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कुक और भारतीय क्रिकेट के नाटकीय रिश्तों की पूरी कहानी

Updated Dec 08, 2012 at 14:47 pm IST |

 

08 दिसंबर 2012
Hindi.in.com

कोलकाता।
बात साल 2005-06 की है जब इंगलैंड टीम भारत का दौरा करने आयी। बोर्ड एकादश के खिलाफ खेले गए एक वार्म अप मैच के दौरान इंगलैंड के सबसे अनुभवी सलामी बल्लेबाज़ मार्कस ट्ररेस्कोथिक चोटिल हो गए। उन्हें टेस्ट सीरिज़ से बाहर होना पड़ा। ट्रेस्कोथिक जैसे आला दर्जे के बल्लेबाज की जगह कौन भरेगा इस पर विचार हुआ। आखिरी समय में इंगलैंड से 21 वर्षीय एलिस्टर कुक को टीम में इंगलैंड से भारत बुलाया गया। 

कप्तान एंड्रयू फ्लिंटॉफ की कप्तानी में खेल रही टीम में उस वक्त कई प्रमुख नाम गायब थे। ट्रेस्कोथिक के अलावा मध्य क्रम बल्लेबाज माइकल वॉन भी इस सीरिज में भारतीय टीम में नहीं थे। तेज़ गेंदबाज साइमन जोन्स  और बांए हाथ के स्पिनर एशले जाईल्स भी इस श्रंखला में नहीं खेल रहे थे। एशले जाईल्स की जगह टीम में मोंटी पनेसर को शामिल किया गया था।

वहीं भारतीय टीम की तरफ से भी इस सीरिज में कई नए चहरे थे। शांताकुमारन श्रीसांत, मुनफ पटेल, पीयूष चावला। नागपुर में खेले जाने वाले इस टेस्ट में इंगलैंड ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करी। सलामी बल्लेबाज़ के तौर पर इंगलिश टीम की तरफ से उतरे एलिस्टर कुक ने पहले मैच में ही गजब की परिपक्वता दिखायी। पहले मैच की पारी में ही उन्होंने 60 रनों की पारी खेली।

मैदान पर उतरने के बाद उन्होने रन बनाने की जल्दी नहीं की। उन्होने पिच पर काफी समय गुज़ारा जिसके बाद उनका बल्ला खुलना चालु हूआ। सही गेंद को सम्मान और बुरी गेंद को नसीहत देकर कुक ने अपने टेस्ट करियर की पहली पारी में ही अर्धशतक बना लिया।
वह 60 रन के निजी स्कोर पर आउट हो गए।

इंगलैंड ने अपनी पहली पारी में 393 रनों का स्कोर बनाया। राहुल द्रविड़ और मोय कैफ की पारी के बदौलत भारत बमुशकिल 323 रनों तक पहुंच पाया। दूसरी पारी में कुक ठान कर आए थे कि पहली पारी की गलती नहीं दोहराएंगे और अपने पहले टेस्ट में शतक लगाएंगे। कुक की यह पारी धीमी जरुर रही पर इंगलैंड की टीम को रनों की जरुरत थी जो कुक ने पूर कर दी । दुसरी पारी में कुक ने नाबाद 104 रनों की पारी 243 गेंदो पर खेली। अपने पहले टेस्ट में कुक ने शतक जड़ कर अपने चयन को सही साबित कर दिया।

कुक की इस पारी की बदौलत इंगलैंड ने भारत के सामने 368 रनों की चुनौती रख दी। हालांकि आखिरी दिन भारत ने 6  विकेट के नुकसान पर 260 रन बनाकर मैच ड्रा करवा लिया। इसी सीरिज़ के तीसरे टेस्ट के चयन के पहले एलिस्टर कुक ने पेट में दर्द की शिकायत की। जिसके कारण उन्हें आखिरी टेस्ट में टीम से बाहर बैठना पड़ा और उनकी जगह ओविस शाह ने ली।

1-1 की बराबरी पर खत्म हुई इस सीरिज़ में किसी क्रिकेटर ने सोचा भी न था कि इतने कम समय में एलिस्टर कुक सलामी बल्लेबाज़ बन जाएंगे और इसी के कुछ साल बाद इंगलिश टीम की कप्तानी भी करेंगे।

 कोहली चुस्त, कुक सुस्त, चूके दोहरा शतक

 

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पाठकों की राय | 08 Dec 2012


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