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बोफोर्स मसले पर संसद में बरपा हंगामा

Updated Apr 26, 2012 at 15:36 pm IST |

 

26 अप्रैल 2012
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस/आईबीएन-7

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नई दिल्ली।
बोफोर्स मुद्दे पर स्वीडन के पूर्व पुलिस प्रमुख स्टेन लिंडस्ट्रोम के खुलासे को लेकर गुरुवार को संसद के दोनों सदनों में जबरस्त हंगामा हुआ, जिसके कारण सदन की कार्यवाही बाधित हुई। विपक्षी दलों के सांसदों ने इस मुद्दे पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा। लिंडस्ट्रोम ने वेबसाइट 'द हूट' को दिए साक्षात्कार में दावा किया है कि बोफोर्स तोप सौदे में पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत राजीव गांधी के खिलाफ रिश्वत लेने के साक्ष्य नहीं हैं, लेकिन इटली के व्यापारी ओत्तावियो क्वात्रोक्की के खिलाफ पर्याप्त सबूत होने के बावजूद उन्हें देश से सुरक्षित बाहर जाने दिया गया।

विपक्ष के हंगामे की वजह से राज्यसभा की कार्यवाही तीन बार स्थगित हुई, जबकि लोकसभा की कार्यवाही भी बाधित हुई। राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता 'किसने क्वात्रोक्की को बचाया' की नारेबाजी कर रहे थे। जवाब में कांग्रेस के सदस्यों ने भी चिल्लाकर कहा, 'भाजपा!'

लोकसभा में भी यही स्थिति रही। भाजपा नेता जसवंत सिंह ने कहा, "बोफोर्स निरंतर भ्रष्टाचार की गाथा है। क्वात्रोक्की के खिलाफ जारी रेड कॉर्नर नोटिस क्यों वापस लिया गया? सरकार ने उसे क्यों सुरक्षित देश से बाहर जाने दिया? यह कैसे हुआ?"

मार्क्स्वादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता बासुदेब आचार्य ने कहा, "क्वात्रोक्की को देश से जाने दिया गया। इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।"

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माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि यह मामला देश में 20 वर्षों से अधिक समय तक छाया रहा और इसने कई प्रतिष्ठित लोगों के सम्मान को नुकसान पहुंचाया। इस मामले में जो भी सामने आता है, उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह ने शून्यकाल में यह मामला उठाया और इस मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की जिसका मार्क्सवादी पार्टी के नेता वासुदेव आचार्य ने समर्थन किया।

कांग्रेस के संजय निरुपम ने इसका विरोध करते हुए कहा कि जांच की मांग स्वीकार नहीं की जानी चाहिए और विपक्ष खासकर भाजपा को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को इस मामले में घसीटने के लिए कांग्रेस से माफी मांगनी चाहिए।

निरुपम के बयान के दौरान भाजपा के सदस्य अध्यक्ष के आसन के सामने आ गए और अपनी मांग के समर्थन में नारेबाजी करने लगे। अध्यक्ष मीरा कुमार ने उन्हें शांत कराने की कोशिश की और जब वे नहीं माने तो उन्होंने सदन की कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

इससे पहले अध्यक्ष मीरा कुमार ने इस पर प्रश्नकाल स्थगित करने का विपक्षी सदस्यों का नोटिस खारिज कर दिया। जसवंत सिंह ने कहा कि स्वीडन के पूर्व पुलिस प्रमुख के साक्षात्कार के हवाले से पांच नई बातें सामने आई हैं और उन पर चर्चा जरूरी है, लेकिन मीरा कुमार का कहना था कि वह इस पर आगे अपनी बात रखने की इजाजत शून्यकाल में देंगी।

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भाजपा के यशवंत सिन्हा तथा कीर्ति आजाद ने मीरा कुमार के निर्देश पर कहा कि कम से कम सिंह को इसका कारण तो स्पष्ट करने ही दिया जाना चाहिए कि आखिर उन्होंने प्रश्नकाल स्थगित करने का नोटिस क्यों दिया। दोनों नेताओं का कहना था कि शून्यकाल में बात रखने से तो यह नोटिस देने का औचित्य ही खत्म हो जाएगा, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ने उनकी दलील यह कहते हुए खारिज कर दी कि नोटिस देने वाले सभी नेताओं को इसका तर्क रखने की इजाजत देने से तो प्रश्नकाल ही अपने आप शून्यकाल में बदल जाएगा।

राज्यसभा में भी इस मुद्दे पर हंगामा हुआ। बीजेपी के अरुण जेटली ने केंद्र सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर सरकार ने क्वात्रोकी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की? 25 साल बाद भी दोषी गिरफ्त से क्यों बाहर है? इससे पहले विपक्ष के हंगामे के कारण राज्यसभा में प्रश्नकाल पूरी तरह बाधित हो गया।

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सभापति को सदन की कार्यवाही बारह बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। 11 बजे सदन की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई बीजेपी, एसपी, जेडीयू लेफ्ट, शिवसेना, बीजू जनता दल समेत तमाम पार्टियों ने बोफोर्स का मुद्दा उठाया। विपक्षी सांसदों के हंगामे के बाद सभापति हामिद अंसारी ने पहले 15 मिनट के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी। 11.15 बजे सदन की बैठक दोबारा शुरू हुई तो विपक्षी सांसदों ने फिर शोर मचाना शुरू कर दिया।


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