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Blog: हिंदुत्‍व VS मुस्लिम कार्ड होगा अगले चुनाव का एजेंडा?

Updated Feb 06, 2013 at 17:29 pm IST |

 

06 फरवरी 2013
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योगेंद्र कुमार

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दिल्‍ली समेत पूरे उत्‍तर भारत में भले ही पारा गिर गया हो, लेकिन अगले लोकसभा चुनाव को लेकर राजनीति दिनों दिन गरमाती जा रही है। प्रधानमंत्री पद के लिए कौन उम्‍मीदवार होगा, चुनाव 2014 में होंगे या 2013 में ही बिगुल बज जाएगा, एनडीए से कौन दूर जाएगा, कौन यूपीए के पास आएगा ये सभी मुद्दे गरम हैं। ये वो मुद्दे हैं जिन पर सभी राजनीतिक दल खुलकर बोल रहे हैं और अखबारों की सुर्खियों व चैनलों की हेडलाइंस में इन्‍हें जगह मिल रही है, लेकिन कांग्रेस के चिंतन शिविर के बाद से एक और खबर गरम है और इसे अगले लोकसभा चुनाव से जोड़कर देखने की बजाय एक विवाद के तौर पर देखा जा रहा है। हम इसी मुद्दे पर चर्चा करेंगे, क्‍योंकि मेरी नजर में यह मुद्दा अगले लोकसभा चुनाव में बाकी मुद्दों पर हावी हो सकता है। दरअसल, इस मुद्दे को कांग्रेस के जयपुर चिंतन शिविर में राहुल गांधी को उपाध्‍यक्ष बनाए जाने के बाद देश के गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने हवा दी और मुद्दा था हिंदू और मुस्लिम वोट बैंक का। देश में पिछले कई चुनावों से बाबरी मस्जिद और मंदिर कोई बहुत बड़े मुद्दे नहीं रहे हैं। ऐसे में बात जरा अटपटी लगती है, लेकिन कांग्रेसी नेताओं के बयान और बीजेपी की ओर से नरेंद्र मोदी के पीएम कैंडीडेट का नाम आना इस अटपटी सी आशंका को कुछ तो पुख्‍ता करता है।

सबसे पहले शिंदे से बात शुरू करते हैं, उन्‍होंने चिंतन शिविर में भगवा आतंकवाद/हिंदू आतंकवाद जैसे शब्‍दों का प्रयोग किया। जवाब में बीजेपी ने तगड़ा विरोध किया, लेकिन शिंदे के पीछे पूरी कांग्रेस खड़ी दिखाई दी। और तो और मुंबई हमलों का मास्‍टरमाइंड हाफिज सईद भी शिंदे की पीठ थपथपाता दिखा। कमलनाथ, सलमान खुर्शीद, दिग्‍गी राजा समेत सभी कांग्रेसी नेता शिंदे के पीछे खड़े दिखाई दिए। बात ने जब तूल पकड़ा तो कांग्रेस प्रवक्‍ता शकील अहमद सामने आए और धीरे से बोल गए कि शिंदे से गलती हो गई। यहां तक बात सिर्फ इतनी ही थी कि शिंदे ने अपरिपक्‍वता के चलते ये बयान दिया, लेकिन क्‍या वाकई ऐसा सोचना सही है कि वो सिर्फ एक भूल थी। ऐसा तो नहीं जयपुर चिंतन शिविर से अगले चुनाव के एजेंडे का साफ संकेत दिया गया था। अब इसके आगे की कहानी सुनिए।

राहुल की ताजपोशी के जवाब में बीजेपी के सूत्रों के हवाले से मोदी को पीएम उम्‍मीदवार घोषित किए जाने खबर आती है। इसके तत्‍काल बाद कांग्रेस प्रवक्‍ता शकील अहमद एक जनसभा में लालकृष्‍ण आडवाणी के पाकिस्‍तानी होने का सबूत पेश करते हैं। उन्‍हें सलाह देते हैं कि पाकिस्‍तान में हिंदुओं की हालत खराब है, वहां जाकर सेवा करें। मतलब भारत में हिंदू नहीं मुस्लिमों की हालत खराब है और हमें इनकी सेवा करने दीजिए। यहां तक भी बात इतनी गंभीर नहीं थी, क्‍योंकि इससे पहले दिग्‍गी राजा और सलमान खुर्शीद मुस्लिम वोट बैंक को लुभाने के लिए मुंबई हमले में हिंदू आतंकियों का हाथ और बटला एनकाउंटर को फर्जी बताने की बात कह चुके हैं। खुर्शीद साहब देश को बताना नहीं भूले थे कि बटला मुठभेड़ के बाद सोनिया जी रो गईं थीं, लेकिन बात गंभीर तब हो गई जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का बयान आया। मनमोहन सिंह ने शनिवार को राष्ट्रीय विकास परिषद की 52वीं बैठक में कहा कि अल्पसंख्यकों को समाज में समान दर्जा हासिल कराने के लिए अनोखे तरीके से काम करने की जरूरत है। खासतौर पर मुस्लिम समुदाय को सशक्‍त बनाने के लिए काफी आगे बढ़कर काम करना होगा।

पीएम साहब ये कहना भी नहीं भूले कि देश के संसाधनों पर मुसलमानों का पहला दावा होना चाहिए। बात कर रहे थे अल्‍पसंख्‍यकों की, लेकिन प्रधानमंत्री की जुबान से सिर्फ मुस्लिमों का नाम निकला। हिंदुस्‍तान की राजनीति में वोट बैंक पॉलिटिक्‍स कोई नई बात नहीं है, लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्‍या अगले चुनाव में राजनीतिक सिर्फ और सिर्फ हिंदू और मुस्लिमों की बात करेंगे। क्‍या कांग्रेस की ये पहल अगले लोकसभा चुनाव का एजेंडा तो नहीं है? क्‍या भारतीय जनता पार्टी की ओर से मोदी को प्रोजेक्‍ट किए जाने के बाद अगले चुनाव का मुद्दा सिर्फ और सिर्फ हिंदू बनाम मुस्लिम वोट बैंक के इर्द गिर्द घूमेगा? क्‍या यूपीए 2 के कार्यकाल में घोटालों पर मचा हाहाकर अगले चुनाव में मुद्दा नहीं बन सकेगा? अगले चुनाव में सिर्फ गोधरा दंगे की बात होगी और अर्थव्‍यवस्‍था की बदहाली केंद्रीय मुद्दा नहीं होगा? क्‍या पेट्रोल-डीजल और दो वक्‍त की रोटी पर महंगाई की मार को हिंदू-मुस्लिम कार्ड दबा देगा, मैं ये तो नहीं कह सकता कि अगले चुनाव टॉप 5 मुद्दे क्‍या होंगे, लेकिन इतना जरूर कह सकता हूं कि कांग्रेस इस बात की भरसक कोशिश करेगी कि इस बार का चुनाव सिर्फ और सिर्फ मुस्लिम कार्ड पर खेला जाए और उसके नेता ऐसा करते दिख रहे हैं। ये ही एक ऐसा मुद्दा है जो 2जी स्‍कैम, कॉमनवेल्‍थ घोटाला, महंगाई, बेरोजगारी और पटरी से उतरती अर्थव्‍यवस्‍था के मोर्चे पर कांग्रेस की विफलता पर पर्दा डाल सकता है। 

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पाठकों की राय | 06 Feb 2013

Feb 06, 2013

धर्म के आधार पर लोगों को बाँटना स्मविधान की आत्मा पर चोट करना है. लेकिन इस गंदे खेल को जब ऊपर वाले खेलेगे तो नीचे वालो को भुगतना ही होगा. जाहिर है जनता की असल ज़रूरतें दरकिनार होगी और भावनाओ की नाव पर सवार होकर नेता चुनावी वैतरणी पर करेगे. यह नेताओ की बाँटो और राज करो की नीति के साथ ही देश की व्यवस्था की खामी को भी उजागर करता है

satish rai ghazipur


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