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खुला घूम रहा 'दबंग मंत्री', CMO, CDO, SP के तबादले

Updated Oct 14, 2012 at 10:58 am IST |

 

14 अक्‍टबर 2012  
आईबीएन-7

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लखनऊ।
उत्तर प्रदेश के चर्चित सीएमओ कांड में गोंडा के सीएमओ एसपी सिंह का तबादला कर दिया गया है। उनके साथ ही गोंडा के डीएम, एसपी और सीडीओ का भी तबादला कर दिया है। इसके अलावा राज्य सरकार ने मामले की जांच के भी आदेश दे दिए हैं। सरकार ने प्रेस रिलीज जारी कर ये जानकारियां दी हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि अफसरों के तबादले करने वाली अखिलेश सरकार अखिर अपने दंबग मंत्री विनोद सिंह पर कब मामला दर्ज करेगी। अपने मंत्री पर केस दर्ज करने से पहले ही अफसरों के तबादलों का आखिर मतलब क्‍या है? यूपी की सरकार एकतरफ कहती है कि अगर सीएमओ लिखित शिकायत देंगे तो केस दर्ज और दूसरी तरफ उन्‍हें सुरक्षा देने की जगह तबादले कर रही है। ऐसे में यह साफ हो गया है कि विनोद सिंह से इस्‍तीफा लेकर अखिलेश ने सिर्फ दिखावा किया।  
 
स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने पूरे प्रदेश के CMO कटघरे में खड़े कर दिए

सरकारी प्रेस रिलीज के मुताबिक इस मामले की जांच लखनऊ के कमिश्‍नर को सौंपी गई है। कमिश्‍नर ये भी देखेंगे कि इस मामले में अफसरों ने अपने दायित्वों का पालन ठीक से किया या नहीं। इस मामले में अखिलेश यादव सरकार की जमकर किरकिरी हो रही है और उसे अपने एक कद्दावर मंत्री विनोद सिंह का इस्तीफा भी लेना पड़ा। हालांकि राजस्व मंत्री विनोद सिंह के खिलाफ कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाएगा या नहीं इस पर अब भी सरकार खामोश है। उल्टा स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन ने सूबे के तमाम सीएमओ को ही कठघरे में खड़ा कर दिया। साथ ही ये चेतावनी भी दे दी कि दो तीन दिनों में वो एक बड़ा खुलासा करेंगे। हसन ने कहा कि एनआरएचएम घोटाले में जनता देख चुकी है कि प्रदेश के सीएमओ कितने ईमानदार हैं।

10 अक्‍टूबर को सामने आया था मामला

यूपी में राजस्व, अभाव सहायता एवं पुनर्वास राज्य मंत्री विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह की दबंगई की वजह से गोंडा के सीएमओ के शहर से भागने की खबर 10 अक्‍टूबर को सामने आई थी। सीएमओ के भागने के साथ ही जिले के डीएम और सीडीओ भी छुट्टी लेकर चले गए हैं। आरोप है कि राज्य मंत्री ने सीएमओ डाक्टर एसपी सिंह के घर पर धावा बोला और अपनी कार पर सीएमओ और उनके पीए को उठा ले गए।

भर्ती से जुड़ा है पूरा मामला

असल में पूरा मामला स्वास्थ्य विभाग में इन दिनों डाक्टरों की भर्ती से जुड़ा है। आयुष योजना के तहत कॉन्ट्रैक्ट पर डॉक्टरों की भर्ती की जा रही है। कथित तौर पर राज्य मंत्री विनोद कुमार सिंह की पैरवी पाकर कुछ लोगों को भी इसमें भर्ती किया जाना था। लिस्ट जारी होने के बाद जब मंत्री विनोद कुमार सिंह को अपने करीबियों का नाम उसमें से नदारद मिला तो उनसे रहा न गया। शुक्रवार देर शाम एसपी सिंह ड्यूटी पर वापस तो लौट आए हैं, लेकिन वो अब भी घबराए हुए हैं। विनोद सिंह के खिलाफ वो खुद एफआईआर कराएंगे या नहीं इस बारे में उन्होंने फिलहाल कुछ तय नहीं किया है। उन्होंने बताया कि वो लखनऊ में अपने रिश्तेदार के घर तीन दिन से थे। सीएमओ के मुताबिक अभी मेरी मानसिक स्तिथि ठीक नहीं है। एफआईआर के बारे में बाद में सोचेंगे।

 

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