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चीन में अमेरिकी ओलंपिक टीम के कपड़े बने, बवाल मचा

Updated Jul 19, 2012 at 17:01 pm IST |

 

19 जुलाई 2012
वार्ता

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वॉशिंगटन।
ब्रिटेन की राजधानी लंदन में होने जा रहे ओलंपिक खेलों में शिकरत करने पहुंचे अमेरिकी खिलाड़ियों के चीन में बने कपडों को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।

अमेरिका में सत्तारुढ़ और विपक्षी दल दोनों इसका मिलकर विरोध कर रहे हैं। सीनेट के वरिष्ठ नेता हैरी रीड ने इस मसले पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए यहां तक कह डाला कि इन कपड़ों की सामूहिक होली जला देनी चाहिए। इसके बाद चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहा कि अमेरिकी नेता की यह टिप्पणी उनकी दकियानूसी सोच और अमेरिकी पाखंड की परिचायक है। यदि कुछ जलाना ही है तो इस सोच और पाखंड में पलीता लगाना चाहिए।

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चीन के मुताबिक अमेरिका खेल के मैदान में भी राजनीति करने से बाज नहीं आ रहा है। ओलंपिक की भावना वैश्विक एकजुटता और सद्भाव की प्रतीक है तथा इसका राजनीति से कोई लेना देना नहीं है। ऐसे में परिधानों का विवाद खड़ा करके अमेरिकी राजनीतिज्ञ अपनी संकीर्ण राष्ट्रवादी सोच और नासमझी को दर्शा रहे हैं।

चीन से बनकर आए इन लाल, नीले और सफेद रंगों वाले परिधानों को अमेरिकी खिलाड़ी ओलंपिक खेलों के उद्घाटन और समापन समारोह में पहनेंगे। ये कपड़े अमेरिका की जानी मानी कंपनी राल्फ लारेन की चीन इकाई से तैयार होकर आए हैं। कपड़ों पर लगे मेड इन चाइना के टैग को देखकर अमेरिकी नेता बेहद गुस्से में हैं।

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रीड ने गत सप्ताह इस बात पर कड़ा विरोध जताया था कि ऐसे समय जबकि अमेरिकी अर्थव्यवस्था मंदी से उबरने की कोशिश में है और घरेलू उद्योग को बढ़ावा दिये जाने की दरकरार है तो किसी बाहरी मुल्क से कपड़ों को तैयार कराने की क्या जरूरत है। उन्होंने अमेरिकी ओलंपिक समिति को भी फटकार लगाकर कहा था कि समिति को अपने इस फैसले पर शर्म आनी चाहिए और उसे चीन से बने परिधानों पर अपनी सहमति नहीं देनी चाहिए थी। अमेरिका की जानी मानी फैशन डिजाइनर नोनोटे लियापोरे ने कहा कि अमेरिका में ये परिधान बिना किसी परेशानी के बेहद सस्ते में बन सकते थे।

ओलंपिक समिति ने कपड़ों को लेकर मची इस हाय तौबा के बीच अपना बचाव करते हुए कहा है कि अब बहुत देर हो चुकी है। खिलाड़ी लंदन पहुंच चुके हैं और एक आध दिन के भीतर उन्हें ये कपड़े वितरित कर दिए जाएंगे। ऐसे में अब इन परिधानों को बदलने का समय नहीं है।

समिति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्कॉट ब्लैकमन ने कहा, वैसे भी अमेरिकी खिलाड़ियों का दल सरकार की ओर से नहीं बल्कि निजी कंपनियों की ओर से प्रायोजित है ऐसे में राल्फ लारेन जैसी प्रायोजक कंपनियों से जुड़ने में हम गर्व महसूस करते हैं। इससे क्या फर्क पड़ता है कि कंपनी खिलाड़ियों के कपड़े कहां से बनवाकर लायी है।

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इस विवाद ने इसलिए भी ज्यादा तूल पकड़ा है क्योंकि अमेरिका में इस समय राष्ट्रपति चुनाव नजदीक है और कोई भी दल एक-दूसरे को नीचा दिखाने का मौका चूकना नहीं चाहता, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि राष्ट्रपति पद के लिए रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार मिट रोमनी इस मसले पर सरकार की आलोचना करने के बजाए चुप्पी साधे हुए हैं। श्री रोमनी के वर्ष 2002 में साल्ट लेक सिटी के गवर्नर रहने के दौरान आयोजित शीतकालीन ओलंपिक खेलों में अमेरिकी दल के ध्वजवाहक खिलाड़ी का परिधान म्यांमार से बनकर आया था। उस समय वहां सैनिक शासन होने के नाते अमेरिका के कयी मानवाधिकार संगठनों ने इसका जमकर विरोध किया था।

रोमनी साल्टलेक शीतकालीन ओलंपिक खेल समिति के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी रहे थे। ऐसे में वह ओबामा का विरोध करके डेमोक्रेट समर्थकों को गड़े मुर्दे उखाड़ने का मौका नहीं देना चाह रहे हैं।

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इस विवाद की एक दूसरी तस्वीर अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़ी है। अमेरिका में श्रम महंगा होने के कारण विनिर्माण उद्योग में मुनाफे की गुंजाइश हमेशा कम रही है लिहाजा परिधान बनाने वाली ज्यादातर कंपनियां दशकों पहले यहां से अपनी विनिर्माण इकाइयों को सस्ते श्रम के देश चीन स्थानांतरित कर चुकी है। इस क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि कपड़ों को तैयार करने में नहीं बल्कि उनकी डिजाइनिंग मार्केटिंग और विज्ञापन में ज्यादा कमायी है। ऐसे मे राल्फ लारेन जैसी कंपनियां भी चीन समेत दुनिया भर के देशों से उत्पादों की आउटसोर्सिंग करने लगी है।

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