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गडकरी की कंपनी को ‘अनलिमिटेड’ नोटों की सप्‍लाई, कहां से आई?

Updated Oct 23, 2012 at 11:29 am IST |

 

23 अक्‍टूबर 2012
आईबीएन 7

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नई दिल्ली।
एक मशहूर अंग्रेजी अखबार ने अपनी खबर में गडकरी के नियंत्रण वाली कंपनी पूर्ति पावर एंड शुगर लिमिटेड के फंड को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। अखबार ने अपने पड़ताल में खुलासा किया है कि घाटे से जूझ रही गडकरी की कंपनी को एक कंस्ट्रक्शन कंपनी ने 164 करोड़ का लोन दिया। इस कंपनी को 1995 से 1999 के दौरान गडकरी के पीडब्लूडी मंत्री रहते तमाम सरकारी ठेके मिले थे। यही नहीं इस कंपनी के मालिकान ने गडकरी की पूर्ति पावर में बड़ी निवेश किया है, लेकिन इससे भी सनसनीखेज आरोप है कि कंस्ट्रक्शन कंपनी के अलावा 16 कंपनियों के एक समूह के पूर्ति में शेयर हैं, लेकिन इन कंपनियों के शुरुआती डायरेक्टर गडकरी के लोग मसलन उनका ड्राइवर जिसका नाम मनोहर पानसे, गडकरी का एकाउंटेंट पांडुरंग झेडे, उनके बेटे का दोस्त श्रीपाद कोतवाली वाले और निशांत विजय अग्निहोत्री नाम का एक शख्स थे।

कंपनियों के पते फर्जी

अखबार की पड़ताल में पता चला है कि रिकॉर्ड में मौजूद इन कंपनियों के पते भी फर्जी थे। जिन चार शहरों में ये कंपनियां रजिस्टर्ड हैं वो वहां नहीं मिलीं। हालांकि गडकरी और उनकी कंपनी के मैनेंजिंग डायरेक्टर तमाम आरोपों से इनकार कर रहे हैं। नितिन गडकरी ने अखबार से कहा है कि वो किसी भी तरह की जांच के लिए तैयार हैं। उनके मुताबिक 14 महीने पहले उन्होंने पूर्ति कंपनी के चेयरमैन के पद से इस्तीफा दे दिया था। वहीं पूर्ति पावर एंड शुगर लिमिटेड के एमडी सुधीर दिवे का कहना है कि पूर्ति को 64 करोड़ का नुकसान हुआ था और कंपनी के प्रमोटर डीपी महिस्कर से उन्हें 164 करोड़ का लोन ग्लोबल सेफ्टी विजिन के जरिए मिला और पूर्ति ने 62 करोड़ रुपये ब्याज समेत लौटा दिए। निवेश, तरक्की और पूर्ति पावर से जुड़ी कंपनियों को लेकर कोई संदेह नहीं है। सभी कंपनियां सही हैं और 12-15 साल पुरानी है। सभी नियम कायदों का पालन करती हैं।


केजरीवाल ने ये आरोप लगाए थे गडकरी पर

* विदर्भ के नागपुर जिले के उमरेद तालुका और खुर्सापुर गांव में बांध बनाने के लिए महाराष्‍ट्र सरकार ने किया था अधिग्रहण।

* बांध बनाने का काम 1982 में शुरू हुआ और  1997 में बांध बनकर पूरा हो गया, लेकिन काफी जमीन बच गई।

* साल 2000 में किसानों ने महाराष्‍ट्र सरकार को लिखा कि ये बची हुई जमीन उन्हें खेती के लिए वापस दे दी जाए।

* किसानों की मांग पर दो साल चुप रहने के बाद यानी 2002 में सिंचाई विभाग ने किसानों को जमीन देने से इंकार कर दिया।

* 4 जून 2005 को नितिन गडकरी ने अजित पवार को चिट्ठी लिखी कि खाली पड़ी 100 एकड़ जमीन उन्‍हें दे दी जाए।

* पवार ने गडकरी को जवाब दिया कि विदर्भ डेवलेपमेंट काउंसिल की अगली बैठक में उनकी मांग पर प्रस्‍ताव लाया जाएगा।

* काउंसिल की अगली बैठक में गडकरी की मांग के मुताबिक उन्‍हें जमीन देने का प्रस्‍ताव मंजूर कर दिया गया।

* बैठक के दौरान कांउसिल के सेक्रेटरी ने जताया था ऐतराज, लेकिन अजित पवार पहले ही कर चुके थे फैसला।

* 28 नवंबर 2007 को एक और मीटिंग हुई और एक और जमीन का टुकड़ा गडकरी को देने का प्रस्‍ताव मंजूर हो गया। इस तरह अजित पवार ने दो बार में पूरी की पूरी 100 एकड़ जमीन गडकरी को दे दी।

* गडकरी की पूर्ति सिंचन कल्याणकारी संस्था को विशेष अनुदान के तौर पर 2005 में 31.59 हेक्टेयर जमीन दी गई। नियमों के मुताबिक अधिग्रहण से बची जमीन किसानों को वापस मिलनी चाहिए थी।

* गडकरी की चिट्ठी के बाद जेम्स ऑफ इंडिया को मिली 5.36 हेक्टेयर जमीन भी गडकरी की संस्था को दे दी गई। तत्कालीन सिंचाई मंत्री अजित पवार की मंजूरी से ये जमीनें दी गईं।

* विदर्भ में बांध बनाए जा रहे हैं, लेकिन नहरें नहीं। बिना नहरों के किसानों को कैसे मिलेगा पानी, इसलिए विदर्भ के इलाके में किसानों की खुदकुशी का सिलसिला जारी है।

* अपने उद्योगों की प्यास बुझाने के लिए गडकरी ने किसानों का पानी छीन लिया। पानी को प्रदूषित करने के लिए भी बीजेपी अध्यक्ष की कारोबारी हसरत को जिम्मेदार।

* नागपुर के उमरेड तालुका में बीजेपी अध्‍क्ष नितिन गडकरी के बिजलीघर से प्रदूषण फैला है। इस प्लांट से निकलने वाली फ्लाई ऐश से इलाके के तमाम गांवों में सांस लेने में दिक्कतें हो रही हैं।

* प्लांट से निकलने वाली फ्लाई ऐश से इलाके की नदी का पानी भी जहरीला होता जा रहा है, लेकिन ग्रामीणों की शिकायत को कोई तवज्जो नहीं दी गई।

* केजरीवाल के मुताबिक उसी गांव में पंचायत ने 19 अगस्त 2007 को प्रस्ताव पारित किया कि गडकरी की कंपनी का जो पावर प्लांट है, उससे निकलने वाली गंदगी को पीने के पानी में मिलने से रोका जाए।

 

देखें, गडकरी बोले ‘केजरीवाल के आरोप सरासर गलत हैं’

गडकरी पर फूटा ‘केजरीवाल बम’, कांग्रेस मना रही दीवाली

 

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