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योगेश्वर: मेडल के लिए मेहनत नहीं, ‘तपस्या’ की

Updated Aug 16, 2012 at 13:46 pm IST |

 

16 अगस्त 2012
वार्ता

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नयी दिल्ली। लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर अपने जीवन का सबसे बड़ा सपना पूरा कर चुके फ्रीस्टाइल पहलवान योगेश्वर दत्त ने कहा कि इस पदक के लिए उन्होंने चार साल तक तपस्या की थी।

योगेश्वर ने कल यहां प्रेस कांफ्रेंस में कहा, 'मैं इस बार कोई मौका नहीं छोड़ना चाहता था। मैं प्री क्वार्टर फाइनल चार बार के विश्व चैम्पियन रूसी पहलवान से हारा। इसी मुकाबले में मेरी आंख में चोट भी लगी। लेकिन जब मैं रेपेचेज में उतरा तो मुझे लगा कि अब सब कुछ झोंकना होगा क्योंकि यहां से अब मैं चार साल तक इंतजार नहीं करना चाहता था। आखिर मेरी पदक की भूख पूरी हो गई।

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हरियाणा के सोनीपत जिले के बैंसवाल गांव के 60 किग्रा. वर्ग के पहलवान ने कहा, 'एक समय घुटने की चोट के कारण तो मुझे लगने लगा था कि मेरा करियर ही खत्म हो जाएगा। लेकिन मैं शुक्रगुजार हूं मित्तल चैम्पियन ट्रस्ट का जिन्होंने मेरी सर्जरी का सारा खर्चा उठाया। रिहेबिलिटेशन से लेकर ट्रेनिंग तक मेरी हर तरह से मदद की। मित्तल की बदौलत ही मैं आज आपके सामने पदक के साथ खड़ा हूं।

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