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महान सितार वादक पंडित रविशंकर नहीं रहे

Updated Dec 12, 2012 at 12:02 pm IST |

 

12 दिसम्बर 2012
आईबीएन- 7

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नई दिल्ली।
भारतीय शास्त्रीय वाद्य संगीत का दुनिया भर में डंका बजाने वाले पं.रविशंकर के जीवन के तार टूट गए हैं। मशहूर सितारवादक पंडित रविशंकर का आज 92 साल की उम्र में निधन हो गया। अमेरिका के सैन डियागो में उनकी मौत हो गई। 7 अप्रैल 1920 को बनारस में पैदा हुए पंडित रविशंकर ने नृत्य के जरिए कला जगत में प्रवेश किया था।

कुछ फिल्मों में भी दिया संगीत

पं.रविशंकर ने 1954 में भारत से बाहर अपना पहला स्टेज शो सोवियत यूनियन में पेश किया। 1960 में बीटल्स के जादूगर जॉर्ज हैरीसन के साथ भी उन्होंने जुगलवंदी की। पाश्चात्य वाद्यसंगीत और भारतीय वाद्यसंगीत के बीच पुल की तरह काम करने वाले पं.रविशंकर ने कुछ फिल्मों में भी संगीत दिया जिनमें सत्यजीत रे की मशहूर अपू त्रयी और गुलजार की मीरा शामिल हैं।

18 साल की उम्र में छोड़ा नृत्य, उठाया सितार

7 अप्रैल 1920 को बनारस में पैदा हुए पंडित रविशंकर ने नृत्य के जरिए कला जगत में प्रवेश किया था। वे अपने बड़े भाई उदयशंकर की तरह नृत्यकला की ऊंचाइयां छूना चाहते थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। अठारह साल की उम्र में पंडित जी ने नृत्य छोड़कर सितार सीखना शुरू कर दिया। सितार के जादू से बंधे पं.रविशंकर उस्ताद अलाउद्दीन खान से दीक्षा लेने मैहर पहुंचे और खुद को उनकी सेवा में समर्पित कर दिया। समय ने सिद्ध किया कि शिष्य ने गुरु का नाम किस कदर ऊंचा किया। सितार और पं.रविशंकर एक दूसरे के पर्याय बन गए।

पारिवारिक तौर पर टुकड़ों में बंटे रहे

पंडित रविशंकर संगीत के शिखर पर पहुंचे लेकिन पारिवारिक तौर पर टुकड़ों में बंटे रहे। उन्होंने दो शादियां की। पहली शादी गुरु अलाउद्दीन खान की बेटी अन्नपूर्णा से हुई। जिनसे बाद में उनका तलाक हो गया। जबकि दूसरी शादी सुकन्या से हुई। सुकन्या से उनकी एक संतान है।

1999 में भारत रत्न से नवाज गए

इसके अलावा उनका संबंध एक अमेरिकी महिला सू जोन्स से भी रहा, जिनसे उनकी एक बेटी नोरा जोन्स हुई। उन्होंने कभी सू से शादी नहीं की। आज पंडित जी की दोनों बेटियां अनुष्का शंकर औऱ नोरा जोन्स, संगीत की उनकी विरासत को आगे बढ़ा रही हैं। प.रविशंकर को भारत सरकार ने 1999 में भारत रत्न से नवाजा था। इसके अलावा उन्हें मैगसैस, तीन ग्रैमी अवार्ड सहति देश-विदेश के ना जाने कितने पुरस्कार मिले। 1986 से 1992 तक वो राज्य सभा के सदस्य भी रहे।

 

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