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आजादी@66: वो गाने जो जगाते हैं देशभक्ति का जज्बा

Varta | Updated Aug 15, 2013 at 08:59 am IST |

 

मुंबई। भारतीय सिनेमा जगत में देश भक्ति से परिपूर्ण फिल्मों और गीतों की एक अहम भूमिका रही है और इसके माध्यम से फिल्मकार लोगों में देशभक्ति के जज्बे को आज भी बुलंद करते हैं।

हिन्दी फिल्मों में देशभक्ति फिल्मों के निर्माण और उनसे जुडे गीतों की शुरुआत 1940 के दशक से मानी जाती है। निर्देशक ज्ञान मुखर्जी की 1940 में रिलीज फिल्म ‘बंधन’ संभवत: पहली फिल्म थी जिसमें देश प्रेम की भावना को रूपहले परदे पर दिखाया गया था। यूं तो फिल्म ‘बंधन’ में कवि प्रदीप के लिखे सभी गीत लोकप्रिय हुये लेकिन ‘चल चल रे नौजवान’ के बोल वाले गीत ने आजादी के दीवानों में एक नया जोश भरने का काम किया। साल 1943 में देश प्रेम की भावना से ओतप्रोत फिल्म ‘किस्मत’ रिलीज हुयी। फिल्म ‘किस्मत’ में प्रदीप के लिखे गीत ‘आज हिमालय की चोटी से फिर हमने ललकारा है, दूर हटो ए दुनिया वालों हिंदुस्तान हमारा है’ जैसे गीतों ने स्वतंत्रता सेनानियों को आजादी की राह पर बढ़ने के लिये प्रेरित किया।

भारतीय सिनेमा जगत में वीरों को श्रद्धांजलि देने के लिये अब तक न जाने कितने गीतों की रचना हुई है लेकिन ‘ऐ मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानी, जो शहीद हुये है उनकी जरा याद करो कुर्बानी’ जैसे देश प्रेम की अद्भुत भावना से ओत प्रोत रामचंद्र द्विवेदी उर्फ कवि प्रदीप के इस गीत की बात ही कुछ और है। एक कार्यक्रम के दौरान देशभक्ति की भावना से परिपूर्ण इस गीत को सुनकर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की आंखों में आंसू छलक आये थे।

साल 1952 में रिलीज फिल्म ‘आनंद मठ’ का गीताबाली पर लता मंगेशकर की आवाज मे फिल्माया गीत ‘वंदे मातरम’ आज भी दर्शकों और श्रोताओं को अभिभूत कर देता है। इसी तरह ‘जागृति’ में हेमंत कुमार के संगीत निर्देशन में मोहम्मद रफी की आवाज में यह गीत ‘हम लाये है तूफानों से कश्ती निकाल के’ श्रोताओं में देशभक्ति की भावना को जागृत किये रहता है।

आवाज की दुनिया के बेताज बादशाह मोहम्मद रफी ने कई फिल्मों में देशभक्ति से परिपूर्ण गीत गाये हैं। इन गीतों में कुछ हैं ‘ये देश है वीर जवानों का’, ‘वतन पे जो फिदा होगा अमर वो नौजवान होगा’, ‘अपनी आजादी को हम हरगिज मिटा सकते नहीं’, ‘उस मुल्क की सरहद को कोई छू नही सकता जिस मुल्क की सरहद की निगाहबान है आंखें’, ‘आज गा लो मुस्कुरा लो महफिलें सजा लो’, ‘हिंदुस्तान की कसम ना झुकेंगे सर वतन के नौजवान की कसम’, ‘मेरे देशप्रेमियों आपस में प्रेम करो देशप्रेमियों’ आदि।

कवि प्रदीप की तरह ही प्रेम धवन भी ऐसे गीतकार के तौर पर याद किया जाता है जिनके ‘ऐ मेरे प्यारे वतन’, ‘मेरा रंग दे बसंती चोला’, ‘ऐ वतन ऐ वतन तुझको मेरी कसम’ जैसे देशप्रम की भावना से ओतप्रोत गीत आज भी लोगों के दिलो-दिमाग में देश भक्ति के जज्बे को बुलंद करते हैं।

फिल्म ‘काबुलीवाला’ में पार्श्वगायक मन्ना डे की आवाज में प्रेम धवन का रचित यह गीत ‘ए मेरे प्यारे वतन, ऐ मेरे बिछड़े चमन’ आज भी श्रोताओं की आंखों को नम कर देता है। इन सबके साथ साल 1961 में प्रेम धवन की एक और सुपरहिट फिल्म ‘हम हिंदुस्तानी’ रिलीज हुयी जिसका गीत ‘छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी’ सुपरहिट हुआ।

साल 1965 में निर्माता-निर्देशक मनोज कुमार के कहने पर प्रेम धवन ने फिल्म ‘शहीद’ के लिये संगीत निर्देशन किया। यूं तो फिल्म शहीद के सभी गीत सुपरहिट हुये लेकिन ‘ऐ वतन ऐ वतन’ और ‘मेरा रंग दे बंसती चोला’ आज भी श्रोताओं के बीच शिद्दत के साथ सुने जाते हैं।

भारत-चीन युद्ध पर बनी चेतन आंनद की साल 1965 में रिलीज फिल्म ‘हकीकत’ भी देशभक्ति से परिपूर्ण फिल्म थी। मोहम्मद रफी की आवाज में कैफी आजमी का लिखा यह गीत ‘कर चले हम फिदा जानो-तन साथियों, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों’ आज भी श्रोताओं मे देशभक्ति के जज्बे को बुलंद करता है।

देशभक्ति से परिपूर्ण फिल्में बनाने में मनोज कुमार का नाम विशेष तौर पर उल्लेखनीय है। ‘शहीद’, ‘उपकार’, ‘पूरब और पश्चिम’, ‘क्रांति’, ‘जय हिंद द प्राइड’ जैसी फिल्मों में देश भक्ति की भावना से ओतप्रोत के गीत सुन आज भी श्रोताओं की आंखें नम हो जाती हैं। जे.पी.दत्ता और अनिल शर्मा ने भी देशभक्ति के जज्बे से परिपूर्ण कई फिल्मो का निर्माण किया है।

इसी तरह गीतकारों ने कई फिल्मों में देशभक्ति से परिपूर्ण गीतों की रचना की है। इनमें ‘जहां डाल डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा वो भारत देश है मेरा’, ‘ए वतन ऐ वतन तुझको मेरी कसम’, ‘नन्हा मुन्ना राही हूं देश का सिपाही हूं’, ‘है प्रीत जहां की रीत सदा मैं गीत वहां के गाता हूं’, ‘मेरे देश की धरती सोना उगले’, ‘दिल दिया है जां भी देंगे, ऐ वतन तेरे लिये’, ‘भारत हमको जान से प्यारा है’, ‘ये दुनिया एक दुल्हन के माथे की बिंदिया, ये मेरा इंडिया’, ‘सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है’, ‘फिर भी दिल है हिंदुस्तानी’, ‘जिंदगी मौत ना बन जाये संभालो यारो’, ‘रंग दे बसंती’ आदि।

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