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अलविदा 2012: पूरे साल मचा भ्रष्‍टाचार पर हाहाकार!

Updated Dec 12, 2012 at 17:26 pm IST |

 

12 दिसंबर 2012
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अरविंद केजरीवाल ने 2011 में अन्‍ना हजारे के साथ मिलकर राष्‍ट्रव्‍यापी आंदोलन खड़ा किया, लेकिन 2012 में दोनों ने अलग राह अपना ली। अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी का गठन कर साफ कर दिया कि वो सिस्‍टम में रहकर गंदगी साफ करेंगे, लेकिन अन्‍ना बाहर से सिस्‍टम के खिलाफ जंग जारी रखने के अपने निर्णय पर कायम रहे। हालांकि 2012 के लिए ये अपने आप में बहुत बड़ी खबर रही, लेकिन केजरीवाल ने अन्‍ना और उनके अलगाव पर न तो मीडिया का ध्‍यान केंद्रित रहने दिया और न ही देश का।

उन्‍होंने अपनी आम आदमी पार्टी की घोषणा की और फिर बरस पड़े राजनेताओं पर। केजरीवाल ने 2012 में राजनेताओं के भ्रष्‍टाचार खुलासे की ऐसी मुहिम शुरू की, जिसमें कांग्रेस, बीजेपी समेत लगभग सभी दलों के चेहरे पर कालिख पुत गई। उनके खुलासों का प्रभाव ऐसा रहा कि बीजेपी समेत विभिन्‍न दल केजरीवाल के पीछे खड़े दिखाए दिए, लेकिन केजरीवाल ने उन्‍हें भाव नहीं दिया। उन्‍होंने सबसे पहला निशाना साधा यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर। इसके बाद कांग्रेसी के नेता सलमान, खुर्शीद, पी चिदंबरम, बीजेपी के नितिन गडकरी समेत न जाने कितने नेताओं का जीना मुहाल कर दिया। केजरीवाल के पीछे पीछे कई अखबारों और चैनलों ने भी खुलासों का फॉलोअप किया, जिससे राजनीतिक जमात की मुश्किलें और बढ़ गईं। 2012 के मध्‍य में शुरू हुआ ये सिलसिला साल के अंत तक चला और राजनीति में भ्रष्‍टाचार पर इतनी देश में जोरदार बहस शुरू हो गई।        

रॉबर्ट वाड्रा और डीएलएफ डील का खुलासा  

टीम केजरीवाल ने 05 अक्‍टूबर को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर सीधा निशाना साधकर सनसनी मचा दी थी। उसने आरोप लगाया था कि वाड्रा ने अपने रसूख का इस्तेमाल करके 50 लाख की पूंजी से महज तीन साल में 300 करोड़ की संपत्ति बना ली। इसमें मशहूर कंस्ट्र्क्शन कंपनी डीएलएफ ने उनकी मदद की। टीम ने इस बात की जांच की मांग की है कि क्या रॉबर्ट वाड्रा को मदद करने के एवज में ही कांग्रेस सरकारों ने डीएलएफ को बड़े पैमाने पर जमीनें आवंटित कीं।

वाड्रा मामले में IAS खेमका का तबादला

रॉबर्ट वाड्रा और डीएलएफ के बीच हुई लैंड डील का म्यूटेशन रद्द करने वाले आईएएस अफसर अशोक खेमका का 16 अक्‍टूबर को
तबादला कर दिया गया था। खेमका ने बताया कि जिस अधिकारी ने म्यूटेशन को स्वीकृति थी वह इसके लिए अनाधिकृत था। म्यूटेशन को स्वीकृति देना उसके अधिकार क्षेत्र में आता ही नहीं था। खेमा के ट्रांसफर पर पूरे देश में तीखी प्रतिक्रिया हुई थी।

बुरे फंसे खुर्शीद, जाली हस्‍ताक्ष्‍ार का एक और खुलासा

एक तरफ केजरीवाल सलमान खुर्शीद के इस्तीफे पर अड़े हैं तो दूसरी ओर सलमान खुर्शीद के ट्रस्ट के खिलाफ कुछ और खुलासे हुए हैं। 13 अक्‍टूबर को एक अंग्रेजी अखबार ने खुलासा किया था कि जाली दस्तखत का इस्तेमाल कर विकलांगों के नाम पर 68 लाख रुपए और हासिल किए गए थे।

बेनी बोले ‘घोटाले के लिए 71 लाख छोटी रकम’

विकलांगों के फंड में धांधली के आरोप में फंसे कानून मंत्री सलमान खुर्शीद के बचाव में उतरे कांग्रेस नेता बेनी प्रसाद वर्मा ने 15 अक्‍टूबर को कहा था कि सलमान खुर्शीद ऐसा घपला नहीं कर सकते। बेनी प्रसाद ने कहा कि केंद्रीय मंत्री के लिए 71 लाख बहुट छोटा अमाउंट है 71 करोड़ होता तो गम्भीर होता। सलमान 71 लाख के लिए कोई घपला नहीं कर सकते।

खुर्शीद ने दी थी केजरीवाल को खून बहाने की धमकी

अरविंद केजरीवाल की ओर से भ्रष्‍टाचार के आरोपों से सलमान खुर्शीद इतने भड़क गए थे कि उन्‍होंने 17 अक्‍टूबर को केजरीवाल को खुलेआम धमकी दे दी थी। उन्होंने कहा था कि बहुत दिन से उनके हाथों में कलम है। उन्हें वकीलों का मंत्री बनाया गया था और कहा गया था कि वो कलम से काम करें, लेकिन वो अब लहू (खून) से भी काम करेंगे। खुर्शीद ने कहा था कि अरविंद फर्रूखाबाद जाएं, लेकिन लौटकर भी दिखाएं। हालांकि, इसके बाद केजरीवाल फर्रूखाबाद गए थे और उन्‍होंने खुर्शीद को उनके बयान के लिए हाईकमान ने लताड़ लगाई थी।

गडकरी पर भी फूटा था ‘केजरीवाल बम’

भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग छेड़ने का ऐलान करने वाले अरविंद केजरीवाल ने 18 अक्‍टूबर को देश की मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी को किसानों की जमीन, उनका पानी छीन कर प्रदूषण की सौगात देने वाला राजनेता करार दिया था। वो भी महाराष्ट्र के उस इलाके में जहां फसलें खराब होने, सिंचाई न हो पाने और कर्ज न उतार पाने के चलते किसानों की खुदकुशी का लंबा इतिहास बन चुका है- यानि विदर्भ। इसके बाद गडकरी ने जैसे तैसे अध्‍यक्ष पद बचाया था।

केजरीवाल पर जूता मारने की कोशिश 

31 अक्‍टूबर को दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब में अरविंद केजरीवाल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के सचिव जगदीश शर्मा ने सवाल पूछने को लेकर हंगामा किया था। साथ ही उन्होंने केजरीवाल पर जूता फेंकने की कोशिश भी की थी। बाद में ये भी खबर आई थी जगदीश शर्मा गांधी परिवार का बेहद करीबी था।

केजरीवाल का आरोप, रिलायंस के हाथ में कांग्रेस!

31 अक्‍टूबर को दिल्ली के कंस्टीट्यूशनल प्रेस क्‍लब में अरविंद केजरीवाल ने रिलायंस इंडस्ट्रीज पर आरोप लगाए थे। केजरीवाल ने आरोप लगाते हुए कहा था कि इस औद्योगिक घराने ने कांग्रेस सरकार के निर्णय को प्रभावित किया। उन्होंने गैस की जमाखोरी की और सरकार को ब्लैकमेल किया। देश में महंगाई के लिए रिलायंस जिम्मेदार है। जो बिजली सस्ती मिलनी चाहिए वो ऊंची कीमत पर लोगों को मिल रही है।

दिग्गी बोले, न खाता न बही जो अरविंद कहें सही क्‍यों?

कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने 15 अक्‍टूबर को कहा था यदि कागजातों पर किसी के फर्जी साइन हैं या मामले में किसी तरह की अनियमितता है तो जांच हो जाने दीजिए। दिग्विजय ने चुटकी लेते हुए कहा कि अभी तो मामले में एक भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई है और अगर केजरीवाल चाहते हैं कि जांच उन्हें ही सौंप दी जाए तो ऐसा कैसे हो सकता है? न खाता, न बही, जो अरविंद कहें वही सही, यह नहीं चलेगा।

खुर्शीद ने ‘मच्छर’ कहा तो केजरीवाल बोले-‘डेंगू’ का हूं!

विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद द्वारा खुद को मच्छऱ बताए जाने के जवाब में समाज सेवा से राजनीति में आए अरविंद केजरीवाल ने 11 नवंबर को एक बार फिर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा था और खुद को डेंगू से भी अधिक घातक बताया था।

केजरीवाल बोले थे, मोदी सरकार, अदानी की दुकान

आम आदमी पार्टी (एएपी) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने 4 दिसंबर को गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा था।  केजरीवाल ने आरोप लगाया था कि नरेंद्र मोदी निजी कंपनियों के हाथों में खेल रहे हैं। केजरीवाल ने कहा था कि गुजरात में चुनाव होने वाले हैं। एक तरफ मोदी हैं तो दूसरी तरफ कांग्रेस। हमारे पास कागजात हैं जो ये साबित करते हैं कि दोनों मिलकर निजी कंपनियों का फायदा करवाते हैं।

 

 

 

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पाठकों की राय | 12 Dec 2012

Dec 15, 2012

Main bhi aapke sath hun ajun ji aap sada sach bolna muzammil

muzammil delhi

Dec 12, 2012

मेरी राय मे अरविंद केज़रीवाल ने आम आदमी पार्टी का गठन करके सही निर्णय लिया है क्यो कि सरकार के कई नेताओ ने कहा था किआंदोलन करने से कुछ नही होगा अगर वास्तव मे बदलाव चाहते हो तो जनता द्वारा चुनकर राजनीति मे आए राहुल गाँधी भी अक्सर कहा करते है कि पढ़े लिखे युवा राजनीति मे आए अब ऐसी स्थिति मे जब तक चारो तरफ से साफ छवि के लोग आगे बढ़े तथा समाज को बभ्रास्तचार से मुक्त करने मे मे मदद करे.

Ashok Trip Akela lucknow


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