

कन्या- इस राशि के लोगों को मां बर्ह्मचारिणी का पूजन करना चाहिए। लक्ष्मी मंत्रो का सविधि जप करें। ज्ञान प्रदान करती हुई विद्या के मार्ग को अवरोधों को दूर करती है। विद्यार्थियों के लिए देवी की आराधना फलदाई है।

तुला- तुला राशि के लोगों को महागौरी की पूजा आराधना से विशेष फल प्राप्त होता है। काली चालीसा या संप्तशती के प्रथम चरित्र का पाठ करें। जन कल्याणकारी है। अविवाहित कन्याओं को आराधना से उत्तम वर की प्राप्ति होती है।

वृश्चिक- इस राशि के लोगों को स्कंदमाता की उपासना श्रेष्ठ फल प्रदान करती है। दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।

धनु- इस राशि वाले मां चंद्रघटा की उपासना करें संबंधित मंत्रो को यथाविधि अनुष्ठान करें। घंटा प्रतीक है उस बर्हमनाद का, जो साधक के भय और विघ्नों को अपनी ध्वनि से समुल नष्ट करता है।

मकर- मकर राशि के जातकों के लिए कालरात्रि की पूजा सर्वश्रेष्ठ मानी गई है। नवार्ण मंत्र का जप करें। अंधकार में भक्तों का का मार्ग दर्शन और प्राकृतिक प्रकोप अग्निकांड आदि का शमन करती है।

कुंभ- कुंभ राशि के जातकों के लिए कालरात्रि की उपासना लाभदायक है। देवी कवच का पाठ करें। अंधकार में भक्तों का मार्गदर्शन और प्राकृतिक प्रकोप का शमन करती है।

मीन- मीन राशि के लोगों के मां चंद्रघंटा की उपासना करनी चाहिए। हरिद्र (हल्दी) की माला से यथासंभव बगलामुखी मंत्र का जप करें। घंटा उस बर्हमनाद का प्रतीक है जो साधक के भय एवं विघ्नों को अपनी ध्वनि से समुल नष्ट करता है।   

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