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तेनालीराम ने ज्योतिष की खोली पोल

Updated Feb 03, 2011 at 14:48 pm IST |

 

तेनाली राम के बारे में

(1520 ई. में दक्षिण भारत के विजयनगर राज्य में राजा कृष्णदेव राय हुआ करते थे। तेनाली राम उनके दरबार में अपने हास-परिहास से लोगों का मनोरंजन किया करते थे। उनकी खासियत थी कि गम्भीर से गम्भीर विषय को भी वह हंसते-हंसते हल कर देते थे।

उनका जन्म गुंटूर जिले के गलीपाडु नामक कस्बे में हुआ था। तेनाली राम के पिता बचपन में ही गुजर गए थे। बचपन में उनका नाम ‘राम लिंग’ था, चूंकि उनकी परवरिश अपने ननिहाल ‘तेनाली’ में हुई थी, इसलिए बाद में लोग उन्हें तेनाली राम के नाम से पुकारने लगे।

विजयनगर के राजा के पास नौकरी पाने के लिए उन्हें बहुत संघर्ष करना पड़ा। कई बार उन्हें और उनके परिवार को भूखा भी रहना पड़ा, पर उन्होंने हार नहीं मानी और कृष्णदेव राय के पास नौकरी पा ही ली। तेनाली राम की गिनती राजा कृष्णदेव राय के आठ दिग्गजों में होती है।)


ज्योतिषी की भविष्यवाणी

बीजापुर के सुल्तान को पता चला कि उसका भेजा हुआ जासूस ‘राजा साहब’ तेनाली राम की सूझबूझ के कारण पकड़ लिया गया और उसे मार दिया गया है। उसे यह भी पता चला कि विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय बीजापुर पर आक्रमण करने की तैयारी कर रहे हैं। सुल्तान घबरा गया। वह जानता था कि इतने कुशल सेनापति के नेतृत्व में विजयनगर की सेना अवश्य जीत जाएगी।

उसने एक चाल चली। उसने विजयनगर के राज- ज्योतिषी को एक लाख रुपए की रिश्वत देकर अपने साथ मिला लिया और कहा कि वह यह भविष्यवाणी करे कि राजा ने अगर तुंगभद्रा नदी एक वर्ष के समाप्त होने से पहले पार की तो उसकी मृत्यु हो जाएगी।

ज्योतिषी ने एक लाख रुपए लेकर यह भविष्यवाणी कर दी। राजा ने सुना तो हंस दिए, “मैं नहीं मानता कि इस समय आक्रमण करने में कोई खतरा है।” दरबारियों और सेनापतियों को अवश्य राजा के प्राणों की चिन्ता थी।

उन्होंने राजा से कहा, “महाराज, करोड़ों की सुरक्षा आप पर निर्भर है। कम-से-कम उनका ध्यान रखकर ही आप अपने प्राणों को खतरे में न डालें। आप अगर एक साल प्रतीक्षा कर भी लें तो भी कोई अन्तर नहीं पड़ता। आपकी शक्ति के आगे बीजापुर कहां टिक पाएगा लेकिन भाग्य के साथ लड़ाई मुश्किल है। आप अभी आक्रमण न करें तो अच्छा है।”

इधर रानियों ने भी राजा से मिन्नत की कि बीजापुर पर आक्रमण के लिए वे एक वर्ष रुक जाएं। राजा ने तेनाली राम से कहा, “मैं बीजापुर पर अभी आक्रमण करना चाहता हूं, लेकिन रानियों और दरबारियों को भी नाराज नहीं करना चाहता।”

तेनाली राम भी राजा से सहमत था। उसने कहा, “हर भविष्यवाणी पर विश्वास नहीं करना चाहिए।” “मैं चाहता हूं कि कोई इस ज्योतिषी की भविष्यवाणी को गलत सिद्ध कर दे। अगर कोई ऐसा कर दे तो मैं उसे दस हजार स्वर्ण मुद्राएं दूंगा।” राजा ने कहा।

तेनालीराम ने कहा “यह काम आप मुझे सौंप दीजिए, लेकिन एक शर्त है। ज्योतिषी को झूठ सिद्ध करने पर अगर उसे कोई दंड देना पड़ा, तो मुझे इसके लिए महाराज क्षमा करेंगे।” तेनाली राम बोला।

“अगर वह झूठ बोल रहा है तो तुम्हें उसे मृत्युदंड तक देने का अधिकार मैं देता हूं। राजा ने कहा।” तेनाली राम ने अपने मित्र सेनापति से मिलकर एक योजना बनाई। अगले दिन तेनाली राम ने राजा के सामने ज्योतिषी से पूछा, “ज्योतिषी जी, क्या आपकी सभी भविष्यवाणियां सदा सच होती हैं?”

“इसमें क्या संदेह है?” ज्योतिषी ने कहा, “अगर मेरी एक भी भविष्यवाणी कोई झूठी साबित कर दे तो मैं उसे अपने प्राणों पर अधिकार देने को तैयार हूं।” “तब तो आप जैसे महान ज्योतिषी को पाकर हमारा देश धन्य है। क्या मैं जान सकता हूं कि इस समय आपकी आयु क्या है और आप कितनी आयु तक जिएंगे?” तेनाली राम ने कहा। “इस समय मेरी आयु 44 वर्ष है। अभी मुझे 30 वर्ष और जीना है। भाग्य के अनुसार मेरी मृत्यु 74 वर्ष की आयु में होगी। इसमें एक पल का भी हेर-फेर नहीं हो सकता।” ज्योतिषी बोला।

एकाएक सेनापति की तलवार चमकी और ज्योतिषी का सिर धड़ से अलग होकर पृथ्वी पर आ गिरा। तेनाली राम ने कहा, “आखिर ज्योतिषी जी की भविष्यवाणी गलत सिद्ध हो गई। बुरा सोचने वाले का बुरा ही होता है। मैं जानता था कि यह आदमी बेईमान है। दूसरों का भाग्य बताने चले थे महाशय, किन्तु अपनी किस्मत न पढ़ सके।”

बाद में ज्योतिषी के घर की तलाशी ली गई तो शत्रु के कई पत्र उसके यहां मिले, जिनसे उसकी देश के प्रति गद्दारी साबित हो गई। सभी ने तेनाली राम की प्रशंसा की। राजा ने उसे दस हजार स्वर्ण मुद्राएं दीं और बीजापुर पर आक्रमण करके उसे जीत लिया।

विजय के बाद जब राजा वापस लौटे तो बोले, “यह सब तेनाली राम की बुद्धि का परिणाम है।” उन्होंने तेनाली राम को स्वर्ण मुद्राओं की एक और बड़ी थैली भेंट में दी।

(साभारः तेनालीराम की सूझबूझ, डायमंड प्रकाशन, सर्वाधिकार सुरक्षित।)

 

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May 30, 2013

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RAKESH VISHWAKARMA CHHATTISGARH KORBA

Feb 07, 2011

यह वर्णन अतिरेकपूर्ण था. पिटाई करने से भी काम चलता था. प्रश्न हो सकता था की अगले कुछ पलों में आपके साथ क्या होने वाला है, क्या आपको पता है? गर्दन काटने का वर्णन सही प्रभाव नहीं डालता

Kapil Batra Delhi


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