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दिल्ली-एनसीआर के मकान-मालिकों को ज़बरदस्त तोहफा!

Updated Aug 28, 2012 at 16:02 pm IST |

 

28 अगस्त 2012
आईबीएन-7

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नई दिल्ली।
शहरी विकास मंत्रालय ने दिल्ली की 900 अवैध कॉलोनियों को नियमित करने के लिए हरी झंडी दे दी है। आज दिल्ली सरकार इसके लिए नोटिफिकेशन जारी करेगी। इसके बाद इन सभी कालोनियों को दिल्ली सराकर सभी मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराएगी। इसके लिए सरकार गाइड लाइन बनाने में जुट गई है।

वैसे खबरें हैं कि केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने नोएडा एक्सटेंशन के मास्टर प्लान 2021 को मंजूरी दे दी है। यानी लाखों लोगों का सपना अब पूरा हो जाएगा। नोएडा एक्सटेंशन के मास्टर प्लान 2021 को मंजूरी मिलने के बाद आज से बिल्डर काम शुरू कर रहे हैं।

दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक बार फिर शीला सरकार ने मतदाताओं को लुभाने के लिए पासा फेंका है। केंन्द्र सरकार ने दिल्ली की जनता को लुभाने के लिए दिल्ली की 900 कॉलोनियों को नियमित करने का प्रस्ताव पास कर दिया है। यानी इन कॉलोनियों मे रहने वाले लाखों लोगों को दिल्ली सरकार की तमाम योजनाओं का लाभ मिलेगा। केंन्द्रीय शहरी विकास मंत्री कमलनाथ के घर सोमवार रात हुई बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगाई गयी। जिसका नोटिफिकेशन आज जारी कर दिया जाएगा।

कमलनाथ के घर सोमवार की रात हुई बैठक मे मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के अलावा दिल्ली के शहरी विकास मंत्री ए के वालिया भी शामिल हुए। बैठक में शीला सरकार ने 917 अवैध कॉलोनियों को नियमित करने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन केंन्द्र सरकार ने 900 कालोनियों को ही पासिंग सर्टीफीकेट दिया। गौरतलब है कि इन कॉलिनियों को नियमित करने के बाद यहां रह रहे लोगों को अब हर तरह की सुविधा मिलेगी। यहां पानी, बिजली और सड़क की व्यवस्था दुरुस्त होगी।

मालूम हो कि 2008 में भी विधानसभा चुनाव से पहले शीला सरकार ने दिल्ली की 1600 से भी अधिक अवैध कालोनियों को नियमित करने का प्रस्ताव रखा था। मतदाताओं को लुभाने के लिए शीला सरकार ने सभी 1600 कॉलोनियों को आनन फानन में नोटीफिकेशन सर्टीफिकेट जारी कर दिया था। यानी अस्थाई तौर पर सभी कालोनियों को नियमित कर दिया गया। लेकिन चार साल बीतने के बाद एक बार फिर सरकार को आम लोगों की याद आई है। इसकी वजह 2013 में दिल्ली में होने वाले विधान सभा चुनाव मानी जा रही है।

शायद यही वजह है कि चुनाव से ठीक पहले 1600 कॉलोनियों में से 900 कालोनियों को नियमित कर दिया है। ऐसे में सरकार को इस कदम से आने वाले चुनाव मे क्या फायदा होता है ये देखना दिलचस्प होगा।

गौरतलब है कि पिछले दो साल से जारी नोएडा एक्सटेंशन का विवाद खत्म हो गया है। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने नोएडा एक्सटेंशन के मास्टर प्लान 2021 को मंजूरी दे दी है। यानी लाखों लोगों का सपना अब पूरा हो जाएगा। इस खबर से यहां घर का सपना देख रहे लाखों खरीदारों के साथ ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और बिल्डरों ने भी राहत की सास ली है। अब प्राधिकरण को इंतजार है की जल्द से जल्द प्रदेश सरकार एनसीआर प्लानिग बोर्ड के इस फैसले को हरी झंडी दे दे, ताकि पिछले एक साल से रुका हुआ निर्माण कार्य फिर शुरू हो सके।

एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने ग्रेटर नोएडा के मास्टर प्लान- 2021 को पहले ही मंजूरी दे दी थी। दरअसल, किसानों ने जमीन अधिग्रहण के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था जिससे नोएडा एक्सटेंशन पर ग्रहण लग गया था। किसानों का विरोध इस बात पर था की प्राधिकरण ने उनकी जमीनों का अधिग्रहण औद्योगिक विकास के नाम पर किया था। ये भी वादा किया गया था कि किसानों के परिवार वालों को रोजगार मिलेगा।

हाईकोर्ट ने पहले कई गांव का अधिग्रहण रद्द कर दिया, लेकिन बाद में किसानों का मुआवजा बढ़ाकर मामले के हल की राह सुझाई। लेकिन हाईकोर्ट ने ये साफ कर दिया था कि बिना एनसीआर प्लानिग बोर्ड की मंजूरी के निर्माण कार्य शुरु नहीं होगा। आपको बता दें कि विवाद शुरू होने के दौरान नोएडा एक्सटेंशन में 67 बिल्डरों के साढ़े तीन लाख फ्लैटों का निर्माण कार्य चल रहा था और इसमें से लगभग डेढ़ लाख फ्लैट बिक चुके थे। अब एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के फैसले से बिल्डरों के साथ साथ निवेशकों ने भी राहत की सांस ली है।

हालांकि एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने भले ही मास्टर प्लान को मंजूरी दे दी हो लेकिन उन शर्तों को बरकरार रखा है जिसके साथ 28 जून को तकनीकी समिति ने इसे मंजूरी दी थी। ये छह शर्तें हैं

- यहां पानी की सप्लाई, सीवरेज, ड्रेनेज, बिजली और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों के मुताबिक रखना होगा।

- अर्बन एरिया का 16 फीसदी एरिया ग्रीन बेल्ट के लिए छोड़ना होगा और उसके रखरखाव पर ध्यान देना होगा।

- अथॉरिटी की रेजिडेंशियल स्कीमों में गरीबों और मिडिल क्लास फैमिली के लिए 20 से 25 फीसदी छोटे प्लॉट या फ्लैट रिजर्व रखने होंगे।

- नॉन पॉल्यूटिंग क्लीन टेक्नॉलजी इंडस्ट्री के लिए प्लॉट रिजर्व रखना होगा।

- अथॉरिटी का एनवायरनमेंटल मैनेजमेंट पार्ट मास्टर प्लान का हिस्सा होगा।

- मेट्रो, एमआरटीएस और नया एक्सप्रेस वे बनाना होगा।
 
जाहिर है ये शर्तें ऐसी हैं जो नियमों के मुताबिक हैं और इससे अब निर्माण कार्य में कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

बता दें कि एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से नोएडा एक्सटेंशन के प्रोजेक्ट को पास कराना आसान नहीं रहा। 28 जून को भले ही तकनीकी समिति ने इसे मंजूरी दे दी हो लेकिन बोर्ड की बैठक के लिए चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाने में लंबा वक्त लग सकता था इसलिए सर्कुलेशन के जरिए बोर्ड के सभी सदस्यों को फाइल भेजकर इसकी मंजूरी ली गई।

बहरहाल, इस विवाद के अंत होने के बाद लाखों लोगों के घर का सपना पूरा हो सकेगा। नोएडा एक्सटेंशन में काम रुका हुआ था, लेकिन फ्लैट बुक कराने वाले किस्त भरने को मजबूर थे। विवाद खत्म होने से उनकी उम्मीदें फिर परवान चढ़ी हैं।

उधर, दिल्ली सरकार ने कैबिनेट में बड़ा फेरबदल किया है। सरकार में नंबर दो के ओहदे पर बैठे ए. के. वालिया से शहरी विकास मंत्रालय छीन लिया गया। अरविंदर सिंह लवली को पदोन्नती देकर उन्हें ये मंत्रालय दे दिया गया है। ए. के. वालिया को अब स्वाथ्य विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने करीब एक साल के बाद फिर से अपने मंत्रियों के विभागों में फेरबदल कर दिया। 917 कॉलोनियों की मंजूरी का काम अंजाम देते ही डॉ. अशोक वालिया से शहरी विकास मंत्रालय छीन लिया गया। अब यह विभाग अरविंदर सिंह लवली संभालेंगे। लवली से शिक्षा और परिवहन दोनों विभाग ले लिए गए हैं।

सूत्रों के मुताबिक वालिया से सीएम पिछले कुछ समय से नाराज चल रही हैं। जब वह वित्त मंत्री थे, तब कॉमनवेल्थ गेम्स प्रोजेक्ट को क्लियर करने में देरी के कारण उनसे यह विभाग लेकर सीएम ने अपने पास रख लिया। अब कॉलोनियों की मंजूरी में देरी का ठीकरा भी डॉ. वालिया पर फोड़ते हुए उनसे यह विभाग ले लिया गया है।

अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए दिल्ली कैबिनेट में यह आखिरी बदलाव माना जा सकता है। वैसे, इस बदलाव के साथ-साथ उम्मीद थी कि कुछ चेहरे बदले भी जा सकते हैं, लेकिन कोई नया मंत्री नहीं बना जिससे सीएम खेमे के कई लोगों को निराशा हुई है।

डॉक्टर वालिया को शीला सरकार में कभी नंबर दो का दर्जा मिला हुआ था, अब उनके पास केवल स्वास्थ्य विभाग ही रह गया है। विधानसभा चुनावों को देखते हुए ये फेरबदल काफी अहम माने जा रहे हैं।

मंत्रीमंडल में फेरबदल कर कांग्रेस एक बात तो साफ करने देना चाहती है कि अगले चुनावों के लिए वो अभी से तैयारी करने में जुट गई है। और वो किसी भी कीमत पर अपने को पिछड़ते नहीं देखना चाहती।

 
 

 

 

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पाठकों की राय | 28 Aug 2012


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