18 अप्रैल 2014

न्यूजलैटर सब्सक्राइब करें

CLOSE

Sign Up


एडिट पेज: साहेब! बयान नहीं कुछ करके भी दिखा दो!

Updated Sep 07, 2012 at 12:41 pm IST |

 

07 सितम्बर 2012

 निमिष कुमार,

संपादक,

हिन्दी इन डॉट कॉम



११ अगस्त,२०१२ को मुंबई में मुस्लिम संगठनों की रैली और फिर उसके बाद हुई तोड़फोड़ एवं अमर जवान ज्योति के अपमान के बाद चला बयानों का सिलसिला रुकता दिख नहीं रहा। बताया जा रहा है कि मुंबई पुलिस जब अमर जवान ज्योति का अपमान करने वाले दो आरोपी अब्दुल कादिर और उसके साथी को गिरफ्तार करने बिहार गई थी, तब महाराष्ट्र पुलिस और बिहार पुलिस के बीच कुछ लेटरबाजी हुई। उस मामले पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना उर्फ एमएनएस के प्रमुख राज ठाकरे ने ‘बिहारियों’ को घुसपैठिया कहा। जवाब में बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार सामने आए और कहा कि वो बंदरघुड़कियों से डरने वाले नहीं हैं। फिर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव ने राज ठाकरे पर किसी आतंकी एक्ट के तहत मुकदमा करने की मांग कर डाली। फिर ‘बयान-वीर’ कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने अपना बयान दिया, और कहा कि ठाकरे तो खुद बिहार के हैं, वहां से मध्यप्रदेश के धार जिले में आए, फिर महाराष्ट्र पहुंचे। फिर राज ठाकरे के चचेरे भाई और शिवसेना के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने पहले तो इशारों ही इशारों में दिग्गी राजा को ‘गधा’ कहा, लेकिन अगले ही सवाल में अपना बयान वापस लेते हुए कहा- कि इससे गधे का अपमान होगा। इस तरह एक बयान से पूरा देश गरमाता रहा। खूब हंगामा हुआ। शिवसेना के मुख्यपत्र ‘सामना’ में बाल ठाकरे ने संपादकीय लिखा। टीवी चैनलों पर राज ठाकरे के बयान को तालिबानी करार दिया गया। इसके बाद राज ठाकरे ने हिन्दी न्यूज चैनलों पर अपना गुस्सा निकाला और उन्हें महाराष्ट्र से बाहर निकाल फेंकने की धमकी भी दे डाली। अपने प्रवक्ताओं को किसी भी हिन्दी या अंग्रेजी न्यूज चैनल में चलने वाली बहस में शामिल नहीं होने का फरमान सुना दिया। फिर दिग्विजय सिंह ठाकरें बंधुओं के दादा की एक किताब ले आए और उसके हवाले से ये सिध्द करने लगे कि ठाकरे परिवार बिहार से है। बदले में शिवसेना के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने दिग्विजय की मानसिक हालत पर सवाल खड़े कर दिए। बदले में फिर दिग्विजय सिंह बोले। लेकिन इस पूरी बयानबाजी के बीच किसी ने चिंता नहीं जताई कि खाने का तेल अब सौ रुपये लीटर हो चला है, गेहूं का आटा ३५ रुपये किलो से महंगा हो चला है, रसोई गैस रसोई का बजट बिगाड़ने की हिम्मत रखती है, मकान के किराए या होमलोन की ईएमआई हर महीने के वेतन का एक पूरा हिस्सा गप्प कर जाती है, अब तो त्यौहारों पर भी कपड़े खरीदते वक्त सोचना पड़ता है, ऐसे में हमारे नेता बयान दे रहे हैं, तो आम आदमी कहेगा ही- साहेब! बयान नहीं कुछ करके भी दिखा दो!

दरअसल भारत में न्यूज चैनलों ने राजनीति में एक नई संस्कृति और नेताओं के बीच एक नए केटेगरी के नेता पैदा कर दिए हैं। जिन्हें आप हम ‘बयान-वीर’ कह सकते हैं। राजनीति में ये बयानवीर इतने चर्चित और पॉवरफुल होते जा रहे हैं कि अब तो जमीन से जुड़े नेता भी इन बयानवीरों की लोकप्रियता देखकर सहम जाते हैं। सहम इसलिए जाते है कि साल के पूरे ५२ हफ्ते, हफ्ते के सातों दिन, दिन के पूरे २४ घंटे जनता और जनता-जर्नादन के बीच रहने वाले, उनकी शिकायतें सुनने और सुलझाने की कोशिश करने वाले जमीनी नेता तो बेचारे धूल खाते रहते है, और बयानवीर राजनेता, राजधानी में एसी चैम्बरों में बैठकर सुर्खियां बटोर लेते हैं। ऐसे बयानवीर नेता हर पार्टी में हैं, हर जगह है, इनका ना कोई धर्म होता है ना जात, ये सिर्फ बयानवीर होते है। बयान और उससे मुफ्त की पब्लिसिटी पाने की जद्दोजहद करते। इंतजार कर रहे है कि कब ये बयानवीर नेता आम लोगों के बीच जाएंगे उनकी तकलीफें सुनने। तब जरुर लोग कहेंगे, साहेब! बयान नहीं कुछ करके भी दिखा दो!

बयानवीर होने का ठेका सिर्फ हमारे नेताओं ने ही नहीं ले रखा। अब तो हमारे धर्मगुरु भी बयानवीर होते जा रहे हैं। वो भी जानते है कि आम जिंदगी में पिटते आम आदमी को धर्म की अफीम चुसाने के लिए बयानवीर होना जरुरी है। जितने बड़े बयानवीर धर्मगुरु, उतने ज्यादा उनके ज्ञान को सुनने वाले। फिर वो आसाराम बापू हो, जो गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र भाई मोदी को खुलेआम सत्ता से उखाड़ फेंकने की चुनौती देते है, या जामा मस्जिद के इमाम, जो हर मसले पर पहले अपने बयान देते रहते थे। हाल ही में जब असम के दंगों को लेकर पूरे देश में बहस छिड़ी तो कई धर्म, वर्ग के बयानवीर धर्मगुरु या धर्म नेता न्यूज चैनलों पर दिखे। सबने टीवी चैनलों की आर्कलाइट्स में ‘अपने लोगों’ की चिंता की और खूब ज्ञान दिया। लेकिन ऐसा कोई बयानवीर धार्मिक नेता असम के दंगों में उज़ड़े घरों को बनवाता नहीं दिखा। मारे गए परिवारों के मासूमों के आंसू पोंछता नहीं दिखा। बहके हुए दंगाईयों को शांति और अमन का पाठ सिखाता नहीं दिखा। किसी ने ये नहीं पूछा कि जिनके घर जल गए, उनके घरों में अब चूल्हें जले है या नहीं? जिनकी दुकानें या व्यवसाय तबाह हो गए, उनकी रोजी-रोटी अब कैसे चलेगी? दंगों में बरबाद हो गए लोगों के तन बेपर्दा हो गए, वो फिर कैसे अपने तन ढक पाएंगे? ऐसे धार्मिक नेताओं से मिलने पर आम आदमी क्यों नहीं पूछेगा- साहेब! बयान नहीं कुछ करके भी दिखा दो!

ऐसा नहीं कि नेताओं और धार्मिक लीडरों ने ही बयान देने का टेंडर भरा था और बयानबाजी का ठेका हड़पा। ये तो जैसे फ्री बटती रेवड़ी थी, जिसे हर प्रभावशाली आदमी ने बटोरा और जमकर उसका उपयोग किया। ऐसे में हमारे बिजनेसमैन भी पीछे नहीं रहे। कई नामी-गिरामी बिजनेस टॉयकून भी बयानवीर बनने से पीछे नहीं दिखे। लोगों को, खासकर जो निवेशक थे, उन्हें अपने सुहाने, रुपहले बयानों से लुभाया, और उन निवेशकों का पैसा अपनी कागजी योजनाओं में लगवाया और फिर चुप बैठ गए। ऐसे एक नहीं, बहुतेरे हैं। बयानों पर शेयर मार्केट चढ़ाए और पैसा पाने के बाद कभी २२ हजार वाला शेयर मार्केट, जिसे लेकर तमाम शेयर एनालिस्ट २५ हजार होने की बयानबाजी कर रहे थे, ८ हजार अंकों तक भी पहुंचा। कितने बरबाद हुए, उनका कोई आंकड़ा नहीं होगा? कितने ने रातोंरात अमीर बनने के लिए अपनी पूंजी शेयर बाजार में लगा दी, लेकिन जब मार्केट गिरा, तो वो कहीं के नहीं रहें। किसी ने हाउसिंग प्रोजेक्ट का सपना दिखाया, तो किसी ने सर्वे कंपनी का, किसी ने कहा हमारे प्रॉडक्ट के लिए सदस्य बनाओं और पैसे रात दूने, दिन चौगुने कमाओं। लेकिन पैसा तो सिर्फ उन धंधेबाजों के विदेशी एकाउंटों में ही बढ़ा और आम आदमी अपनी जिंदगी भर की कमाई गवांकर आखिरकार ठगा-सा रह गया। ऐसे धोखेबाजों के खिलाफ मामला दर्ज करने, कार्रवाई करने के बहुत बयान आए। आम आदमी को लगा, कि जिसने उसकी जिंदगी भर की कमाई लुटी है, वो जेल की सलाखों के पीछे होगा। लेकिन बयान तो बयान ही रहे। बताइए, उस आम आदमी ने जिसने सारी जिंदगी की कमाई किसी शेयर में, किसी पॉन्जी स्कीम में खोई हो, वो क्यों नहीं कहेगा- साहेब! बयान नहीं कुछ करके भी दिखा दो!

वैसे इसमें हमारा बॉलीवुड और उसके लोग भी पीछे नहीं रहे। कितनी ही बार लोगों ने ब्लैक में टिकट ली, फर्स्ट डे फर्स्ट शो देखा, लेकिन जब सिनेमाहॉल से बाहर निकले तो अपना सिर धुन रहे थे। चाय का कोई ठिया ढूंढ रहे थे कि एक गरम चाय की प्याली से अपना सरदर्द कम कर सकें। और खुद पर गुस्सा रहे थे कि क्यों प्रोड्यूसर, डॉयरेक्टर या हीरो-हीरोईन के बयानों के चक्कर में पड़े और फिल्म देखने आ गए। अपनी छुट्टी बिगाड़ी, अपना बजट बिगाड़ा। लेकिन जिसे कमाना था, वो तो कमा गया। प्रोड्यूसर ने फिल्म बेचकर, हीरो-हीरोईन ने पब्लिसिटी पाकर, डॉयरेक्टर ने फर्स्ट डे फर्स्ट शो में भीड़ जुटाकर। फंसा तो बेचारा आम आदमी, इन सबके बयानों के चक्कर में। अब देखों ना। एक है पूनम पांडे। क्रिकेट के दीवाने इंडिया में क्रिकेट वर्ल्ड कप के पहले बयान डे डाला- टीम इंडिया ने क्रिकेट वर्ल्ड कप जीता तो नंगी हो जाउंगी। बस, बेचारा आम आदमी वो मैडम पूनम पांडे के बयान के चक्कर में बेवकूफ बन गया। सोचा था टीम इंडिया जीतेगी, तो कुछ ‘मजा’ आएगा। टीम इंडिया को खूब चीयर किया। टीम इंडिया जोश में आ गई और हम वर्ल्ड कप जीत गए। उसके बाद जो हुआ वो आप सब जानते है। लेकिन पूनम पांडे मैडम की गाड़ी तो  चल निकली। एक नया ट्रैंड ही शुरु कर दिया। कल तक की एक गुमनाम-सी मॉडल सेलेब्रिटी बन गई। इंटरनेट पर इतनी सर्च हुई कि बड़े से बड़ा नाम वाला भी शरमा जाए। दिखाया- विखाया कुछ नहीं, अपना उल्लू जरुर सीधा कर लिया। अब बताइए, ऐसे में आम आदमी क्यों नहीं कहे- साहेब! बयान नहीं कुछ करके भी दिखा दो!


दरअसल आजादी के ६५ सालों में हम बयानों से ही ठगे जाते रहें हैं। नेहरु ने बयान दिए देश को दुनिया के विकसित देशों की कतार में ला खड़ा करेंगे। रुसी साम्यवाद की तर्ज पर हर इंसान समाज में बराबर का हकदार होगा। पीएसयू आधुनिक भारत के मंदिर होंगे। हम ठगे गए। इंदिरा गांधी ने कहा – गरीबी हटाओं। हम फिर ठगे गए। जनता सरकार ने कहा- इंदिरा बिना देश चलाएंगे। हम फिर ठगे गए। भाजपा बोली राम मंदिर बनाएंगे। हम फिर ठगे गए। फिर यूपीए बोली सांप्रजदायिक ताकतों को हटाओं, हम आम आदमी का साथ देंगे। हम फिर ठगे गए। बयान देने वालों ने ये कभी नहीं जाना कि कुछ आनों में मिलने वाली शक्कर-तेल-नमक अब कई सौ रुपयों में मिलने लगा है। सरकारी स्कूल में घर में काम करने वाली नौकरानी भी अपने बच्चे पढ़ाने को तैयार नहीं हैं, और निजी स्कूल खुद को इंटरनेशनल बताकर इतनी फीस वसूल रहे है कि हॉर्ट-अटैक आ जाए। सरकारी अस्पतालों में ना डॉक्टर गंभीर है इलाज को लेकर, ना दवाईयां है, और निजी पांच सितारा अस्पताल फाइव स्टार होटलों की तरह पैसा वसूलते है, इसके बाद भी इलाज कैसा होगा इसकी गारंटी नहीं। बिल्डर पैसे लेकर घर देने का वादा करता है और फिर सालों लगा देता है प्रोजेक्ट पूरा करने में। दूध में पानी मिलता है और मिठाईयों में घी के बदले तेल। मोबाइल कंपनी कब आपके पैसे किस बात के लिए काट लेती है जान ही नहीं पाते। अदालतों में मुकदमों दादा शुरु करते है और पोता तारीख-पर-तारीख का डॉयलॉग दोहराता है। पुलिस सुनती नहीं और नगर-निगम में काम होते नहीं। ट्रेनों में बिना दलालों के रिर्जेवेशन मिलना मुश्किल होता है, और सड़कों के हालात ऐसे की बसों में सफर करने में हड्डी-हड्डी, पसली-पसली बराबर हो जाए। सरकारी नौकरियों में आरक्षण की इतनी दीवारें है कि आम आदमी का बच्चा उसे सपना मान चुका है, और निजी कंपनियां काम ज्यादा लेती है और पैसा इतना कम देती है। ऐसे में हर तरफ से मार खाता आम आदमी जब सरकारों के बयान सुनाता है तो मन ही मन तो कहता ही है- साहेब! बयान नहीं कुछ करके भी दिखा दो!

एक भारतीय।

 

ठाकरे- दिग्गी बयानबाजी की सारी खबरें यहां पढ़ें!

 

(पिछले एडिट पेज पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

 

यह खबर आपको कैसी लगी

10 में से 5 वोट मिले

पाठकों की राय | 07 Sep 2012

Sep 08, 2012

आप ऐसे ही लिखते रहे हम आप के साथ है चाहे हम किसी भी प्रांत से हो है तो भारतीय न.

RAHUL PUNE

Sep 08, 2012

लेख ठीक है पर कुछ नया नही है, ये तो होता आया है,होता है,और होता ही रहेगा,सिर्फ़ चेहरे बदल जाते है ,नाम बदल जाते है.

rakesh delhi

Sep 07, 2012

बड़े मन से लिखा हैं ........बढ़िया है

anand vidisha

Sep 07, 2012

i agree with you Mr. Editor. its all false statements that politicians made to lure voters like us and mint money. great writing. keep it up.

subbayya k.v. banglore

Sep 07, 2012

सारे बयान देने वालो को मारो. सब इतने सालो से हम जनता को मूर्ख बना रहे है. आपने सही लिखा. सब साले बयानवीर हो गये है

krishna prasad patna


कृपया ध्यान रखें: अपनी राय देते समय किसी प्रकार के अभद्र शब्द, भाषा का इस्तेमाल न करें। अभद्र शब्दों का इस्तेमाल आपको इस साइट पर राय देने से प्रतिबंधित किए जाने का कारण बन सकता है। सभी टिप्पणियां समुचित जांच के बाद प्रकशित की जाएंगी।
नाम
शहर
इमेल

आज के वीडियो

प्रमुख ख़बरें

Live TV  |  Stock Market India  |  IBNLive News  |  Cricket News  |  In.com  |  Latest Movie Songs  |  Latest Videos  |  Play Online Games  |  Rss Feed  |  हमारे बारे में  |  हमारा पता  |  हमें बताइए  |  विज्ञापन  |  अस्वीकरण  |  गोपनीयता  |  शर्तें  |  साइट जानकारी
© 2011, Web18 Software Services Ltd. All Rights Reserved.