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वीकेंड मैगजीन: ‘गणपति बप्‍पा मोरया, अगले बरस तू जल्‍दी आ’

Updated Sep 29, 2012 at 17:01 pm IST |

 

30 सितम्‍बर 2012
तृप्ति चौरे
Hindi.in.com


महाराष्ट्र में इस हफ्ते हर जगह सिर्फ गणपति बप्‍पा मोरय्या के जयघोष की मधुर आवाज़े सुनाई दी।   आज गणेश जी की विदाई धूमधाम से की जा रही है। राजधानी मुंबई समेत राज्य के तमाम इलाकों में गणपति की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जा रहा है।
 
शनिवार को अनंत चतुर्दशी के मौके पर महाराष्ट्र समेत देश के कई हिस्सों में भी शोभायात्रा निकालकर गणेश प्रतिमाएं विसर्जित की जा रही हैं। गणेशोत्सव के अंतिम दिन ‘गणपति बप्पा मोरया..., अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयघोषों के बीच महाराष्ट्र में गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया जा रहा है। मुंबई के तमाम पंडालों से आज भक्त गणपति की प्रतिमाएं लेकर समंदर की तरफ जाते हुए देखे जा सकते हैं।
 
इस मौके पर राज्य भर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। पुलिस ने मुंबई में आज ट्रैफिक के लिए खास इंतजाम किए हैं। मुंबई में गणेशोत्‍सव का खासा महत्‍व होता है।

गणेश जन्‍म की कथा

भगवान गणेश के जन्म की कथा बहुत ही रोचक है। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार गणपति के जन्म की अलग-अलग कथाएं प्रचलित है।

शास्त्रों के अनुसार सबसे प्रचलित कथा के अनुसार, माता पार्वती ने असुरों से रक्षा के लिए अपने पसीने से भगवान गणेश को उत्पन्न किया था। लेकिन बाद में जब भगवान शिव पार्वती से मिलने आए तो उन्हें गणेशजी ने अंदर नहीं जाने दिया।

इसके बाद, भगवान शिव ने कुपित होकर उन पर प्रहार किया और उनका सिर उनके शरीर से अलग हो गया, जिसे देखकर पार्वती विलाप करने लगी। इसके बाद उन्हें दोबारा जीवित करने की कोशिश शुरू हो गई। भगवान शिव उत्तर दिशा की ओर सोए हुए नवजात की तलाश में निकल पड़े और उन्हें हाथी का शिशु मिला।

इसके बाद हाथी के शिशु के मुख को ही स्थापित पार्वती के पुत्र को दोबारा जीवित किया गया। इसके बाद से ही उन्हें ‘गजानन’ भी कहा जाने लगा है। शास्त्र एवं पुराण के अनुसार भगवान गणेश की पूजा और मनन से सारी मुसीबतें दूर होती हैं। नारद पुराण और गरुड़ पुराणों में इस बात का भी उल्लेख है कि भगवान गणेश को सदा ही सतुंष्ट रखना चाहिए, क्योंकि उनका कुपित होना शुभ नहीं होता।

 

 गणपति: आज है ‘गणपति बप्‍पा’ की विदाई

आज अनंत चतुदर्शी के दिन चारों ओर गुंज रहा है ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस जल्दी आ’।

 

 गणपति: गणेशजी को चढ़ाएं ये, होगी हर चिंता दूर!

भगवान गणेश को विभिन्न प्रकार के पत्ते विधि विधान से अर्पित किए जाएं तो हर चिंता दूर हो जाती है।

 

 गणपति: बिना सूंड के भी होते हैं गजानन

जयपुर के ब्रह्मपुरी स्थित गढ़ गणेश देश का ऐसा पहला मंदिर है, जहां भगवान गणपति की सूंड नहीं है।

 

 गणपति: जानें, क्यों चढ़ाई जाती है गणेशजी को ‘दूर्वा’?

राक्षस को निगलने के बाद गणपति के पेट कि आग को बुझाने के लिए 21 दूर्वाओं का उपयोग किया गया था।

 

 गणपति: जानें, शुभ होते हैं ‘बाईं सूंड वाले गजानन’

गणपति की नाक (सूंड) महाबुद्धित्व का प्रतीक है, वाममुखी गणपति की मूर्ति शीतलता प्रदान करती है।

 

 गणपति: इस गणेश मंत्र को बोलने से बढ़ेगी ‘आमदनी’

भगवान गणेश की पूजा बुद्धि, ज्ञान व बल द्वारा सुख समृद्धि देने वाली मानी जाती है।

 

 गणपति: आखिर क्यों मनाया जाता है ‘गणेशोत्सव’?

महाराष्ट्र के सबसे प्रिय उत्सव गणेश चतुर्थी को छत्रपति शिवाजी के शासनाकाल से मनाया जाता रहा है।

 

 गणपति: भगवान गणेश को न चढ़ाएं तुलसी, क्योंकि..

पावन और सुखदायी होने पर भी पौराणिक मान्यता के मुताबिक भगवान गणेश को पवित्र तुलसी नहीं चढ़ाना चाहिए।

 

 देखें, ‘अजब-गजब’ गणपति

तस्‍वीरों में देखिए नारियल, रेत और मेवे से बने गणपति।

 

 यहां गणेशजी को फूल, नारियल चढ़ाएं, आरती करें!

अब एक क्लिक पर भी आप कर सकते हैं गजानन की आरती।

 

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पाठकों की राय | 29 Sep 2012


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