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ऑफिस में काम में लचीलेपन से सुधरेगा स्वास्थ्य

Published on Jan 27, 2015 at 08:41
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न्यूयॉर्क। वर्तमान में कामगारों के बीच नींद की कमी बड़ी समस्या बनकर उभरी है। शोधकर्ताओं के अनुसार, कार्यस्थल संस्कृति को थोड़ा लोचदार बनाकर न केवल कर्मचारियों को नींद की कमी से उबारा जा सकता है, बल्कि इससे उनके स्वास्थ्य में भी सुधार होगा। पेंसिलवानिया स्टेट यूनिवर्सिटी में बायोविहेवियरल हेल्थ के एसोसिएट प्रोफेसर ऑरफ्यू एम.बॉक्सटन ने कहा कि पर्याप्त नींद की कमी के कारण हम काम के प्रति चौकस नहीं रह पाते। इससे न सिर्फ हम सूचनाओं को धीरे-धीरे ग्रहण कर पाते हैं, बल्कि कभी-कभी कई तरह की गलतफहमियां पैदा होती हैं और फैसले लेने की हमारी क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

शोधकर्ताओं ने पाया कि जब लोगों के कार्य समय पर उनका खुद का नियंत्रण बढ़ता है, तो बढ़िया नींद के साथ-साथ उसकी समयावधि में भी बढ़ोतरी होती है। यह अध्ययन 474 कर्मचारियों पर किया किया, जिसमें से आधे का अपने काम पर खुद का नियंत्रण था, जबकि आधे लोग किसी और के हस्तक्षेप में काम कर रहे थे। पहले छह महीने और फिर एक साल के अध्ययन के बाद शोधकर्ताओं ने पाया कि जिनका अपने काम पर खुद का नियंत्रण था, उन्हें न सिर्फ अच्छी नींद आने लगी, बल्कि इसकी समयावधि भी बढ़ गई। इसका पूरा असर उनकी सेहत पर पड़ा।

लंबी उम्र तक है जीना, तो पेट के बल मत सोना

Published on Jan 23, 2015 at 13:23
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वॉशिंगटन| पेट के बल सोने वाले मिर्गी से ग्रस्त मरीजों में आकस्मिक मौत का खतरा अधिक है। यह शिशुओं की आकस्मिक मृत्यु के लक्षणों के समान है। यह बात एक शोध में सामने आई है। मिर्गी मस्तिष्क संबंधी बीमारी है, जिसमें मरीज को बार-बार दौरे पड़ते हैं। विश्व भर में लगभग पांच करोड़ लोग इससे पीड़ित हैं। इलिनोइस में शिकागो विश्वद्यिालय के जेम्स ताओ ने कहा कि अनियंत्रित मिर्गी में मौत का मुख्य कारण आकस्मिक मृत्यु है और आमतौर पर यह सोने के दौरान ही होती है।

इस शोध के लिए शोधकर्ताओं ने 25 अध्ययनों की समीक्षा की, जिसमें शामिल 253 आकस्मिक मृत्यु के मामलों में लोगों की शारीरिक स्थिति को दर्ज किया गया। इस अध्ययन में पाया गया कि पेट के बल सोने की स्थिति के मामलों में 73 प्रतिशत लोगों की मौत हो गई, जबकि 27 प्रतिशत लोगों के सोने की स्थिति अलग थी। शिशुओं के मामलों की तरह ही वयस्कों में अक्सर दौरे के बाद जागने की क्षमता नहीं होती। विशेष रूप से सामान्य दौरे में।

देखें: कैसें करें स्वाइन फ्लू से बचाव...

Published on Jan 23, 2015 at 12:14 | Updated Jan 23, 2015 at 14:02
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नई दिल्ली। स्वाइन फ्लू ने सारे देश में दहशत मचा रखी है, पूरे देशे में इसका कहर बढ़ता ही जा रहा है। वहीं देश के अलग अलग हिस्सों में ये अपने पैर पसार रहा है। लेकिन अगर आप इसके चंगुल से बचना चाहते हैं तो रखें इन बातों को ध्यान जो बचाएंगी आपकी जान। वीडियों में देखें।

स्किन कैंसर से बचना है तो, रोज पिएं 4 कप कॉफी

Published on Jan 22, 2015 at 13:40
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न्यूयॉर्क| कॉफी पीने वालों के लिए यह खबर सुकून भरी है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि रोजाना चार कप कॉफी का सेवन उन्हें त्वचा कैंसर से दूर रखता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि हालांकि यह परिणाम प्रारंभिक हैं, लेकिन जीवनशैली में थोड़ा बहुत बदलाव लाने से त्वचा कैंसर से खुद को सुरक्षित किया जा सकता है। यह निर्धारित करने के लिए कि कॉफी का सेवन व त्वचा कैंसर के बीच कोई संबंध है, यूएस नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट में कैंसर एपिडेमियोलॉजी एंड जेनेटिक्स विभाग की एरिका लॉफ्टफील्ड ने एनआईएच-एएआरपी डाइट एंड हेल्थ स्टडी के आंकड़ों का इस्तेमाल किया।

रोजाना कॉफी पीने वाले 447,357 लोगों की सूचनाएं ली गईं और लगातार 10 सालों तक उनपर नजर रखी गई। शुरुआती वक्त में किसी भी प्रतिभागी को कैंसर नहीं था। अध्ययन के दौरान देखा गया कि अधिक कॉफी पीने वाले लोगों में त्वचा कैंसर का जोखिम कम सामने आया। रोजना चार कप या इससे ज्यादा कॉफी पीने वाले लोगों में त्वचा कैंसर का जोखिम 20 फीसदी तक कम देखा गया।साथ ही, कॉफी सेवन की मात्रा एक कप से लेकर चार कप तक जैसे-जैसे बढ़ती गई, त्वचा कैंसर का जोखिम कम होता गया। यह अध्ययन पत्रिका 'नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट' में प्रकाशित हुआ है।

नींद में कमी बनाती है इंसान को नशे की आदी

Published on Jan 19, 2015 at 12:04
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वॉशिंगटन| नींद आने में कठिनाई और नींद के कम घंटे कई तरह की खास समस्याएं बढ़ा सकते हैं। इन समस्याओं में शराब पीने, जोखिम भरे यौन व्यवहार का आदी बन जाने का खतरा भी शामिल है। यह एक अध्ययन में सामने आया है। नींद की कमी और मादक पदार्थों के इस्तेमाल का चलन युवा पीढ़ी में भी पाया गया है।

इदाहो स्टेट विश्वविद्यालय में प्रायोगिक प्रशिक्षण में प्रॉफेसर और निदेशक मारिया एम वोंग ने कहा है कि सामान्य वयस्कों के बीच नींद आने में कठिनाई और अनिद्रा से यह सामने आया है कि वे एक साल बाद अल्कोहल का इस्तेमाल कर सकते हैं और उनमें 3-5 साल बाद अवैध मादक पदार्थों का बेतहाशा इस्तेमाल व निकोटिन पर निर्भर होने का खतरा बढ़ जाता है।

तेज दिमाग के लिए कम उम्र में सीखें दूसरी भाषा

Published on Jan 19, 2015 at 11:38 | Updated Jan 19, 2015 at 11:47
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लंदन। दस साल की उम्र के बाद दूसरी भाषा की पढ़ाई व्यक्ति में मस्तिष्क के विकास के लिए महत्वपूर्ण होता है। यह जानकारी एक अध्ययन से सामने आई है। यूनिवर्सिटी ऑफ केंट के स्कूल ऑफ साइकॉलॉजी के शोधकर्ताओं ने 30 साल की उम्र के 20 वैसे लोगों के मस्तिष्क स्कैन कर उसका विश्लेषण किया जो पिछले 13 महीनों से ब्रिटेन में रह रहे थे। इन लोगों ने 10 साल की उम्र में अंग्रेजी को दूसरी भाषा के रूप में पढ़ना शुरू किया था। विश्लेषण में 25 वैसे लोगों से उनकी तुलना की गई जो सिर्फ अंग्रेजी बोलते थे।

परिणाम यह देखने को मिला कि 10 साल की उम्र में अंग्रेजी पढ़ने वाले लोगों के मस्तिष्क के सफेद पदार्थ में सिर्फ अंग्रेजी बोलने वाले लोगों की अपेक्षा सुधार हुआ है। यह सफेद हिस्सा भाषा को सीखने और शब्दार्थ विज्ञान की प्रक्रिया के लिए जवाबदेह होता है।

अब नाइट शिफ्ट करने के बाद भी रहेंगे तरोताजा

Published on Jan 18, 2015 at 12:36 | Updated Jan 19, 2015 at 07:26
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मांट्रियल। कैसा रहेगा, जब एक दवा खाकर आप नाइट शिफ्ट करने के बाद भी तरोताजा महसूस करेंगे और दिनचर्या में बदलाव से होने वाले कैंसर सहित खतरनाक बीमारियों से दूर रह सकेंगे। हां, यह संभव है। ऑस्ट्रेलियाई शोधकर्ताओं के एक दल ने कहा है कि ग्लूकोकॉर्टिक्वाइड के टैबलेट की सहायता से ऐसा संभव हो सकता है। यह हॉर्मोन का एक प्रकार है, जिसका इस्तेमाल विभिन्न रोगों के इलाज में शक्तिशाली सूजन रोधी दवा के तौर पर किया जाता है।

डगलस मेंटल हेल्थ यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट में सेंटर फॉर स्टडी एंड ट्रीटमेंट ऑफ सर्काडियन रिद्म (शरीर में जैविक घड़ी) के निदेशक डिएन बी बोइविन ने कहा कि इस नई वैज्ञानिक खोज ने नवीन उपचारों का द्वार खोला है, जो सर्काडियन प्रणाली के विभिन्न भागों पर प्रभाव डालेगा, जिससे सोने के कार्यक्रम को अपने हिसाब से समायोजित करने में मदद मिलेगी।

पढ़ें: मधुमेह के बढ़ते खतरे से कैसे करें बचाव

Published on Jan 16, 2015 at 18:57 | Updated Jan 16, 2015 at 19:49
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डॉ सुनील एम. जैन

नई दिल्ली। भारत में जिस तेज गति से मधुमेह या डायबिटीज के रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है उसे देखते हुए अब जरूरत रोकथाम पर विशेष ध्यान देने की है। एक अनुमान के अनुसार लगभग 12 प्रतिशत आबादी को मधुमेह है। 2011 में आईसीएमआर द्वारा प्रायोजित सर्वे के अनुसार भारत में लगभग 6 करोड़ 20 लाख डायबिटीज रोगी हैं एवं 7 करोड़ 50 लाख लोगों को प्री-डायबिटीज है।

जेनेटिक भी हो सकती है तनाव की समस्या!

Published on Jan 12, 2015 at 12:24
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न्यूयॉर्क। एक ताजा अनुसंधान से पता चला है कि तनाव मोल लेने की समस्या वंशानुगत भी हो सकती है। अनुसंधान में उस गुणसूत्रीय जोड़े की पहचान कर ली गई है, जो मुश्किल हालात के बाद तनाव का खतरा बढ़ा देते हैं। इसका स्पष्ट आशय है कि पीढ़ियों से मिले ये गुणसूत्र हममें मानसिक अवसाद बढ़ाने की समस्या भी पिछली पीढ़ियों से ले आते हैं।

मस्तिष्क के कार्य में अहम भूमिका अदा करने वाले इन दोनों गुणसूत्रों को सीओएमटी और टीपीएच-2 नाम से जाना जाता है। शोध के मुख्य लेखक कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ता अर्मेन गोएनजियान ने कहा कि हमें शोध में तनाव बढ़ने की समस्या और सीओएमटी और टीपीएच-2 गुणसूत्रों के बीच महत्वपूर्ण संबंध का पता चला। ये गुणसूत्र ही इस मानसिक तनाव की बीमारी को लगातार बढ़ाए रखने के लिए जिम्मेदार है।

और खतरनाक हुआ डेंगू, छीनी आंखों की रोशनी

Published on Jan 11, 2015 at 21:25 | Updated Jan 11, 2015 at 22:01
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मुंबई। डेंगू का मच्छर अब और भी खतरनाक होता जा रहा है, अब डेंगू से लोगों की ऑखों की रोशनी भी जाने लगी है। मुंबई में ही डेंगू के चलते आंखों की रोशनी जाने के तीन मामले सामने आए हैं। डॉक्टर इनमें सिर्फ एक ही मरीज की आंखों की रोशनी बचाने में कामयाब हो सके। डेंगू के इस नए लक्षण से डॉक्टर भी हैरान है।

मुंबई में रहने वाले 24 साल विशाल नवाले की आंखों का इलाज चल रहा है। पिछले साल अक्टूबर में अचानक विशाल की आंखों की रोशनी चली गई थी। डॉक्टरों को भी समझ नहीं आया कि ऐसा क्यों हुआ। जब उसके खून की जांच कराई गई तो पता चला कि विशाल को डेंगू है। डॉक्टर समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर डेंगू का आंखों की रोशनी से क्या लेना-देना। आगे की जांच हुई तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि डेंगू का वायरस आंखों तक पहुंच गया था। आंख में वायरस पहुंचने के चलते विशाल को दिखाई देना बंद हो गया था।





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INews

फेसबुक पर दोस्त बनाना और सामाजिक दायरा बढ़ाना विद्यार्थियों को पढ़ाई में अच्छे अंक लाने में मददगार हो सकता है।
सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक ने अपनी मैसेंजर सेवा पर एक नया और काफी आकर्षक फीचर जोड़ा है। मैसेंजर पर उपयोगकर्ता अब वॉइस क्लिप (ऑडियो क्लिप) का भी आनंद उठा सकेंगे।
सोनाक्षी ने ग्रुप फोटो ट्विटर पर शेयर की और लिखा कि शुक्रिया नरेंद्र मोदी सर आपने मुझसे किया वादा निभाया। आपने हमारा ये दिन और खास बना दिया।
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इतिहास

भारतीय एवं विश्व इतिहास में 10 दिसंबर का अपना ही एक खास महत्व है। इस दिन कई ऐसी घटनाएं घटी जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज होकर रह गईं हैं।
भारतीय एवं विश्व इतिहास में 06 नवंबर का अपना ही एक खास महत्व है। इस दिन कई ऐसी घटनाएं घटी जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज होकर रह गईं हैं।
भारतीय एवं विश्व इतिहास में 5 नवंबर का अपना ही एक खास महत्व है। इस दिन कई ऐसी घटनाएं घटी जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज होकर रह गईं हैं।
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रिश्ते

अहंकारी और अक्खड़ किस्म के बॉस अक्सर हीन भावना का शिकार होते हैं और अपनी नाकामियों और अक्षमताओं को छुपाने के लिए अपने मातहत पर जानबूझकर दबाव बनाते हैं।
माताएं बातचीत के दौरान बेटे के बजाय बेटी से ज्यादा भावनात्मक रूप से घुली-मिली होती हैं और इस प्रक्रिया में लड़कों की अपेक्षा लड़कियां भावनात्मक रूप से ज्यादा बुद्धिमान होकर निखरती हैं।
एक रिसर्च में कहा गया है कि आधी रात में स्मार्टफोन का बार-बार इस्तेमाल करने की वजह से रिश्तों की गर्माहट खत्म हो रही है, जिसके नतीजे ब्रेकअप, फरेब और तलाक के रूप में सामने आ रहे हैं।
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गैजेट्स

वाट्सएप यूजर्स के लिए अच्छी खबर है। दरअसल अब फोन पर वाट्सएप इस्तेमाल करने वाले यूजर्स वेब ब्राउजर से भी वाट्सएप का इस्तेमाल कर सकते हैं।
माइक्रोमैक्स की नई पहल, नई स्मार्टफोन रेंज यू का पहला फोन यूरेका आज दोपहर 2 बजे से अमेजन पर बिकेगा।
अगर आप स्मार्टफोन उपयोग में लाते हैं तो सावधान हो जाइए। सरे विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों ने पता लगाया है कि आपके स्मार्टफोन का होम बटन बैक्टीरिया का घर हो सकता है।
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फैशन

इंडोनेशिया में आयोजित व‌र्ल्ड मुस्लिमा अवॉर्ड 2014 में रनर का खिताब हासिल करने वाली नाजरीन पर पूरे शहर को नाज है।
एक अध्ययन में सामने आया है कि साधारण तौर पर एक महिला हर सप्ताह 6.40 घंटे अपने रूप को संवारने के लिए खर्च करती है।
वेलेंटाइन डे यानी प्यार करने वालों का दिन। इस दिन पर आर्थिक सुस्ती और बढ़ती महंगाई का कोई असर नहीं पड़ने वाला है।
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ऑटो

भारतीय ऑटो इंडस्ट्री साल 2015 अपनी स्मूद राइड के लिए तैयार है। कुछ बाइकों और कारों के लॉन्च होने वाले मॉडल्स तय भी हैं। तस्वीरें देखें।
नए साल में कार और दुपहिया सहित सभी प्रकार के वाहन महंगे हो जाएंगे क्योंकि सरकार ऑटोमोबाइल उद्योग को उत्पाद शुल्क में दी गई छूट को आगे जारी रखने के मूड में नहीं है।
भारतीय ऑटो इंडस्ट्री साल 2015 अपनी स्मूद राइड के लिए तैयार है। कुछ बाइकों और कारों के लॉन्च होने वाले मॉडल्स तय भी हैं।
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