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माया-उमा-अखिलेश की रैलियों से चढ़ा सियासी पारा

Updated Oct 09, 2012 at 11:25 am IST |

 

09 अक्‍टूबर 2012
आईएएनएस

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लखनऊ। देश में वर्ष 2014 में होने वाले आम चुनाव को ध्यान में रखते हुए सभी दलों ने अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन तलाशनी शुरू कर दी है। मंगलवार को मायावती, उमा भारती और प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की रैलियों की वजह से प्रदेश में सियासी पारा अपने चरम पर है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती मंगलवार को राजधानी के रमाबाई मैदान से गरजेंगी वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की फायर ब्रांड नेता उमा भारती की बहुप्रतीक्षित गंगा समग्र यात्रा मंगलवार को बिहार से उत्तर प्रदेश में प्रवेश करेगी।

मायावती की रैली को ऐतिहासिक बनाने के लिए जहां बसपा ने पूरी ताकत झोंक दी है वहीं उमा की यात्रा की अगवानी के लिए प्रदेश के सभी आला नेताओं ने बिहार के बक्सर जिले से सटे बलियां में सोमवार रात से ही डेरा डाला हुआ है। उमा की यात्रा के स्वागत की तैयारियों के लिए भव्य इंतजाम किए गए हैं। मायावती जहां केंद्र की नीतियों के विरोध के बहाने अपनी ताकत की नुमाइश करेंगी वहीं उमा गंगा की निर्मलता और अविरलता के बहाने अपनी खोई जमीन वापस पाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही हैं।

उमा की गंगा समग्र यात्रा के बारे में भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने बताया कि राज्य के सभी नेता उमा की गंगा समग्र यात्रा की अगुवाई के लिए बलियां पहुंचे हुए हैं। उमा की यात्रा के दौरान जगह-जगह कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। पाठक ने कहा इसके अलावा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी भी बुधवार को सहारनपुर में एक किसान रैली को सम्बोधित करेंगे।

दो पार्टियों की सरगर्मियों के बीच राज्य में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी (सपा) भी मिशन 2014 में जुटी हुई है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मंगलवार को आजमगढ़ में एक कार्यक्रम के दौरान कन्या विद्या धन और बेरोजगारी भत्ता का वितरण करेंगे। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सपा ने पूरा जोर लगाया हुआ है। राजनीतिक टीकाकार राशिद खान ने कहा कि बसपा, सपा और भाजपा तीनों अपनी ताकत की नुमाइश करने में जुटी हुई हैं। यह सारी कवायद लोकसभा चुनाव को लेकर ही है। अब ऐसा माना जाना चाहिए कि राजनीतिक दलों ने मिशन 2014 के लिए अपना-अपना आगाज कर दिया है।

 

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