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सैलाब में बह गया 13 साल का अतुल फिर कैसे बची उसकी जान?

Updated Jun 25, 2013 at 13:44 pm IST |

 

25 जून 2013
आईबीएन 7

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नई दिल्ली। तबाही में लहरों के थपेड़ों से घंटों जूझने के बाद आखिरकार 13 साल का अतुल अपने घर लौट पाने में कामयाब हो गया। जिद थी मौत को मात देने की, जिद थी जिंदगी जीने की। आज वापस मां-बाप के पास लौट आया है अतुल, लेकिन उसके दिलो-दिमाग से इस हादसे की छाप कभी मिट नहीं पाएगी। 13 साल की मासूम उम्र में मौत के तांडव का सामना कर लौटा ये है झांसी का अतुल। जख्म अभी भी रह-रह कर टीस रहे हैं। आखों में मौत की दहशत झलक रही है, लेकिन शुक्रिया अदा कर रहा है भगवान का कि दोबारा अपने पिता से मिल पाया। वापस लौटकर अपनी मां के गोद में चैन की नींद सो सकता है। 13 साल की उम्र में अतुल ने यमराज का सबसे भयानक रूप देखा है।

माता-पिता ने केदारनाथ के एक आश्रम में पढ़ाई करने को भेजा था, लेकिन 16 जून की रात जब आसमान से आफत बरसी तो जिस बिल्डिंग में अतुल था, वो पानी के सैलाब में बह गई। साथ में 6 साथी और थे, जो ना जाने कहां खो गए, किस्मत अच्छी थी, जो पानी के तेज बहाव ने इसे बख्श दिया। किनारे से टकराकर अतुल एक मकान की छत पर फंस गया। नीचे बहते मौत के सैलाब को देख ये मासूस बेहोश हो गया। इस बीच एक साधु ने अतुल को देखा और उठाकर आश्रम में उसे शरण दी। 4 घंटे बाद जब होश आया तो हिम्मत जुटा कर अतुल पैदल ही गरुण चट्टी की तरफ निकल पड़ा।

इस मासूम के अंदर मौत को मात देने की जिद थी, एक ऐसी जिद जिसके आगे यमराज को भी झुकना पड़ा। खतरनाक रास्ते से होते हुए, अतुल गरुण चट्टी पहुंचा और फिर वहां से गुप्तकाशी। शरीर पर गंभीर चोटें आई थीं। पूरा बदन दुख रहा था, लेकिन एक आस थी, एक उम्मीद थी, एक जिद थी, जो अतुल को वापस अपने माता-पिता के पास लेकर आ गई। अब ट्रेन पर सवार होकर अतुल एक नई जिंदगी की ओर चल पड़ा है। एक दूसरी जिंदगी जो उसकी जिद उसके जब्जे ने उसे दी है।

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पाठकों की राय | 25 Jun 2013

Jul 01, 2013

इन साधुओ मे अपार शकतिया होती हैं जो अभी भी केदार नाथ मे रह है

sohan beerbhan dhar m.p.

Jun 25, 2013

जाको राके साएयाअँ मार सके ना कोए

prit chandigarh


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