

अपर्णा पेनगट
Indiwo.com

नई दिल्ली। भारत ने डायरिया जैसी खतरनाक बीमारी से निपटने के लिए एक वैक्सीन तैयार कर ली है। 28 साल की मेहनत के बाद ये दवा डायरिया की देश में बनी पहली दवा होगी। सरकार ने इस रोटावेक वेक्सीन के तीसरे चरण का क्लिनिकल ट्रायल पूरा कर लिया है। इसके इस्तेमाल से डायरिया के मामलों में 56 फीसदी तक की कमी आने के आसार हैं।
डायरिया का सबसे ज्यादा असर 5 साल से कम उम्र के बच्चों पर होता है। और इस बीमारी से देश में हर साल करीब 1.5 लाख बच्चों की जान जाती है।

नई दिल्ली। मौजूदा दौर में जब महिलाओं और बच्चियों के सामूहिक बलात्कार और महिलाओं पर यौन हमलों, खुदकुशी और विभिन्न तरह की हिंसा की घटनाएं महामारी का रूप ले रही हैं। शोधर्कताओं और मनोचिकित्सकों का मानना है कि समाज विरोधी ऐसी घटनाओं में इजाफे के लिए फेसबुक जैसी सोशल नेटवर्किंग साइटों का भी हाथ है।
इस विषय पर किए गए अनेक अध्ययनों से पता चलता है कि इन साइटों पर अधिक समय व्यतीत करने से आत्ममुग्धता, अंहकार और समाज विरोधी व्यवहार विकसित होते हैं। मनोचिकित्सकों का कहना है कि सोशल नेटवर्किंग साइटों की लत के कारण किशोरों में एकाग्रता में कमी, अनिंद्रा, डिप्रेशन, बेचैनी और चिड़चिड़ापन की समस्याएं भी बढ़ रही हैं।

वाशिंगटन। वसायुक्त भोजन व्यक्ति की सतर्कता को प्रभावित कर सकता है। यह थकान पैदा कर सकता है। वैज्ञानिकों ने इसका खुलासा एक अध्ययन में किया है। नतीजों से पता चला है कि उच्च वसायुक्त भोजन लेने से दिन में नींद आती है, वहीं उच्च कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन में सतर्कता बढ़ाने की क्षमता है। प्रोटीन का नींद और सतर्कता से कोई जुड़ाव नहीं है।
पत्रिका 'साइंस डेली' ने कहा है कि ये नतीजे लिंग, उम्र, शरीर का मोटापन, नींद की कुल मात्रा और कैलोरी की खपत से स्वतंत्र हैं। अमेरिका के हर्शे में पेन्न स्टेट कॉलेज ऑफ मेडिसीन में मनोचिकित्सा विज्ञान की प्रोफेसर और मुख्य शोधकर्ता अलेक्जेंड्रोस वगोनटाज्स ने कहा कि वसा की खपत में बढ़ोतरी से सेहतमंद और गैर-मोटे लोगों की सतर्कता पर बहुत बुरा असर पड़ता है।

नई दिल्ली। भोर के समय आस-पास के पार्क पर नजर दौड़ाएं तो शायद आपको घेरे में खड़े कुछ पुरुष और महिलाएं बिना खास उद्देश्य के ठहाके लगाते दिख जाएंगे। दरअसल, यह तनाव भगाने का एक तरीका है जिसे 'लाफ्टर थेरेपी' कहा जा सकता है।
ऐसे लोगों की तादाद लगातार बढ़ रही है जो अपने तनाव को दूर करने के लिए 'लाफ्टर थेरेपी' का सहारा ले रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार, भारत में लाफ्टर थेरेपी का आगाज 1995 के आस-पास में हुआ और इस कड़ी में देश में अब तक 7,000 से ज्यादा लाफ्टर क्लब और इसके 10 हजार से ज्यादा सदस्य बन चुके हैं।

वॉशिंगटन। वेब आधारित कार्यक्रम वजन घटाने और वजन को चुस्त-दुरुस्त रखने के नए प्रभावी उपाय हैं। एक अध्ययन में यह बात उजागर हुई है। मोटापे से ग्रस्त लगभग 36 प्रतिशत अमेरिकी वजन कम करने के मुद्दे पर चर्चा करते हैं। कई ऐसी बाधाएं हैं जो वजन कम करने में रोड़ा बनती हैं।
किसी संस्थान या क्लीनिक में जाकर वजन घटाने के कार्यक्रमों में शामिल हो रहे लोगों के लिए यात्रा, काम और घर में जूझना, बच्चे की देखरेख की जरूरत और निजता के हनन जैसी कई बाधाएं हो सकती हैं।

जेरुशलम। इजरायल की एक जैव-प्रौद्योगिकी कंपनी ने शरीर के अतिरिक्त वसा को नई हड्डियों में बदलने का तरीका इजाद करने का दावा किया है। इसे क्षतिग्रस्त हड्डियों के ढांचे की जगह स्थापित किया जा सकेगा।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक नए नतीजों के साथ उत्तरी इजरायल के हैफा शहर स्थित बोनस जैवप्रौद्योगिकी समूह दुनियाभर में हड्डियों की कमजोरी (ऑस्टियोपोरोसिस), हड्डी में संक्रमण और दुर्घटना आदि के चलते हड़्डी से जुड़ी विभिन्न बीमारियों से पीड़ित लाखों लोगों की मदद करेगा।

लखनऊ। दवा के माध्यम से सेक्स क्षमता बढ़ाने का दावा करने वाली कंपनियों की मुश्किलें बढ़ सकती है क्योंकि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इस तरह की 21 कंपनियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया है।
पुलिस के अनुसार सेक्स क्षमता, मोटापा, सफेद दाग आदि विज्ञापन देने वालों पर थाना गोमतीनगर में रिपोर्ट दर्ज किया गया है। यह रिपोर्ट लखनऊ स्थित भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी डॉ नूतन ठाकुर के प्रार्थनापत्र पर पंजीकृत हुआ है।
लॉस एंजिल्स। एक नए अध्ययन में पाया गया है कि औसत रफ्तार से टहलना उच्च रक्त चाप, कोलेस्ट्रॉल और मधुमेह के खतरों को कम करने में उतना ही कारगर है, जितना कि तेज रफ्तार दौड़ना। अमेरिकन हर्ट एसोसिएशन की पत्रिका 'आर्टरियोस्क्लेरोसिस, थ्रोम्बोसिस एंड वैस्कुलर बायोलॉजी' में प्रकाशित इस अध्ययन के निष्कर्ष नेशनल रनर्स हेल्थ स्टडी के 33,060 धावकों और नेशनल वाकर्स हेल्थ स्टडी के 15,045 टहलने वालों पर किए गए विश्लेषण पर आधारित है।
'साइंस डेली' में प्रकाशित रपट के अनुसार, छह वर्षो तक किए गए इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया है कि औसत दर्जे की रफ्तार से टहलने और तेज रफ्तार दौड़ने में यदि समान ऊर्जा खर्च होती है तो ये दोनों गतिविधियां उच्च रक्त चाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल, मधुमेह, और दिल की बीमारी के खतरे कम करने में समान रूप से कारगर हैं।
नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिक अब एक ऐसा टीका बनाने में लगे हैं जिससे डेंगू की रोकथाम हो सकेगी। जो व्यक्ति यह टीका लगवा लेगा उसके शरीर में मच्छर डेंगू के वायरस नहीं छोड़ पाएंगे। ये ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिक 2012 में भारत की साझेदारी में काम करने के लिए दिल्ली आए थे। उस वक्त यहां सबसे अधिक 37,000 डेंगू के मामले सामने आए थे। इतने मामले देखकर इन वैज्ञानिकों ने डेंगू की रोकथाम के लिए टीका तैयार करने की योजना बनाई। इस योजना पर अभी काम चल रहा है।
ये वैज्ञानिक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'एलिमिनेट डेंगू रिसर्च प्रोग्राम' चला रहे हैं। यह लाभरहित कार्यक्रम ऑस्ट्रेलिया, वियतनाम, इंडोनेशिया, चीन, सिंगापुर, कोलंबिया और ब्राजील में चलाया जा रहा है। शोधकार्य में जुटे इन वैज्ञानिकों ने एक फल-मक्खी के शरीर से वोल्बाचिना बैक्टीरिया को निकालकार कुछ मच्छरों में प्रवेश कराया और पाया कि ये मच्छर मानव शरीर में डेंगू का वायरस छोड़ने में कामयाब नहीं हो पाए।






















