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वीकैंड मैगजीन: इस हफ्ते का त्‍योहार ‘जन्‍माष्टमी’!

Updated Aug 11, 2012 at 17:16 pm IST |

 

तृप्ति चौरे
हिंदी डॉट इन डॉट कॉम


इस हफ्ते भगवान कृष्‍ण का जन्‍मदिवस धूमधाम से देश और विदेश में मनाया गया। तो आज चलिए जन्‍माष्टमी के शुभअवसर पर हमारे साथ।

‘जन्‍माष्‍टमी’ के त्‍यौहार में भगवान विष्‍णु की, श्री कृष्‍ण के रूप में, उनकी जयन्‍ती के अवसर पर प्रार्थना की जाती है। हिन्‍दु पौराणिक कथा के अनुसार कृष्‍ण का जन्‍म, मथुरा के असुर राजा कंस, जो उसकी सदाचारी माता का भाई था, का अंत करने के लिए हुआ था। जन्‍माष्‍टमी के अवसर पर पुरूष व औरतें उपवास व प्रार्थना करते हैं। मन्दिरों व घरों को सुन्‍दर ढंग से सजाया जाता है व प्रकाशित किया जाता है। इस त्‍यौहार को कृष्‍णाष्‍टमी अथवा गोकुलाष्‍टमी के नाम से भी जाना जाता है।

बाल कृष्‍ण की मूर्ति को आधी रात के समय स्‍नान कराया जाता है तथा इसे हिन्‍डौले में रखा जाता है। पूरे उत्‍तर भारत में इस त्‍यौहार के उत्‍सव के दौरान भजन गाए जाते हैं व नृत्‍य किया जाता है। भगवान विष्णु का ही एक रूप कृष्ण जी का भी है जिन्हें लीलाधर और लीलाओं का देवता माना जाता है। कृष्ण को लोग रास रसिया, लीलाधर, देवकी नंदन, गिरिधर जैसे हजारों नाम से जानते हैं। भगवान कृष्‍ण द्वारा बताई गई गीता को हिंदू धर्म के सबसे बड़े ग्रंथ और पथ प्रदर्शक के रूप में माना जाता है। कृष्ण जन्माष्टमी कृष्ण जी के ही जन्मदिवस के रूप में प्रसिद्ध है।

मान्यता है कि द्वापर युग के अंतिम चरण में भाद्रपद माह के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। इसी कारण शास्त्रों में भाद्रपद कृष्ण अष्टमी के दिन अर्द्धरात्रि में श्रीकृष्ण-जन्माष्टमी मनाने का उल्लेख मिलता है। पुराणों में इस दिन व्रत रखने को बेहद अहम बताया गया है।
 
श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि को रोहिणी नक्षत्र में देवकी व श्रीवसुदेव के पुत्र रूप में हुआ था। कंस ने अपनी मृत्यु के भय से अपनी बहन देवकी और वसुदेव को कारागार में कैद किया हुआ था। कृष्ण जी जन्म के समय घनघोर वर्षा हो रही थी। चारो ओर घना अंधकार छाया हुआ था। भगवान के निर्देशानुसार कुष्ण जी को रात में ही मथुरा के कारागार से गोकुल में नंद बाबा के घर ले जाया गया।

नन्द जी की पत्नी यशोदा को एक कन्या हुई थी। वासुदेव श्रीकृष्ण को यशोदा के पास सुलाकर उस कन्या को अपने साथ ले गए। कंस ने उस कन्या को वासुदेव और देवकी की संतान समझ पटककर मार डालना चाहा लेकिन वह इस कार्य में असफल ही रहा। दैवयोग से वह कन्या जीवित बच गई। इसके बाद श्रीकृष्ण का लालन–पालन यशोदा व नन्द ने किया। जब श्रीकृष्ण जी बड़े हुए तो उन्होंने कंस का वध कर अपने माता-पिता को उसकी कैद से मुक्त कराया।

 क्यों मनायी जाती हैं ‘कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी’

हिन्‍दुओं का यह त्‍यौहार श्रावण (जुलाई-अगस्‍त) के कृष्‍ण पक्ष की अष्‍टमी के दिन भारत में मनाया जाता है।

 

 कैसे और क्यों हुआ श्रीकृष्ण का पृथ्वी पर आगमन?

भगवान श्रीकृष्ण किसके अवतार हैं और वे द्वापर युग में पृथ्वी पर क्यों आए?

 

 जन्माष्टमी पर कैसे करें व्रत व पूजन

प्रात:काल उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प करें।

 

 जन्माष्टमी व्रत फलाहार में क्या खाएं क्या नहीं खाएं!

जन्माष्टमी व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंती हैं इसलिए ये व्रत जरूर करें।

 

 मुंबई: जन्‍माष्टमी की धूम, गली-गली में ‘गोविंदा आला रे..’

मुंबई में जन्माष्टमी के मौके पर दही हांडी फोड़ने का कार्यक्रम रखा जाता है। पूरे शहर में ही 100 से ज्यादा जगहों पर यह आयोजित होता है।

 

 वृंदावन में मनती है दिन की जन्माष्टमी

राधारानी की नगरी में पूरे दिन रहता है भक्तों का रेला।

 

 मुगल भी थे कृष्णलीला के दीवाने

उन्होंने इन लीलाओं का चित्रांकन कराया था।

 

 जन्‍माष्टमी पर इस दरगाह में लगता है मेला..

राजस्‍थान के नरहड़ गांव में स्थित हजरत हाजिब शकरबार शाह की दरगाह में जन्‍माष्टमी पर भव्‍य मेला लगता है।

 

 “गोविंदा आला रे आला..”

देखें, ‘दही हांडी’ फोड़ने के लिए सज गई गोविंदाओं की टोली।

 

 इस्कॉन के ‘कन्हैया’ के श्रृंगार के अनेकों रूप..!

इस्कॉन मंदिर के राधा कृष्ण के मनमोहक श्रृंगार के अनेकों रूप।

 

 जन्माष्टमी पर बॉलीवुड के मशहूर ‘गोविंदा’

देखिए, पर्दे पर दही-हंडी का त्योहार मनाते सितारे।

 

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पाठकों की राय | 11 Aug 2012


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