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लोकसभा में असम पर बहस शुरू, आडवाणी ने की पहल

Updated Aug 08, 2012 at 12:11 pm IST |

 

08 अगस्त 2012
आईबीएन-7

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नई दिल्ली। आज मानसून सत्र शुरू होते ही असम हिंसा के मुद्दे पर स्थगित होने के बाद फिर 12 बजे कार्यवाही शुरू  हो गई है।

लोकसभा में अब भी असम की हिंसा पर बहस जारी है और भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने असम पर बहस की शुरूआत की। उन्होंने इस मुद्दे पर प्रस्ताव रखा।

उधर अकाली दल ने अमेरिका में गुरुद्वारे पर हुए हमले पर बहस करवाने की मांग की है। 

इससे पहले - 

संसद का मानसून सत्र शुरू हुआ हंगामे के साथ स्थगित भी

संसद का मानसून सत्र शुरू तो हुआ, लेकिन शुरू होते ही विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया और लोकसभा 12 बजे तक स्थगित कर दी गई।
भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा में असम दंगों पर स्थगन प्रस्ताव रखा जिसे लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने स्वीकार कर लिया।

उधर राज्यसभा भी शुरू होते ही 12 बजे तक स्थगित कर दी गई।

मायावती ने राज्यसभा में उत्तर प्रदेश की सरकार पर उनका अपमान करने का आरोप लगाया जिसके बाद राज्यसभा में हंगामा हो गया और कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।  

गौरतलब है कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के घर मंगलवार शाम एनडीए के नेताओं ने बैठक करके मॉनसून सत्र में गठबंधन की रणनीति पर चर्चा की। सबसे बड़े विपक्षी गठबंधन होने के नाते एनडीए ने, बुधवार से शुरू हो रहे इस सत्र में सरकार पर हमले के लिए कमर कस ली है।

एनडीए ने सबसे पहले असम हिंसा पर सरकार को घेरने की योजना बनाई है। बीजेपी पहले दिन ही प्रश्नकाल को स्थगित कर इस मुद्दे पर बहस कराये जाने की मांग करेगी। इसके अलावा आर्थिक संकट, रिटेल में एफडीआई, महंगाई, सूखे और अमरनाथ यात्रा में बदइंतजामी जैसे मसलों पर बहस की मांग की गई है। फिर से वित्तमंत्रालय पहुंचे पी.चिदंबरम पहले से ही निशाने पर हैं, और सत्र के दौरान उनके जरिये प्रधानमंत्री को भी घेरने की तैयारी है।

सत्र में 31 विधेयकों पर चर्चा की संभावना है। भूमि अधिग्रहण,पेंशन, बीमा और बैंकिंग से जुड़े विधेयक पहले से ही विवादों में हैं। सबकी नजरें लोकपाल बिल पर रहेंगी, जो फिलहाल राज्यसभा की सेलेक्ट कमेटी के पास है। सरकार ये पहले ही साफ कर चुकी है कि इस सत्र में लोकपाल बिल पर चर्चा नहीं की जाएगी।

वैसे, सरकार को विरोधियों से ही नहीं, सहयोगियों से भी परेशानी हो सकती है। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव में एकजुट दिखने वाला गठबंधन कई मुद्दों पर बिखरा दिख रहा है। रिटेल में एफडीआई और भूमि अधिग्रहण विधेयक को लेकर ममता बनर्जी की टीएमसी का विरोध जगजाहिर है। ऐसे में, हाल ही में लोकसभा में सदन के नेता बने सुशील कुमार शिंदे के सामने बड़ी चुनौती होगी।

7 सितंबर तक चलने वाले इस सत्र में 120 घंटे का समय कार्यवाही के लिए आवंटित किया गया है। लेकिन विपक्ष के तेवर को देखते हुए ये कहना मुश्किल है कि इसमें कितने घंटे वाकई काम हो पाएगा।

 

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पाठकों की राय | 08 Aug 2012


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