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लक्ष्मण का संन्यास, कलात्मक बल्लेबाजी का युग समाप्त

Updated Aug 18, 2012 at 17:05 pm IST |

 

18 अगस्त 2012
वार्ता

हैदराबाद।
भारतीय क्रिकेट के संकटमोचक और सबसे स्टाइलिश बल्लेबाज वी.वी.एस लक्ष्मण ने सभी को चौंकाते हुए तत्काल प्रभाव से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा कर दी और इसके साथ ही कलात्मक बल्लेबाजी का एक युग समाप्त हो गया।

'वेरी वेरी स्पेशल' के नाम से मशहूर और टीम इंडिया को संकट से उबारने में कई यादगार पारियां खेलने वाले लक्ष्मण ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में अपने संन्यास के चौंकाने वाले फैसले की घोषणा करते हुए कहा, मैं पिछले चार-पांच दिन से अंतरद्वंद्व से गुजर रहा था कि मुझे क्या करना चाहिए। मेरे माता-पिता ने मुझसे कहा कि जो तुम्हारी अंतररात्मा कहे वही करो।

लक्ष्मण ने कहा, मैंने सुबह ही भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के अध्यक्ष और चयनसमिति को अपने फैसले की जानकारी दी और उनसे कहा कि वे मेरे फैसले को मंजूर करें। मैंने अपने सभी साथी खिलाड़ियों से भी बातचीत की और महसूस किया कि वे सभी मुझे कितना चाहते हैं।

हैदराबाद के लक्ष्मण ने कहा, मेरे लिए पिछले तीन-चार दिन जिंदगी के सबसे मुश्किल दिन रहे। मेरे लिए यह बेहद भावुक क्षण है। मुझे सुबह से ही प्रशंसकों से मैसेज मिल रहे थे। वे मुझसे अनुरोध कर रहे थे कि मैं अभी संन्यास का फैसला नहीं करूं, लेकिन मैं अंतररात्मा की आवाज पर फैसला कर चुका था कि अब बहुत हो चुका। लेकिन मैं साथ ही उम्मीद करता हूं कि भारतीय क्रिकेट यहां से आगे बढ़ेगी और फिर से बुलंदियों पर पहुंचेगी।

भारत के लिए कई यादगार पारियां खेलने वाले लक्ष्मण ने अपना करियर 1996 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ शुरू किया था1 उन्होंने 134 टेस्टों में 8781 रन बनाए जिनमें 17 शतक और 56 अर्धशतक शामिल हैं। लक्ष्मण ने 86 एकदिवसीय में छह शतकों के साथ 2338 रन भी बनाए।

लक्ष्मण ने कहा, पिछले चार-पांच दिन मेरे लिए बहुत कठिन थे। लेकिन मुझे खुशी है कि अंततः सही फैसला किया। मैंने जब इस बारे में चयनकर्ताओं से बात की तो वे चौंक गए। मैंने चयनसमिति के अध्यक्ष कृष्णामाचारी श्रीकांत को बमुश्किल इसके लिए मनाया। बहुत नानुकुर के बाद आखिर वह मेरे फैसले से सहमत हो गए। पहले यह माना जा रहा था कि लक्ष्मण न्यूजीलैंड के खिलाफ दो टेस्टों की सीरीज के बाद संन्यास लेंगे, लेकिन फिर यह बात सामने आयी कि वह न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टेस्ट के बाद संन्यास लेंगे, लेकिन 'वेरी वेरी स्टाइलिश' लक्ष्मण ने सबको हैरत में डालते हुए पहला टेस्ट शुरू होने से पांच दिन पूर्व की संन्यास की घोषणा कर दी।

इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया दौरों में भारत की टेस्ट शृंखला में 0-4 की शर्मनाक पराजय के बाद सीनियर बल्लेबाजों पर उंगलियां उठायी जा रही थी। ऑस्ट्रेलिया दौरा समाप्त होने के बाद लक्ष्मण ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहा और अब लक्ष्मण भी खेल से अलविदा हो गए। लक्ष्मण के संन्यास के साथ भारत की कलात्मक बल्लेबाजी का एक युग समाप्त हो गया।

इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया दौरों के बारे में लक्ष्मण ने कहा, मैं मानता हूं कि इन दोनों दौरों में टीम ने बेहद खराब प्रदर्शन किया था। लेकिन हमें यह भी स्वीकार करना चाहिए कि यह सब खेल का हिस्सा है। लक्ष्मण ने इन दोनों ही सीरीज में अपनी प्रतिष्ठा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं किया था। इंग्लैंड में उनका औसत 22.75 और ऑस्ट्रेलिया में 19.38 रहा था।

लक्ष्मण ने साथ ही कहा, ऐसा प्रदर्शन खेल का ही हिस्सा है। हम इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में पहले भी अच्छा प्रदर्शन कर चुके थे और मैं उम्मीद करता हूं कि हम भविष्य में भी इन देशों में अच्छा प्रदर्शन करेंगे। मैं इसके लिए टीम इंडिया को शुभकामनाएं देता हूं। भविष्य की योजनाओं के बारे मे पूछने पर उन्होंने कहा, मुझे पता नहीं कि मैं भविष्य में क्या करूंगा। मैंने न्यूजीलैंड सीरीज से पहले संन्यास लेने की कल्पना भी नहीं की थी। सब कुछ अचानक हो गया। लक्ष्मण के संन्यास की घोषणा करने के फैसले के पीछे भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की तरफ से आ रही उन रिपोर्टों को जिम्मेदार माना जा रहा है जिनमें यह कहा गया था कि लक्ष्मण को इस सीरीज के लिए विदाई देने के तौर पर चुना गया है।

कलात्मक बल्लेबाजी के पर्याय माने जाने वाले लक्ष्मण ने अपना टेस्ट करियर 1996 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू सीरीज से शुरू किया था, लेकिन वह सबसे ज्यादा चर्चा में 2000 में सिडनी टेस्ट में आए जब उन्होंने अपने पसंदीदा शिकार ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 167 रन की लाजवाब पारी खेली।

लक्ष्मण ने अपने करियर का सर्वोच्च प्रदर्शन 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ही कोलकाता के ईडन गार्डेन में 281 रन की ऐतिहासिक पारी खेलकर किया। यह उस समय किसी भारतीय बल्लेबाज का सर्वश्रेष्ठ स्कोर था और विजडन ने इसे टेस्ट क्रिकेट में इसे छठी सर्वश्रेष्ठ पारी के तौर पर चुना था। लक्ष्मण की इस पारी और राहुल द्रविड़ के साथ उनकी रिकॉर्ड साझेदारी की बदौलत भारत ने आस्ट्रेलिया का 16 मैचों से चला आ रहा विजयरथ रोक दिया था।

लक्ष्मण ने अपना आखिरी एकदिवसीय 2006 में खेला था। उनका 100वां टेस्ट 2008 में नागपुर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ था। लक्ष्मण ने अपने 17 टेस्ट शतकों में से छह तो ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ही बनाए थे। लक्ष्मण का टेस्ट औसत 45.97 रहा। उन्होंने 17 शतकों के अलावा 56 अर्धशतक भी लगाए।

लक्ष्मण को भारतीय टीम में सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और सौरभ गांगुली की मौजूदगी में कभी वह स्टारडम नहीं मिला जिसके वह हकदार थे, लेकिन संकट के मौकों पर जब दिग्गज विफल हो जाते थे तब लक्ष्मण क्रीज पर ऐसी लक्ष्मण रेखा खींचकर अड़ जाते थे कि विपक्षी गेंदबाजों के लिए उनसे पार पाना मुश्किल हो जाता था। इसलिए उन्हें भारतीय टीम का संकटमोचक कहा जाता था।

 

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