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एडिट पेज : वाह सरकार, अन्ना-रामदेव पर सख्ती, कसाब, मुंबई के मुस्लिम दंगाईयों पर चुप्पी?

Updated Aug 31, 2012 at 13:12 pm IST |

 

31 अगस्त 2012

 निमिष कुमार,

संपादक,

हिन्दी इन डॉट कॉम

 

आखिरकार 26/11 के मुंबई आतंकी हमले के आरोपी मो. अजमल कसाब की फांसी की सजा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा। लेकिन देश का आम आदमी तमाम सवाल खड़े कर रहा हैं? क्या कसाब को फांसी २०१२ के आम चुनाव के पहले दे दी जाएगी? कहीं ऐसा तो नहीं की अफजल गुरु की तरह कसाब की फांसी की दया-याचिका भी राष्ट्रपति के पास जाकर लटक जाए? कहीं फिर ऐसा ना हो कि कसाब की फांसी भी दूसरों की तरह राष्ट्रपति के दया-याचिका पर फैसले के चलते सालों तक ना हो? ऐसे तमाम सवाल देश के आम आदमी के मन में उमड़-खुमड़ रहे हैं। सुना है मध्यप्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने तो केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे को एक पत्र तक लिख डाला। विजयवर्गीय ने शिंदे को ये सुनिश्चित करने को कहा कि कसाब को जल्द से जल्द फांसी दे दी जाए। ऐसा ना हो कि कसाब को फांसी देने में, संसद पर हमला करने वाले अफजल गुरु जैसी देरी हो जाए। लोग तो ये भी कह रहे हैं किं कसाब के फैसले के तुरंत बाद कुछ नही मिनटों में गुजरात के नारोदा पाटिया दंगों पर फैसला आना भी एक रणनीति हो सकती है, कसाब के फैसले से मीडिया कवरेज भटकाने की। लोगों का क्या, मुंबई में पाकिस्तानी आंतकियों के हाथो अपनो को खोया, देश की संसद पर हमला करने वालों की फांसी का बरसों से इंतजार करता इस देश का आम आदमी ये तो कह ही सकता है कि वाह सरकार, अन्ना-रामदेव पर सख्ती और कसाब, अफजल गुरु, मुंबई के मुस्लिम दंगाईयों पर चुप्पी?


इधर मुंबई पुलिस ने उन दो शख्सों में से एक को गिरफ्तार करने का दावा किया है जिसे आप-हम सबने मुंबई के आजाद मैदान में बने अमर जवान ज्योति स्मारक पर लात मारते और स्मारक को तोड़ते फोटो में देखा था। मुंबई पुलिस की मानें तो मुंबई के जोगेश्वरी इलाके का रहने वाला अब्दुल कादिर और उसका एक साथी ही वो थे जिन्होंने ११ अगस्त २०१२ को मुंबई के आजाद मैदान इलाके में बनी अमर जवान ज्योति शहीद स्मारक को ना सिर्फ लात मारी बल्कि उसे तोड़ने की कोशिश भी की। उन युवकों को ऐसा करते हुए दिखाते फोटो अगले ही दिन अखबारों में दिखे। जालीदार टोपी पहना एक युवक अमर जवान ज्योति को लात मार रहा है और सफेद पठानी लिबास में एक युवक स्मारक को एक डंडे सरिखी किसी चीज से तोड़ने की कोशिश कर रहा है। न्यूज चैनलों पर दिखाया गया। न्यूज पोर्टलों पर छपा। इतना ही नहीं जिससे देश ही नहीं दुनिया की सरकारें अब थर-थर कांपती है, उन सोशल मीडिया साइट्स पर भी खूब शेयर किया गया। टैग किया गया। लाइक किया गया। और खूब कमेंट किया गया। लोगों ने इस शहीदों का अपमान कहा, तो किसी ने इसे देशद्रोह। मामला जो भी हो, जब इस पूरे वाकये ने तूल पकड़ना शुरु किया तो सरकार और प्रशासन जागा। आनन-फानन उन युवकों की तलाश शुरु की गई। बताया जाता है कि पुलिस ने करीब दो दर्जन लोगों को गिरफ्तार किया था। जिनकी संख्या बाद में चार दर्जन से ज्यादा होने की भी खबर है। घटना के करीब दो हफ्ते बाद मुंबई पुलिस ने एक और खुलासा किया। मुंबई पुलिस की मानें तो गिरफ्तार १९ साल के मुस्लिम युवक अब्दुल कादिर ने पुलिस को बताया कि ११ अगस्त, २०१२ को मुंबई के आजाद मैदान में हुई हिंसा पूर्व-नियोजित थी। पुलिस का कहना है कि अब्दुल कादिर ने बताया कि ११ अगस्त की रैली के पहले करीब २०० मुस्लिम युवकों की बाकायदा एक बैठक बुलाई गई थी, जिसमें उन्हें कई मुस्लिम नेताओं ने संबोधित किया था। पुलिस ने अब्दुल कादिर नाम के उस शख्स को अदालत में पेश किया है और अमर जवान ज्योति का अपमान करने वाले दूसरे शख्स की तलाश करने की बात कर रही है। लेकिन ये सच है कि ११ अगस्त को मुंबई में असम और बर्मा, अब म्यंमार, में हो रही घटनाओं के विरोध में मुस्लिम संगठनों की उस रैली के बाद हुई हिंसा में पुलिस और मीडिया को निशाना बनाया गया था। पुलिसवाले पिटते रहे। पुलिस वाहन जला दिए गए। आगजनी का तांडव घंटों तक चलता रहा और पूरा प्रशासन मूक दर्शक बना रहा। बाद में जब दबाव बढ़ा, तो आनन-फानन मुंबई पुलिस कमिश्नर को उनके पद से हटा दिया गया। लोग दबे स्वर में ये भी कह रहे है कि रैली के दौरान मौजूद पुलिसकर्मियों को आदेश थे कि समुदाय विशेष के लोगों से सख्ती से पेश ना आया जाए। अब ये सच है कि झूठ, ये तो पुलिस के आला अफसर और हुक्मरॉन जाने, लेकिन ऐसे में आम आदमी तो पूछेगा ही कि वाह सरकार, अन्ना-रामदेव पर सख्ती और कसाब, अफजल गुरु, मुंबई के मुस्लिम दंगाईयों पर चुप्पी?


इस पूरे मुद्दे पर एमएनएस के राज ठाकरे ने रैली करने की कोशिश की गई तो उन्हें पूरी अनुमति नहीं मिली। पुलिस ने दावा किया था कि राज ठाकरे की रैली को देखते हुए ११ अगस्त की मुसलमानों की रैली से भी ज़बरदस्त इंतजामात् किए गए थे। दुगने से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए जाने का दावा किया गया था। जिससे राज ठाकरे की रैली के दौरान या बाद में किसी तरह की कोई अप्रिय घटना ना हो सके। लेकिन सवाल खड़े होते है कि राज ठाकरे की रैली पर शिकंजा कसने वाली सरकार और पुलिस ११ अगस्त की मुस्लिम संगठनों की रैली पर शिकंजा क्यों नहीं कस सकी? ये सरकार और पुलिस ही थी जिसने आधी रात को बाबा रामदेव के रामलीला मैदान पर बने पंडालों पर धावा बोला था और वहां मौजूद बाबा रामदेव समर्थकों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा था। आला अधिकारियों के आदेश पर पुलिसकर्मियों ने ना केवल पुरुषों पर जमकर लाठियां बरसाई, बल्कि महिलाओं को भी नहीं छोड़ा। जब ये तस्वीरें टीवी चैनलों पर चली तो पूरा देश सन्न रह गया। बाद में सुना है कि अदालत ने भी दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई थी। अन्ना के जन-लोकपाल आंदोलन को समर्थन देने जब सारा देश उमड़ पड़ा, दिल्ली की सड़कों पर हजारों-लाखों लोग जमा हुए, देश के अलग-अलग शहरों-कस्बों में अन्ना के आंदोलन के समर्थन में लोगों का हुजूम उमड़ा, तो सरकार को चिंता हुई। उसके बाद देश ने देखा कि कैसे अन्ना और टीम अन्ना के सदस्यों को लेकर कई मामले सामने लाए गए। कभी प्रशांत भूषण को लेकर तो कभी शांति भूषण को लेकर। कभी केजरीवाल पर उंगली उठाई गई, तो कभी किरण बेदी को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की गई। कभी कुमार विश्वास को घेरने का प्रयास किया गया, तो कभी मनीष सिसौदिया की एनजीओ पर उंगली उठाई गई, लेकिन देश का आम आदमी सोचता है कि क्या सरकार ने कभी ये जानने की कोशिश की कि ११ अगस्त की मुंबई में हुई मुसलमानों की रैली कराने वाले संगठनों को पैसा कहां से मिला था? टीम अन्ना के विदेशी डोनेशनों की जांच करने वाली सरकारें उन मुस्लिम संगठनो के डोनेशन की जांच कर पाई? कहीं उन्हें तो पैसा पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान या विदेशों में बसे मुस्लिम कट्टपंथी संगठनों या लोगों से तो नहीं मिल रहा? जब कसाब पर 27 करोड़ रुपये खर्च होने की खबरें आती हैं, जब कसाब को बिरयानी खिलाए जाने की खबर लोग पढ़ते हैं, जब अफजल गुरु की दया-याचिका पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटील के पास सालों तक पड़ी रहती है और कोई कार्यवाही नहीं होती, तो देश का आम आदमी पूछता है- वाह सरकार, अन्ना-रामदेव पर सख्ती और कसाब, अफजल गुरु, मुंबई के मुस्लिम दंगाईयों पर चुप्पी?


दरअसल भारत जैसे देश में जहां हर धर्म, हर संप्रदाय, हर जाति, हर वर्ग का इंसान आपस में सदभाव और प्यार से मिलकर रहता है, आपसी रंजिशों की ये खाईयां उन कुटिल राजनीतिज्ञों की ओर इशारा करती है, जो अपने वोटबैंक के लिए धर्म,जाति, संप्रदाय या क्षेत्र विशेष की बैसाथियों पर राजनीति की दौड़ जीतने की कोशिश करते हैं। दरअसल गलती देश के मतदाता की भी है। जब वो ऐसी तमाम बातों से दुखी है, परेशान है, गुस्साया है, तो वो क्यों नहीं दोषी नेताओं का चुनावों में सुपड़ा साफ कर देता है? क्यों नहीं ऐसे नेताओं को इतनी बुरी तरह चुनाव में हराता है कि उनकी ज़मानत जब्त हो जाए? क्यों नहीं आम लोगों के बीच नफरत की खाईंयां बनाने वाले राजनैतिक दलों के खिलाफ अपने गुस्से का इजहार चुनावों में मतदान के जरिए करता है? आईए मिलकर देश में बिगड़ते हालातों को सुधारने के लिए आगे आएं, जिससे पाकिस्तान जैसे देशों को सबक मिल सके कि उन्हें भारत की फिज़ा खराब करने के लिए कसाब भेजने या देश में ही पल रहे कसाबों को उकसाने की जरुरत ना हो। और हमारी सरकारों को, हमारे हुक्मरॉनों को भी ये सोचना होगा कि कैसे वोटों की राजनीति से ऊपर देश के आम आदमी को ये अहसास दिलाया जा सके कि हर एक भारतीय के लिए कायदे-कानून समान है, वरना हिंदुस्तान का आम आदमी कहेगा- वाह सरकार, अन्ना-रामदेव पर सख्ती और कसाब, अफजल गुरु, मुंबई के मुस्लिम दंगाईयों पर चुप्पी?

एक भारतीय। 

 

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पाठकों की राय | 31 Aug 2012

Sep 03, 2012

यू ट्यूब पर सुब्रमणियम स्वामिको देखे! उन्होंने इटॅलियन मा- बेटेका असली रूप दिखाया है! आपको पता चलेगा की दोनो मा- बेटा इस देशका क्या हाल करने वाले हैं! देशमें क्यों आतंकवादियोंको कोई डर नहीं है?क्यों हिंदुओंको बदनाम किए जाते हैंदेखे s.Swami ने do you know rahul gandhi....

D.G.PATEL U.S.A.

Sep 01, 2012

आपने जो सचाई उजागर की है उसके लिये सावधान रहें क्योंकि ये सरकार जल्दी ही आपके लिए मुसीबत बनकर बिजली बनकर गिरने वाली है ये देश भक्तों को कभी नहीं छोड़ती है

Shibbu surajpur

Sep 01, 2012

आज लग रहा है की मैं समाचार पढ रहा हूँ वरना ये मिडिया तो देश का सत्यानाश कर चुकी है ऐसे ही देश का सेवा करते रहें कुछ ही वक्त में आप ईश्वर् के चहेतो में सामिल होंगे .ये लोग जो सोचते हैं पैसा ही सब कुछ है मरते वक्त इनसे पूछे अब कैसा लग रहा है.

Shibbu surajpur

Sep 01, 2012

आप ने जो भी लिखा है वो बिल्कुल सही है इस देश मे गड़ी राजनीति हो रही है

chauhan Ghaziabad

Sep 01, 2012

बिल्कुल सही लिखा. मुंबई पोलीस उस दिन क्या कर रही थी. क्यों इतनी मार खाई. मुंबई पोलीस ने उन लोगो को क्यो नही पिटा. आप सही लिखते है और लिखिए.

suresh shinde mumbai

Sep 01, 2012

Dear mr. Raviassalamo alekumnow i just want to clear your first point that why we kill dumb animals.According to mythology 1. in hrigved, there is mentioned about immolate/offering of animals. We find in hrigved that how offer of animals is satisfy the soul of our ”purvaj”. If one offer cow than it will satisfy the soul of our “purvaj” for 100 years, and like this are mentioned for other animals. If we offer red goat than it will satisfy the soul of our “purvaj” for infinte time. It means offering is valid.According to nature2. in past, there was no one knew about farming & agriculture, than two thing were main food. Kandmool & animals provided by nature.According to science3. veggie animal have only tripe & teeth that can eat & digest only veg food. Non veggie animals have only tripe & teeth which can eat & digest only non veg food. But our god gives us tripe & teeth which can eat & digest both type of veg & non veg food. In addition to this, there is nature rule that we digest animal’s meat but our tripe can’t digest our own meat. So it is the setting & system of our nature which allow us to eat the meat of animals.4. now science proved that tree & plant have more sense than animals. So what is wrong, to eat food of more sense plant or to eat food of less sense animal?If you are satisfy with me than please ask my opinion on your next clarification.

Shujaudeen Ahmed Jodhpur

Sep 01, 2012

निमिष जी मैं आपसे सहमत हू. ये पॉलिटिक्स ही है जो हम लोगो मैं बटवारा कर रही है. आप का पोलिटिकल एनालिसिस अच्छा लगता है. आप आसे ही लिकते रहे. आप ही है जो नेताओ के पीछे पड़े रहते है. थॅंक यू

pktiwari jaipur

Sep 01, 2012

वैसे भजापा ने कितना माल दिया हैं यह सब लिखने के लिए लगटरा हैं मोटा माल मिला हैं

kr lucknow

Aug 31, 2012

माननीया संपादक साहब ,वंदेमातरम , आज आपका संपादकिया पड़कर पहली बार लगा की भारतिया मीडीया में भी देश भक्त लोग है आपने एक आम भारतिया नागरिक के तौर पर जो नज़रिया पेश करा है वह कबीले तारीफ है मज़हब के नाम पर डरा और धमका कर अपने लिए रियायते माँगना अब इस देश का फॅशन बन गया है महारष्ट्रा सरकार ने जिस तरह से इस्लामी उटपतियो का जिस तरह से बचाव किया है उससे सॉफ जाहिर है की देश कौमी दंगो की और अग्रसर है आप इसी ईमानदारी से और निर्भीक्ता से सत्या वचन का पाठ करे. परमपिता परमेश्वर आप पर कृपा बनाए रहे .भवदिया आम भारितीया

tanuj jaipur

Aug 31, 2012

Dear shujaudeen ahamad,i like your thoughts but want to answer you one by one.1.) you never cut a green leaf without any requiremen tmyquestion: why you cut dumb animals without any requirement enven you have other options like veg foods 2.) you told that there is sadvi pragya and major purohit and bal thakery myquestion: you told me only 3-4 names but we have more then 50 union and having more then 100 people in each union of terriost activity and they all are muslims so is it justice to compare 3-4 people to thousends 3.) you people never starts riots but you only react myquestion: lets start from mugal period, why akabar had created mosque on land of every famous temple. Why aurangjeb kills many hindus or force to change there religion why at the time of partition pakistan send hindus to india while we had not done this.You people are always create riots or region of riots all world know the condition of muslims i agree that some muslims are good but its rare please comment if i am wrong

ravi noida

Aug 31, 2012

निमिष जी बहुत अच्छा लिखा अपने इसके लिए आप बधाई के पात्र है आपकी लिखने की सेली बहुत है अच्छी लगी बहुत कम लोग लिख पाते है आप की सोच से मेरी सोच काफ़ी मिलती है कॉंग्रेश ने इस देश का बेड़ा गर्क कर दिया है इस पार्टी की ये पॉलिसी मुस्लिम परस्ती करना है वो चाहे इनकी मा बहन एक करदे पर ये उनके नीचे झुके रहते है वोट दो नही तो मार लो

HINDUSTANI 007 jaipur

Aug 31, 2012

Dear mr. Nimish rai, assalamo alekum, i was a big fan of your articles before reading this article. After reading this one i come to the point that you have lack of knowledge or you don’t want to use your knowledge about muslim. Through this way i don’t want to support ajmal kasab & afjal guru but to support the status of muslim in this world. You had unnecessarily mentioned the word muslim a lot of time in your article which shows your mentality about muslim. I want to show you some good things about muslim. At starting i use assalamo alekum, which means there is pleasure of god to you; this is our word to use at starting when we meet to someone. This means we don’t want pleasure of god only for us, we want pleasure of god to anyone whom to we meet.Muslims are never turbulent. We never start riot and rupture, we just react to the thing happened in environment. This is for your kind information that in muslim law there is a rule that you can’t cut the green leaf without requirement then how can we cut the peoples. As far as the concern of unsocial abstract, they are present in every cast or religion not only in muslim. (sadhvi pragya & major purohit is examples for this.)now you take sight of raj thakrey for not giving permission to him and plot more police force for his rally. Not only you but all of our country now that raj thakrey doing negative & rupture politics. Everyone knows what happened in mumbai time to time when raj thakrey call for rally. According to this point of view, there was more police force in comparison of muslim rally. At last, i want to say that if mediaman like you is not going to perform his responsibility in right way then he has no right to claim anyone for his action whether he will politicians, businessman or muslim.

Shujaudeen Ahmed Jodhpur

Aug 31, 2012

Thanx yeh congress govt. Corrput or desh derohio se bhari hui hai ishe ish desh se bahahr nikal do .......................

hemant delhi

Aug 31, 2012

Dear nimish,nice article .... Regards vivek gaur

Vivek Gaur Ahmedabad


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