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..हो गया पोंटिंग युग का अंत

Updated Dec 03, 2012 at 15:01 pm IST |

 

03 दिसंबर 2012
वार्ता

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पर्थ।
ऑस्ट्रेलिया के महान क्रिकेटरों में से एक और पूर्व कप्तान रिकी पोंटिग ने अपने 17 वर्ष के शानदार और अविश्वसनीय क्रिकेट करियर पर विराम लगाते हुए दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पर्थ में अपना अंतिम टेस्ट खेलकर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया।

ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेट इतिहास में सर डॉन ब्रैडमैन के बाद दूसरे सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज माने जाने वाले और 168 टेस्टों में 13378 रनों के साथ टेस्ट इतिहास के सर्वाधिक रन बनाने वाले दूसरे बल्लेबाज पोंटिंग ने हाल ही में बड़े भावुक शब्दों में एक संवाददाता सम्मेलन में अपने संन्यास की घोषणा की थी।

पोंटिंग पर्थ में जब अपने करियर का अंतिम मैच खेलने के लिए मैदान पर उतरे तो विपक्षी टीम के खिलाड़ियों ने भी उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित किया। इसके बाद मैदान में बैठे सभी लोगों ने पोंटिंग के लिए तालियां बजाई और उनके प्रति अपना प्यार प्रकट किया।

अपने आखिरी मैच मे महज आठ रन बनाकर आउट होने के बावजूद पोंटिंग के चेहरे पर संतोषजनक मुस्कान दिखाई दे रही थी और मैदान से जाते समय आखिरी बार उन्होंने अपना बल्ला उठाकर स्टेडियम में बैठे लोगों के प्रति उन्होंने अपना आभार प्रकट किया।

17 वर्ष के अपने शानदार करियर में ऑस्ट्रेलिया को 2003 और 2007 में एकदिवसीय विश्व चैंपियन बनाने वाले पोंटिंग ने संन्यास की घोषणा करते हुए कहा था कि पर्थ उनका आखिरी टेस्ट होगा। उन्होंने कहा था कि इस फ्सैले पर उन्होंने लंबे समय तक विचार मंथन किया और सीरीज में अब तक के अपने प्रदर्शन को देखते हुए ही इस पर मुहर लगाई।

दुनिया के धुरंधर बल्लेबाजों में शुमार और सफलतम कप्तानों में से एक पोंटिंग लगातार अपने खराब प्रदर्शन के कारण आलोचकों के निशाने पर आ गए थे। पोंटिंग ने इस सीरीज में अपनी पारियों में 0, 4, 16 और 8 के स्कोर बनाए। लंबे समय से ऑउट ऑफ फॉर्म रहने के कारण उनपर संन्यास का फ्सैला लेने के दबाव बढ़ता जा रहा था।

पिछले वर्ष फरवरी में एकदिवसीय क्रिकेट को अलविदा कहने वाले पोंटिंग यह पहले ही कह चुके हैं कि उनका यह फैसला चयनकर्ताओं से प्रभावित नहीं है। उन्होंने कहा था, मैंने महसूस कर लिया था कि मैं अब उस स्थिति में नहीं हूं कि मैं अगले वर्ष आखिरी बार एशेज सीरीज में खेलने उतर सकूं। पोंटिंग ने यह भी कहा था कि वह पर्थ टेस्ट के समाप्त होने के बाद अपने करियर का अवलोकन करेंगे। इस टेस्ट में उतरने के साथ ही पोंटिंग ने ऑस्ट्रेलिया की ओर से स्टीव वा के सर्वाधिक 168 टेस्ट खेलने के रिकार्ड की भी बराबरी कर ली।

पोंटिंग ने अपना टेस्ट करियर 20 वर्ष की उम्र में वाका में श्रीलंका के खिलाफ शुरू किया था जिसमें उन्होंने 96 रन बनाए थे और ऑस्ट्रेलिया ने यह टेस्ट एक पारी और 36 रन से जीता था। यह एक संयोग ही है कि पूर्व कप्तान ने पर्थ से ही अपने टेस्ट करियर की शुरूआत की थी और वह यहीं अपना आखिरी टेस्ट खेलकर अपने क्रिकेट करियर पर विराम भी लगा रहे हैं।

आखिरी टेस्ट में पोंटिंग का बल्ला खामोश

 

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पाठकों की राय | 03 Dec 2012


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