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‘दामिनी’ के दोस्‍त पर डाला गया पुलिस की वाह-वाही का दबाव!

Updated Jan 06, 2013 at 10:05 am IST |

 

05 जनवरी 2013
आईबीएन 7

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नई दिल्ली। दिल्ली गैंगरेप मामले में वारदात का इकलौता चश्मदीद और आरोपियों के जुल्म का शिकार सबसे अहम गवाह सामने आ गया है। देश की बेटी के इस दोस्त ने एक निजी चैनल पर इस पूरे घटना के बारे में जो कुछ खुलासा किया है उससे दिल्ली के लोगों, दिल्ली पुलिस, सफदरजंग अस्पताल और सिस्टम की कलई खुलती है। इस चश्मदीद ने जो खुलासा किया है उसके मुताबिक 16 दिसंबर की रात वारदात के बाद उन्हें फ्लाईओवर के पास बस से नीचें फेंक दिया गया। बाद में लड़की को बस से कुचलने की कोशिश हुई लेकिन उन्होंने लड़की को खींच कर किसी तरह उसकी जान बचाई। दोनों बुरी तरह जख्मी थे। चश्मदीद ने ये भी बताया कि उन्‍हें पड़ा छोड़ पुलिस वाले 45 मिनट तक इस बात पर लड़ते रहे कि ये मामला किस थाने का है। अस्पताल में काफी देर तक उन्हें शरीर को ढकने के लिए कपड़े या कंबल तक नहीं दिए गए। बार-बार मांगने के बावजूद जब मदद नहीं मिली तो हार कर लड़का फर्श पर ही लेट गया। वारदात के बाद अस्पताल पहुंचने में ही उन्हें ढाई घंटे लग गए। गैंगरेप कांड के इस चश्मदीद का दावा है कि लड़की ने पहली बार एसडीएम को जो बयान दिया था वो सही था। इस लड़के ने ये भी दावा किया कि इस मामले में जांच में लगी पुलिस की एक बड़ी अधिकारी उनसे बड़े लोगों के सामने उनकी वाहवाही करने को कहा करती है।

वो तड़पते रहे और पुलिस झगड़ती रही

लड़की के शरीर से बहुत ज्यादा खून बह रहा था। उनके शरीर पर कपड़े भी नहीं थे। इसके बाद उन्होंने उसी हालत में आने-जाने वालों से मदद मांगने की कोशिश की लेकिन सड़क से गुजरने वाले ऑटो, कार और बाइक सवारों ने उनकी कोई मदद नहीं की। लोग अपनी रफ्तार धीमी कर उन्हें देखते और आगे बढ़ जाते। थोड़ी देर में वहां कुछ लोग जमा हो गए लेकिन 20-25 मिनट तक मदद के लिए कोई सामने नहीं आया। किसी ने फोन कर पीसीआर को खबर दी तो पीसीआर को मौके पर पहुंचने में आधे घंटे लग गए। मौके पर तीन-तीन पीसीआर वैन पहुंची, लेकिन तीनों 45 मिनट तक इस बात को लेकर झगड़ते रहे कि ये किस थाने का मामला है।

पुलिस वालों ने लड़की को उठाया तक नहीं

लड़की के दोस्त का दावा है कि वो पुलिस के सामने एंबुलेंस बुलाने के लिए चिल्लाता रहा लेकिन किसी ने उनकी नहीं सुनी। यहां तक कि उन दोनों को कपड़े तक नहीं दिए गए। बाद में उन्हें पीसीआर से ही सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल के लिए पीसीआर वैन में लड़की को चढ़ाने के लिए कोई पुलिस वाला आगे नहीं आया। उन्हें अपने हाथ गंदे होने का डर था। ऐसे में जख्मी होने के बावजूद लड़की के दोस्त ने ही उसे वैन में बिठाया।

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पाठकों की राय | 06 Jan 2013

Jan 05, 2013

आज राजनेताओ^ प्रशासन और पुलिस तंत्र के लोग सम्वदनाहीनतथा न्रशन्स होते जा रहे हे^.औरतो के प्रति उनका रवैया अपमान जनक और अभद्र टिप्पणियोकी भर्त्सना करती हू श्रीमती प्राजक्ता धरतिया जगदलपुर

Smt PRAJAKTA DHARTIYA JAGADALPUR

Jan 05, 2013

(. चौधरी देल्ही)इस बंदे ये इस बात पर भी शेत्रवाद शुरू कर दिया जो बात थी वो कही ओर ही रह गयी ओर ई थिंक ये देल्ही के भी नई है ओर अपने नाम के आगे देल्ही लिखा हैपक्ष रखने का हक सबको है लेकिन ये भी द्‍यान मैं रखना चाहिए की बात कौनसी चल रही है

Vikas Delhi

Jan 05, 2013

हम को तो लगता है की देल्ही की जगह बिहार को राजधानी बना देना चाहिए क्योकि बलात्कार हर सिटी मई होता है चाहे वो पटना हो उरिसा हो मुंबई हो लेकिन इंसानिएट जितना बिहार के खून मई है किसी भी स्टेट मई नही है अगर आप को ये ग़लत बात लगता है तो मुझे माफ़ कार्दिजिए गा क्योकि बोलने का अधिकार हर नागरिक को है (जाई भारत )

Anish Choudhary Delhi


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