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दिल्लीः सौतेली मां, सगे बाप, मासूम पर ढाहे जुल्म, 10 साल जेल

Updated Aug 04, 2012 at 15:22 pm IST |

 

04 अगस्त 2012
आईबीएन- 7

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नई दिल्ली।
दिल्ली की द्वारका कोर्ट ने बेटे पर जुल्म ढाहने के दोषी मां-बाप को दस-दस साल की सजा सुनाई है। साथ ही कोर्ट ने इनपर 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। दिल दहला देने वाली ये दास्तान दिल्ली की है जहां तीन साल के बच्चे के साथ लगातार तीन साल तक उसके मां बाप ने दरिंदगी की। आज बच्चे की उम्र 13 साल है लेकिन आज भी ये बच्चा अपने मां-बाप के जुल्मों को याद कर सिहर उठता है।

ये घटना है साल दिसंबर 2002 की और जगह थी राजधानी दिल्ली। ललित बलहारा ने अपनी पहली पत्नी की मौत के बाद जैसे ही प्रीति बलहारा से दूसरी शादी की वैसे ही उसके तीन साल के मासूम की मुश्किलें शुरू हो गईं। आरोप है कि ललित और प्रीति कई साल तक अपने मासूम बच्चे को अपनी ज्यादती का शिकार बनाते रहे। कभी जमकर पिटाई करते, तो कभी किसी कमरे में बंद कर देते। यही नहीं तीन साल के मासूम को कई बार खाना भी नहीं देते और उसे भूखे ही अकेले कमरे में सोना पड़ता।

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सौतेली मां और सगे बाप ने अपने ही बच्चे पर इतने जुल्म ढाए कि उसे कई बार गंभीर चोटें आईं और कई बार उसे अस्पताल ले जाना पड़ा। हालत ये हो गई कि तीन साल के मासूम का दूसरा घर अस्पताल हो गया। चंद सालों में ही इस मासूम को बां-बाप की बेरहमी से पिटाई के चलते तीन बार अस्पताल में भर्ती तक कराना पड़ा।

कसाई बन चुके मां-बाप ने कभी पीट पीटकर इस मासूम बच्चे का पैर तोड़ दिया कभी इतना मारा कि इसके माथे से खून का रिसाव होने लगा। यही नहीं जब भी वो रोता तो मां-बाप दुश्मन की तरह पेश आते और बकायदा डंडे से इसकी पिटाई करते। कई बार रोने के दौरान पिता ने मासूम को चुप कराने के लिए मुंह में छड़ी तक डाल दी तो कभी पानी से भरी बाल्टी में उसे सिर के बल डाल देता।

हालत ये हो गई कि मां-पिता की पिटाई के बाद इस मासूम बच्चे का शारीरिक विकास तक रुक गया। जबकि खाने पीने में कमी और मार पीट के चलते मासूम के कोमल मस्तिष्क पर भी इसका असर पड़ा और मानसिक तौर पर कई विकृतियां पैदा हो गईं। लेकिन इसके बाद भी मां-बाप का दिल नहीं पसीजा बल्कि जब भी मौका मिला अपना सारा दम बच्चे पर उतारने की कोशिश की।

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अपने मासूम बच्चे पर मां-बाप की दरिंदगी को देखकर बच्चे के नाना हैरान हुए और साल 2005 में नाना ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक अर्जी दी और आरोप लगाया कि मासूम को उसके पिता और मां ही टॉर्चर कर रहे हैं। नाना ने अदालत से गुहार लगाई कि बच्चे को उसे सौंप दिया जाए।

नाना की अर्जी पर अदालत भी हैरान हुई और खुद बच्चे को देखने का फैसला किया ताकि बच्चे की स्थिति का खुद जायजा ले सके। 20 फरवरी 2005 को पहली बार छह साल के मासूम को अदालत के सामने पेश किया गया। इसके चंद दिनों बाद ही जो नतीजे सामने आए उससे खुद अदालत भी सकते में आ गई। ये सोच से भी परे था कि कोई पिता अपने ही मासूम पर इतनी दरिंदगी से पेश आ सकता है। कोई मां तीन साल के मासूम पर इतने जुल्म ढा सकती है।

 

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पाठकों की राय | 04 Aug 2012

Aug 09, 2012

ऐसे लोगो और आजीवन जेल मे बंद रखो और रोज़ इनकी डॅंडो से या कौड़े मरो तब जाके अहसास होगा की दर्द क्या होता हे.

Rajesh Sharma Brisbane

Aug 06, 2012

हमारे देश का क़ानून अँधा है इस हरमज़ड़े को 100 साल की सज़ा सुननी थी.

AMAN AMAN DELHI


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