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आपकी रायः रेलवे टिकटों को लेकर क्या आपको परेशानी होती है, अगर हां तो किस तरह की?

Updated Dec 01, 2012 at 13:00 pm IST |

 

01 दिसम्बर 2012
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मुंबई।
आज से रेलवे में स्लीपर क्लास और जनरल डिब्बे में सफर करने वाले यात्रियो को अपना पहचान पत्र रखना जरूरी हो गया है। रेल मंत्रालय का ये नियम दलालों का दबदबा खत्म करने के लिए लिया गया है।

'हिन्दी इन डॉट कॉम' को बताइए कि क्या रेलवे टिकटों को लेकर आपको परेशानी होती है, अगर हां तो किस तरह की?

 

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पाठकों की राय | 01 Dec 2012

Dec 10, 2012

मनिनगर स्टेशन ,अहमदाबाद गुंडा तत्वो और रैलवेयपुलीश की मिली भगत की वजह से आम प्रजा को बहुत दिक्कत उतनी पड़ती है. आप साम 6 बजे से भी बैठे रहो तो भी आप का नंबर 12-13 के बाद ही आएगा 1से 12 तक इन तत्वो का ही फिक्स है ,यानी आप को निरासाही हाथ लगती है.

S.K.YADAV AHMEDABAD

Dec 08, 2012

Jis gav ya saher me rail station nahi he waha par rail reserwation ki 1 window rakhni chahiye ta ke waha ke logo dur dur 50,80 k.M. Tak na jana parhe or dalalo se 6utkara ho....

M.ILYAS 362225,GUJRAT

Dec 08, 2012

डेहरी ऑन सोन मे तत्काल टिकट लेना आसान नही है कई दलाल पहले ही पब्लिक पर भारी पड़ जाते है बाकी रेल कर्मचरी नो रूम का रट लगाकर पब्लिक को बाहर का रास्ता दिखा देती है

shambhu sharma surat

Dec 08, 2012

डेहरी ऑन सोन मे तत्काल टिकट लेना आसान नही है कई दलाल पहले ही पब्लिक पर भारी पड़ जाते है बाकी रेल कर्मचरी नो रूम का रट लगाकर पब्लिक को बाहर का रास्ता दिखा देती है

shambhu sharma surat

Dec 08, 2012

डेहरी ऑन सोन मे तत्काल टिकट लेना आसान नही है कई दलाल पहले ही पब्लिक पर भारी पड़ जाते है बाकी रेल कर्मचरी नो रूम का रट लगाकर पब्लिक को बाहर का रास्ता दिखा देती है

shambhu sharma surat

Dec 07, 2012

हम अभी भी तत्काल रिज़र्वेशन नही करा सकतें हैं, ऐजेंट पर हिी निर्भर रहना पड़ता हैं

Sunil Upadhyay Udaipur

Dec 07, 2012

Online rejervation hona chahiye, wating list khatam kar dena chaiye

deepak namdev gwalior

Dec 07, 2012

वेटिंग सिस्टम को बंद कर देना चाहिए

Akhilesh Siwan

Dec 07, 2012

वटिंग सिस्टम को ख़त्म कर देना चाहिए क्योकि सीट रिज़र्व रहते हुवे भी हमे सीट नही मिल पाती है.

Akhilesh kumar singh New Delhi

Dec 06, 2012

वेटिंग लिस्ट का सिस्टम ही ख़तम कर देना ही चाहिए इस से दूसेरे लोगो को परेशानी का सामना तो नही करना पड़ेगा.Irctc.जैसे और 20-25 वेब्सीटे बना देना चाहिए ताकि जो घर से तिककिट निकल रहे है उनको कोई दिक्कत नेया हू

ABC Mumbai

Dec 06, 2012

M to kayunga ki ticket book krne k liye sabi ticket online kr dena cahiye jis se dalali ko katam kr sakte hai

aadil khan lucknow

Dec 06, 2012

Reservation karate vaqt bhut preshani hoti h kabhi,ajend k karan,kabhi employ ke karan.Is preshani se hm logon ko bhut dikkat hoti hai.Ab id jo compulsory kia hai ye tarika kuch thik h agar ye railway wale sahi se lagu kare to dalalo se chutkara milegi

NOORUL QAMAR ALLAHABAD

Dec 05, 2012

सवाल तो बहुत सुन्दर ह पर जवाब बहुत कठिन ह मुझे आज तक ये बात समझ मे नही आई की जब हम रिज़र्वेशन करवाते ह तो एक महीने तक वेटिंग लिस्ट आती ह ओर दलाल एक दो दीन मे कनफ्रॉम टिकेट दे देता ह विदाउट तत्काल टिकेट कनफ्रॉम देता ह अगर किसी के पास मेरा जवाब हो तो जरूर देना धन्यवाद !

Madhu Sudan Sharma Mawata, jhunjhunu Raj.

Dec 05, 2012

Hamari rai hai ki ticat rijervaition ki abdhi kam kiya jay our ticat unhi logo ko diya jay jiske pass khud ka id ho aur famalye rilation ho nam our id contar per jarruri hai our tatkal ticat self ho sabse bdhiya hoga .

atal bihari goswami munger jamal pur

Dec 04, 2012

रेलवे से दलालों को हटाना चाहिए तभी टिकेट मिल पाएगा

Nar India

Dec 03, 2012

रेलवे अपनी वेब साइट को सरल बनाए जिससे कस्टमर की प्राब्लम लगभग 50 % सॉल्व होगी और रेलवे मेंबर कार्ड भी इश्यू करे भले ही उसका शुल्क ले और कार्ड मेंबर को न्यू रेलवे साईटे बनाकर स्पीड इनक्रीस करे.

navin maheshwari HARDA

Dec 03, 2012

Jitna bhi aap kar lijiye ya kahe to governent kar le...........Iska result zero hi aayega............Ticket ki kalabazari kabhi band nahi hogi.........Aaj tak railway ne kisi prakar ki suidha nahi di.....

Anoop mumbai

Dec 03, 2012

सबसे बड़ी परेशानी तो ये है की रेलवे की वेवसिते ही प्रॉपर वर्क नही करती हैं

nishant yadav ghaziabad

Dec 03, 2012

अजमेर से नागपुर के लिए सीधी ट्रेन कब चलेगी ज़्यादा . होती है

r r sadawarte ajmer

Dec 02, 2012

सबाल तो सही पूछ रहें है लेकिन जबाब के बाद कहीं न्यायालय का मूह न देखना पड़े. लंबी लंबी क़तारों से कैसे निजात मिले जब सिर्फ़ दलाल का ही भीड़ लगा रहे और एक बुजुर्ग टिकट के लिए घंटों लाइन मे लगा रहें ,टिकेट मिलना तो दूर भीड़ मे ही कोई पूछता है कहाँ जाना है और टिकेट का पैसा लेकर चंपत हो जाता है / बेचारा बुगुर्ग क्या करे उसकी टाँगें जबाब देने लगती है और मजबूरी मे पैसा ग़लत आदमी को थमा देता है / बुजुर्ग के लिए और असहाय के लिए अलग से लाइन लगे और प्राथमिकता दिया जाय . जो पुलिस यात्री की सुरक्चा मे लगाए जाते है वी ही पसेंजर को ट्रेन से बाहर फेक देता है ,टी टी पैसा लेकर सफ़र पूरा करा देता है तो फिर आय डि साथ रखने का क्या मतलब . क्या हर नागरिक के पास प्रूफ़ है ?

anil baddi

Dec 01, 2012

तिरुपति , गुंटूर , गुंटी , वाडी, रायचुर, गुलबर्गा , सोलापुर, बीजापुर, डौंड, आहमेदनगर, से राजस्थान जाने के लिए एक भी गाड़ी नही हे. सो दुख की बात हे.

ukhraj sola pur

Dec 01, 2012

सब कुछ किया हे उसके लिए धन्यवाद मगर सबसे बड़ा काम नही कर रही हे सरकार वो हे रेल की संख्या बढ़ानी चाहिए 5% . मगर सरकार ऐसा नही करती हे कारण तत्काल टिकिट की माँग कम हो जाएगी.. अपनी कमाई के लिए सरकार बहुत ही कम संख्या मे नई गाडिया दे रही हे. दूसरा ई टिकिट व सादी वेटिंग टिकिट मे फ़र्क क्यो रखा हे ? इसको समाप्त किया जा सकता हे मगर सरकार नही करती हे.

ukhraj sola pur

Dec 01, 2012

Root from delhi to guwahati one more train (rajdhani) extra required for minimum 3 or 4 days, because in rajdhani train ticket not avilabe after a sum time. Broker charges high rate for tatkal, so we request that one more train required for this root.

Satish Shillong

Dec 01, 2012

मे सिर्फ़ इतना स्रकरार ट्रेन को दिल्ली से बिहार तक यानी दरभंगा तक कुछ और दे

BIKASH NEW DELHI

Dec 01, 2012

सुबह 10 से 10.30 तक ऑनलाइनतत्कालआत टिकेट बुकिंग के समय कभी टिकेट बुकिंग नहीं हो पाती है. अधिकतर सर्विसनॉट अवेलबल का मेसेज आता है. एजेंट आसानी से तत्काल टिकट मनमाने दाम पर उपलब्‍ध करवा देता है. तत्काल टिकट अब दलाल टिकेट हो गया है. ऐसा लगता है यह सब स्टाफ के मेल से धारल्ले से चल रहा है.

dilip patna

Dec 01, 2012

दलाल का बत्टा सॉफ कर दे क्योंकि सब से बड़ा मसला टिकेट की है जिसका कारण दलाल हैबाकी सब छोटी छोटी प्रॉब्लमे है वैसे भी बड़ी बड़ी देशो मे छोटी छोटी बाते होती रहती है

irfan asad rafiganj

Dec 01, 2012

रेलवे की बुकिंग विंडो पर टिकेट दलाल का कब्जा होता हैं जो सुबह से ही विंडो बुक कर लेते हैं जिनका साथ रेलवे के करंचारी पैसा ले कर साथ देते है जिससे टिकेट नही मिल पता.और लाइन मैं अभूत टाइम खराब भी होता हैं .बाद मे पता चलता हा की टिकट ख़त्म हो गया है.ये शही हुआ की अड़ी प्रूप कमपल्सारी करने से तोड़ा क्रेप्सन केयेम होगा .

Narendra Kumar Singh Bindki - Fatehapur (Utter Pradesh)

Dec 01, 2012

मेरे कई दोस्त ट्रेन मैं सफ़र करते रहते है उनको हर बार टिकेट खरीदने मैं एक परेशानी हर बार आती है वो है टिकेट के लिए पैसो की सरकार को इसके बारे मैं कुछ सोचना चाहिए!धन्यवाद

Vikas Noida

Dec 01, 2012

रेलवे ने जो पहचान पत्र ज़रूरी किया है वो तो ठीक है लेकिन वो अभी फिलहाल 1-2 साल तक के लिए सिर्फ़ स्लीपर मे ही करना चाहिए था. लेकिन रेलवे ने स्लीपर और जनरल दोनो मे कर दिया है, जो की ठीक नही है, क्योंकि इंडिया मे अभी भी बहुत आदमी के पास पहचान पात्रा नही है. ऐसे मे तो आदमी रेल डब्बे मे घुस ही नही सकता. फिर वो यातारा कैसे करनेगे.इसीलिए मेरा मानना है की अभी स्लीपर मे ही पहचान पात्रा ज़रूरी करना चाहिए था.

Kailash Rai Delhi

Dec 01, 2012

बस ये कहेना च्चता हू की भारतीय रेल समय से चले | समय से ना चलने की व्जह से बहुत परेशानी होती है| पता नही गोवेर्नमेंट को समय की वॅल्यू कब पता चलेगी|धन्यवाद

Nitin Kumar Gupta Kanpur

Dec 01, 2012

रेलवे की बुकिंग विंडो पेर टिकेट दलाल का कब्जा होता हैं जो सुबह से ही विंडो बुक कर लेते हैं जिनका साथ रेलवे की करंचारी भी देते हैं जिससे टिकेट नही मिल पता. और लाइन मैं अभूत टाइम खराब भी होता हैं.

sachin haridwar

Dec 01, 2012

जब भी मैं तत्काल का टिकेट ऑनलाइन बुक करने जाता हू तो साइट डेढ़ घंटे के लिए रुक जाती है आप अंदर नही जा सकते और जब जा सकते हो तो पूरी टिकेट ख़त्म हो जाती है. मैने फास्ट और स्लो स्पीड दोन्हो से ओपन करके देखी है वेबसाइट. दूसरी बात जिस स्लीपर से आप जाते हो उसमे डेली रूटीन करनेवाले पास धारक भी अपनी जगह ले लेते है तो काफ़ी दूर तक भीड़ रहेती है. खाना खाने मे दिक्क्त होती है. कोई चेकिंग नही होती. और एक यात्री की समान सीमा तय होनी चाहिए ताकि दूसरे लोगो को भी समान रखनेके लिए जगह होनी चाहिए. मैने देखा है यात्री एक और समान दस होते है. ना उन्हे चार्ज किया जाता है ना वॉर्न किया जाता है. प्लॅटफॉर्म पे सब चीज़े नियमित कीमतो से ज़्यादा ली जाती है और जब उन्हे कम्प्लेट का दर दिखाया जाता है तो तुरंत नियमित कीमत पे दे देते है. चाहे पानी की बॉटल हो या कुरकुरे का पॅकेट.

milind hyderabad

Dec 01, 2012

शायद ही कोई ना बोले, मेरी राय मे सभी का जबाब हाँ ही होगा | किस तरह का - हर बार एक नयी परेशानी रहती है अब देखना ये है इन परेशानियो मे ज़्यादा किस प्रकार की परेशानी होती है, वो है दलालो की फौज का | ये कतार मे खुद रहते है और दस को खड़ा किए रहते है, दूसरे का पहचान पत्र लेकर ( सब मिले रहते है... ये ना पूछिएगा कौन ) | लगभग सारे खिड़की पर इन्ही के पहले नंबर रहते है, और सुबह जिनके पहचान पत्र है वो आएँगे और इनकी जगह वो हो जाते है और आराम से टिकेट ले के चले जाते है | इस तरह की बुराई को कैसे रोकना है रेलवे को सोचना चाहिए... ( ऐसा नही की रोका नही जा सकता, और ये भी नही की सब जानते नही...... सब मे ईक्च्छाशक्ति की कमी है.. जब तक रहेगा परेशानी होती रहेगी ).....

Sanad Upadhyay Mumbai


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