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पढ़े-लिखे युवा, काबलियत की कमी

Updated Jun 14, 2008 at 16:02 pm IST |

 

14 जून 2008
जोश18

भारतीय तकनीकी संस्थान एवं विश्वविद्यालयों से निकलने वाले युवाओं को आज के दौर में कई बुनियादी आवश्यकताओं की कमी महसूस हो रही है। आज ढांचागत संरचनाओं को मजबूत करने, कुशलता विकास, पाठ्यक्रम में बदलाव, व्यावसायिक प्रशिक्षण और उच्च शिक्षा के विकल्पों की तलाश की जरूरत है ताकि इन संस्थानों से उत्तीर्ण होकर निकलने वाले युवाओं को रोजगार उपलब्ध हो सके और साथ ही उन्हें रोजगार के योग्य बनाया जा सके।

यह ‘पर्सेप्शन एनालिसिस’ सर्वेक्षण पीएचडी चेम्बर द्वारा किया गया और इन तथ्यों का पता चला। इस सर्वेक्षण से पता चला है कि हर साल विभिन्न संस्थानों से उत्तीर्ण होने वाले 20 लाख स्नातकों में से केवल 20 प्रतिशत ही रोजगार के लिए काबिल होते हैं। साथ ही सर्वेक्षण यह भी बताता है कि इजरायल, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड और जापान के मुकाबले यहां दिए जाने वाले व्यावसायिक प्रशिक्षण का लाभ लेने वालों की संख्या भी काफी कम है।

पढ़ें: केवल 40 फीसदी स्नातक ही हैं ‘काबिल’

इन सबके बावजूद विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की शिक्षा लेने पर जोर दिया जाता है जबकि ऐसे विद्यार्थियों को रोजगार मिलने और वेतन कमाने में काफी समय लग जाता है।

पर्सेप्शन सर्वेक्षण बताता है कि देश में विश्व स्तर की माध्यमिक शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण की आवश्यकता है। इसके लिए सरकार और उद्योग को मिलकर व्यावसायिक प्रशिक्षण देने वाले संस्थान स्थापित करना चाहिए और विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त पाठ्यक्रम, शिक्षा की सामग्री और प्रशिक्षण की व्यवस्था करनी चाहिए।

पढ़ें: भिखारियों को मिलेगा रोजगार

साथ ही सर्वेक्षण में यह भी पता चला है कि शोध कार्य करने वाले विद्यार्थियों को काफी कम मेहनताना दिया जाता है जिस वजह से विद्यार्थियों की रुचि इस क्षेत्र में कम हो गई है। मेधावी और कुशल छात्र मोटा वेतन देने वाले क्षेत्रों की रुख कर देते हैं।

 

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पाठकों की राय | 14 Jun 2008

Jun 28, 2013

Jab govt khud govt job ke liye rishwat lene lagi hai to kaha se koi job k liye apply kar pata, pura department to buddho k karan sad raha he...Aur youth generation par aarop lagaya jaa rha he....Research karne ka itna hi shoukh he to college me ya kisi university me ghuss k puchho k kyo job k liye itni rishwat li jaa rhi he

VINAY VAISHNAV RAIPUR

Dec 11, 2012

आज के जमाने मे पड़ाई करना मुश्किल नही है |कितबे है |इंटरनेट के ज़रिए जानकारी ले सकते है बच्चा पड़ने वाला होना चाहिए |पर होता किया है के इंटरनेट का उपयोग सही धन से हो |

kuldip kumar Ludhiana

Dec 11, 2012

शिक्षा का स्तर बहुत गिर चुका है. जगह जगह बिना किसी मापदंड के स्कूल कॅलेज खुल रहे है . उपर से रिज़र्वेसन ने सारा बेड़ा गर्क कर दिया है. तीस प्रतिशत पर प्रवेश पाने वाले से आप क्या उम्मेड कर सकते हों. मे रिज़र्वेस्न के खिलाफ नही हू पर उसके लिए भी मापदंड .

MOH DE

Dec 11, 2012

कमी तो होगी ना / आज देश की बड़ी बड़ी universities आज पैसे लेकर बड़ी बड़ी डिग्रिया दे रही तो फिर क़ाबलियत कहा से आएगी/ आज मेरा ही दाखिला देता हू मे mba एक देश की जानीमानी university से कर रहा हू वाहा पर पड़ने वाले 90% छात्र की सोच सिर्फ़ यदि के हमे तो सिर्फ़ डिग्री चाहिए और वह कॉलेज एसे एसे लोगो को डिग्री दे रहा हे की जिनको सब्जेक्ट के नाम तक भी मालूम नही हे . ही नही वह पर जो पड़ाने वाले शिक्षसा भी ये बोलते हे की यहा पर कोई फैल नही होगा/ ये हे इस देश के शिक्षा का ढाँचा / यदि एसेकिसी बेवकूप को जो लायक ही नही उसको डिग्री देदोगे तो फिर क़ाबलियत कहा से आयेगी /

Sanjay Singh ahmedabad

Dec 10, 2012

. आम . बेड डिग्री धरी हू पर प्राइवेट स्कूल मे मुहे 2000 र्स की तनखावाह मिल रही ह कहा ह क़ानून एक बा पास लड़के को 3000 र्स की सॅलरी . स्कूल मे मिल रही ह कहा गया क़ानून ओर कहते ह की काबिलियत की कमी ह प्लीज़ . .

DEVENDRA JAIPUR

Dec 10, 2012

. . . . . . . . . . . . 2000 . . . . . . . . . . . . . . 3000 . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . .

DEVENDRA JAIPUR

Dec 10, 2012

. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 2000 . . . . . . .

DEVENDRA JAIPUR

Mar 09, 2010

इंग्लीश एक व्यापारिक भाषा है और हिन्दी एक राष्ट्रीय भाषा है अगर दोनो को सही स्थान पर और सही तरीके से, समान स्तर पर, समान रूप से, और सर्वत्र एक साथ लागू करना ... लेकिन ये मूंकिन नही है... क्यो की प्रशासन कोई भी काम पूरी ईमानदारी से करने मे बिलकूल ही सक्षम नही है... और पैसा तो अपना खेल करता ही है ना... ये चीन तोड़ा ही है ?

FIRST STEPS INDIA

Mar 07, 2010

लोकतंत्र मे सबका समान विकास हो इस हेतु रोज़गार के समान अवसर सभी को मीलने चाहिए.

Himesh Upadhyay Banswara

Feb 03, 2010

कृपया उचित मंच तक यह बात पहुँचा देवे की रोज़गार चाहने वालों को हतोत्साहित न किया जाए अपितु उन्हें सही मार्गदर्शन दिया जाए ताकि वे राष्ट्र की सही सेवा कर सकें इसके लिए सरकार यह कर सकती है की उन्हें रोज़गार समाचार जैसी वेबसाइट बिना किसी शुल्क के देखने की याटो व्यवाष्ता भारत संचार निगम के सौजन्य से करदी जाए अथवा रोज़गार कार्यालय नें पंजीयन के प्रमाण पत्र को जारी किया है तो ये पंजीयन ऑनलाइन करके ऐसे पंजीकृत बेरोज़गारों का मुफ़्त रोज़गार वेब साइट देख लेने का प्रबंध हो सकता है .प्रेषक:-सुनीता जात(

Sunita Jat Sikar(Raj.)

Jul 23, 2008

तीन साल के डिप्लोमा को ग्रेजुएट कयो नही माना जाता है .

manoj tiwari seoni

Jul 06, 2008

देश मे पड़े लिखे काबिल है पर उनमे अनुभव की कमी है ये अनुभव तब ही आएगा जब उन्हे रोज़गार मिलेगा. सरकारी और गेर सरकारी संस्थान फ़्रेशर पास आओट से दो या तीन साल का कार्या अनुभव माँगते है तो वो लाएगा कहा से जब उसको काम करने का अवसर ही नही प्रदान किया गया हो.

RAMESH TARETIA AAKRITI GARDEN NEHRU NAGAR BHOPAL

Jun 16, 2008

शिक्षा का केवल अब एक ही मक़सद रह गया है की पढ़े लिखे और ब्यापार या नौकरी करना सामाजिकता, भाईचारा, स्नेह, मीठा पन , बनधुत्व ये सारे नये टेक्नोलोजी मे विलीन हो गया हमारी पुरानी सभ्यता को आज भी याद किया जाता है ओ हमारा राह है

vikramkumarmishra sahibabad, Ghaziabad


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