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हाईकोर्ट की लताड़ से दिल्‍ली पुलिस लाइन पर बोली- ‘हम ढीले थे’

Updated Jan 10, 2013 at 16:38 pm IST |

 

10 जनवरी 2013
आईबीएन 7

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नई दिल्ली। दिल्ली गैंगरेप केस में ढीले रवैये के लिए दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट से माफी मांगी है। आखिरकार गैंगरेप मामले में दिल्ली पुलिस ने मान लिया है कि उसका रवैया ढीला था और इसके लिए उसने हाई कोर्ट से माफी भी मांगी है। दिल्ली पुलिस ने बुधवार को हाई कोर्ट में गैंगरेप की स्टेटस रिपोर्ट सौंपी थी, जिससे अदालत संतुष्ट नहीं थी। आज हाई कोर्ट को पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट पर फैसला सुनाना था। ऐसे में दिल्ली पुलिस ने फैसला आने से पहले ही हाईकोर्ट से माफी मांग कर अपनी गलती मानने में भलाई समझी। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को गैंगरेप मामले में लापरवाही के लिए पुलिस को जमकर फटकार लगाई थी।

एक दिन पहले क्‍या कहा था कोर्ट ने

बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने गैंगरेप के मामले में सरकार और पुलिस दोनों को कड़ी फटकार लगाई थी। स्टेटस रिपोर्ट पर नाराजगी जाहिर करते हुए हाईकोर्ट ने पूछा था कि इस मामले में क्या पुलिस कमिश्‍नर समेत आला अधिकारी जिम्मेदार नहीं हैं? इसके बाद दिल्ली पुलिस ने कोर्ट के सख्त रवैये के बाद अपने लचर रवैये को मानने में ही भलाई समझी। कोर्ट ने साफतौर पर कहा कि दिल्ली पुलिस ने सिर्फ दो एसीपी और छोटे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर महज खानापूर्ती की है, क्योंकि छोटे स्तर के पुलिसवालों के ढीले-ढाले रवैये के जिम्मेदार दरअसल बड़े अफसर ही हैं। कोर्ट ने पूछा कि जब ऐसा है तो फिर ये बड़े अफसर वारदात के जिम्मेदार क्यों नहीं? हाईकोर्ट ने ये सवाल उस वक्त उठाए जब दिल्ली पुलिस ने पुलिस लापरवाही पर अपनी रिपोर्ट अदालत में सौंपी। अदालत के कड़े रुख का अंदाजा इस बात से चलता है कि उसने न सिर्फ स्टेटस रिपोर्ट को खानापूर्ती बताया बल्कि ये भी कहा कि रिपोर्ट में इस बात की पूरी कोशिश की गई है कि आला अधिकारियों को बचाया जाए।

पहले भी हुई थी कमिश्‍नर नीरज कुमार की किरकिरी

गैंगरेप की घटना के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार की कार्यशैली को लेकर भी कई सवाल उठे। उनके इस्तीफे की मांग खुद मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और सांसद संदीप दीक्षित ने उठाई थी। इंडिया गेट पर प्रदर्शनकारियों और मीडिया को बेरहमी से पीटने और वाटर कैनन चलाने को लेकर भी पुलिस कमिश्‍नर पर सवाल उठे, लेकिन सरकार ने उन पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की। यहां तक कि हेड कांस्टेबल सुभाष तोमर की मौत पर भी विवाद हुआ। इस मामले में पुलिस पर 8 बेकसूर लोगों को पकड़ने का आरोप लगा। गैंगरेप की घटना के एकमात्र चश्मदीद के बयान ने भी पुलिस की जमकर किरकिरी की। लेकिन पुलिस अपना बचाव ही करती रही। पुलिस ये कभी नहीं बता पाई कि जिस बस में बलात्कार हुआ वो बस करीब ढाई घंटे तक सड़क पर कैसे बेरोकटोक घूमती रही।

 

दिल्ली गैंगरेप: हाईकोर्ट की फटकार, कमिश्‍नर को क्‍यों छोड़ा?

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