

नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर के हालात पर काबू पाने में नाकाम रही सरकार अब सशस्त्र बलों के हाथ बांधने की तैयारी में है। वो सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून में बदलाव करने का मन बना रही है। उसे लगता है कि इससे सड़कों पर उतरे लोगों का गुस्सा शांत हो सकेगा। जल्द ही होने वाली सीसीएस की बैठक में इस बाबत फैसला लिया जाएगा। सरकार एएफएसपीए यानी सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून की समीक्षा करेगी। इसके तहत राज्य के कुछ हिस्सों से इस कानून को हटाया जा सकता है जबकि कुछ हिस्सों में कानून में बदलाव करके उसे नरम बनाया जाना सरकार के एजेंडे में शामिल है।
सरकार के सामने सबसे बड़ा सवाल ये है कि इस तरह की कवायद से क्या सुरक्षा बलों का मनोबल टूटेगा नहीं जो पहले ही अलगाववादियों के निशाने पर हैं। afspa पर कोई अंतिम फैसला लेने से पहले प्रधानमंत्री कार्यालय सेना के उच्चाधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है। सूत्रों के मुताबिक श्रीनगर, बडगाम, गांदरबल, जम्मू, सांबा, कठुआ और रामबन इलाकों से इस कानून को हटाया जा सकता है। सरकार के रणनीतिकारों की राय है कि आतंकवाद का जोर इन इलाकों में काफी हद तक कम हुआ है। एजेंडे में ये भी है कि संदिग्धों की तलाशी के पहले सर्च वारंट लाया जाए। एक उच्चाधिकार प्राप्त शिकायत प्रकोष्ठ बनाया जाए जो सुरक्षा बलों की ज्यादती पर फैसला ले। गिरफ्तार किए गए लोगों को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाए।

मुंबई। मुंबई एटीएस ने हाल ही में नकली नोट बरामद किए। ये नकली नोट शायद कभी न पकड़े जाते अगर उन पर गांधी जी तस्वीर न छपी होती केवल एक चीज जिसकी वजह से नकली नोट पहचान में आए वो था बापू का वॉटर मार्क जिसकी प्रिंट की हूबहू नकल नहीं उतारी जा सकी। नोटों पर छपी महात्मा गांधी की तस्वीर ने एक्सपर्ट्स को असली और नकली नोटों के फर्क को समझने में मदद की है। यानि अगर नोटों पर गांधी न होते तो नकली नोटों की पहचान नहीं हो पाती।
मुम्बई एटीएस ने कुछ दिनों पहले छापा मारकर 43 हजार के नकली नोट बरामद किए। ये नोट ऐसे थे जिसने एकबारगी तो एक्सपर्ट्स को भी चक्कर में डाल दिया था और वो इसे असली मान बैठे थे। ऐसे वक्त में असली और नकली के फर्क को समझने में नोटों पर छपी महात्मा गांधी की तस्वीर काम आई जिसकी हूबहू नकल नहीं उतारी जा सकी थी।

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लखनऊ। राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला 24 सितंबर को आएगा। विवादित जमीन के मालिकाना हक को लेकर चल रहे मुकदमे में फैसले की तारीख आज तय कर दी गई। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सालों से चल रहे इस केस के फैसले की तारीख 24 सितंबर मुकर्रर की है।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ विशेष पीठ में चल रहे इस ऐतिहासिक मुकदमे का निर्णय दोपहर बाद साढ़े तीन बजे आएगा। इस मुकदमे में एक पक्ष सेन्ट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने इसकी पुष्टि की। मुकदमे की सुनवाई गत 26 जुलाई को पूरी हुई थी। अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था और सितम्बर के दूसरे पखवाड़े में निर्णय सुनाने की घोषणा की थी। न्यायालय ने कहा था कि फैसले की तिथि एक सप्ताह पहले बता दी जाएगी।
नई दिल्ली। सीनियर आर्मी जनरल ए के नंदा के खिलाफ कर्नल की पत्नी की ओर से लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोप के मामले में नया मोड़ आ गया है। आरोपों की जांच करने वाली कोर्ट ऑफ इनक्वायरी ने सेना के इंजीनियर इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल ए के नंदा को दोषमुक्त करार दिया है। सीओआई ने कर्नल सीपीएस पसरीचा के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की है। मामले की जांच के लिए शिमला स्थित आर्मी ट्रेनिंग कमांड के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल एएस लांबा की अध्यक्षता में सीओआई गठित की गई थी।
सीओआई ने पिछले सप्ताह ही अपनी रिपोर्ट सौंप दी। जांच पैनल में शामिल सेना की वरिष्ठ महिला डॉक्टर ने जांच में पाया कि नंदा के खिलाफ लगाए गए आरोपों में कोई दम नहीं है। सीओआई ने जांच में पाया कि पसरीचा और उनकी पत्नी पहले भी सेना के वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ इसी तरह के आरोप लगा चुकी हैं।

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने यूपी की मायावती सरकार को राहत देते हुए यमुना एक्स्प्रेस वे जमीन अधिग्रहण को आज अपनी मंजूरी दे दी है। गौरतलब है कि जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी। जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा और एक्सप्रेस वे के लिए भूमि अधिग्रहण को मंजूरी दे दी।
मालूम हो कि यूपी में आगरा जिले के किसानों ने टाउनशिप सहित 165 किलोमीटर लंबे नोएडा-आगरा यमुना एक्सप्रेस-वे के लिए भूमि अधिग्रहण के विरोध में प्रदर्शन किया था। मथुरा, आगरा और अलीगढ़ जिलों में किसानों ने सरकार के जबरन अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन किया था। इस आंदोलने में कांग्रेस, बीजेपी, एसपी, और रालोद जैसी पार्टियां भी किसानों का साथ दे रही थीं।
अयोध्या। राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद के मालिकाना हक को लेकर आने वाले फैसले के मद्देनजर लोगों की निगाहें न्यायालय की ओर टिक गई है। फैसले की घड़ी जैसे-जैसे पास आ रही है इस पर चर्चाएं भी बढ़ती जा रही हैं। चाय-पान की दुकान से लेकर चौराहों-मोहल्लों तक संभावित फैसले पर ही चर्चा हो रही है। हर कोई अपने मंतव्य के अनुसार अपनी राय दे रहा है। इन सबके बीच दिलचस्प बात है कि दोनों वर्गों के आम लोग इस मुद्दे के फैसले के बाद भी सिर्फ शांति चाहते हैं। दूसरी ओर फैसले के बाद अशांति की आशंका के मद्देनजर सुरक्षा के व्यापक बंगोबस्त किए जा रहे हैं। पुलिस महानिदेशक कर्मवीर सिंह स्वयं पूरे प्रदेश का इसी सिलसिले में दौरा कर रहे हैं। एक दिन पहले वह यहां भी आये थे। शांति व्यवस्था को लेकर उन्होंने यहां की जनता को आश्वस्त किया था।
रेल राज्यमंत्री के.एच.मुनियप्पा ने मंगलवार को लखनऊ में फैसले के मद्देनजर रेलगाड़ियों में सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने की बात कही थी। न्यायालय के संभावित आदेश पर राय शुमारी के साथ ही अयोध्या के जनसामान्य में यह चर्चा जोरों पर है कि फिर से कर्फ्यू तो नहीं लगेगा या साल 1990 या 1992 की तरह फिर से तनाव तो नहीं फैलेगा। तनाव फैलने की आशंका के मद्देनजर शांति चाहने वालों की सक्रियता भी बढ़ गई है। गंगा-जमुनी तहजीब के लिए चिरपरिचित अयोध्या और उसके जुड़वा शहर फैजाबाद में जगह-जगह स्टिकर चिपकाकर लोगों से अदालत के आदेश को मानने की अपील की जा रही है।
स्टिकर चिपकाने वालों में से एक युगल किशोर शरण शास्त्री का कहना है कि अयोध्यावासी शांति चाहते हैं लेकिन कुछ बाहरी लोग रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद के नाम पर अयोध्या और देश के अन्य भागों में भाईचारे की आबोहवा बिगाड़ते रहे हैं। फैसले की घड़ी नजदीक आते देख कर यहां के व्यापारी भी चिंतित हैं। वे कहते हैं कि अब तो न्यायालय पर ही भरोसा है। न्यायालय ही इसका स्थाई हल दे सकता है। व्यापारी कहते हैं कि अस्सी और नब्बे के दशक में यहां मचे बवाल की वजह से व्यापारी चौपट हो गया था। व्यापार की गाड़ी अब पटरी पर आ गई है। फिर से बवाल होने की दशा में कारोबार प्रभावित होगा। गौरतलब है कि 1950 से रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद के मालिकाना हक को लेकर चल रहे मुकदमें की सुनवाई इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ विशेष पीठ में गत 25 जुलाई को पूरी हुई।

लखनऊ। अयोध्या के विवादित श्रीराम जन्मभूमि, बाबरी मस्जिद के विवादित परिसर के मालिकाना हक के इस महीने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ से आने वाले फैसले के देखते हुए रेलवे में सुरक्षा कड़ी होगी और किसी भी स्थिति से निपटने के सभी उपाय किये जायेंगे। रेल राज्य मंत्री के.एच.मुनियप्पा ने आज यहां संवाददाताओं से कहा कि रेलवे के लिये यात्रियों की सुरक्षा सबसे ऊपर है। रेल मंत्रालय ने अयोध्या के मालिकाना हक के बारे में आने वाले फैसले को लेकर भी सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किये हैं।
फैसले के बाद होने वाली संभावित हिंसा के बारे में श्री मुनियप्पा ने कहा कि रेल मंत्रालय किसी भी स्थिति से निपटने में सक्षम है। रेल राज्य मंत्री ने फैजाबाद से दिल्ली के बीच सप्ताह में चार दिन तक चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी भी दिखायी।
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नई दिल्ली। 61 घंटे में 61 मौतों के बाद आखिरकार जोधपुर में डॉक्टरों ने हड़ताल वापस ले ली। दूसरी ओर दिल्ली के सफदरजंग में डॉक्टरों की हड़ताल जारी है। आईबीएन7 का एजेंडा साफ है...हड़ताल से मरीजों की जान लेने वाले डॉक्टरों को प्रैक्टिस का अधिकार नहीं उनकी डिगरियां रद्द हों। इसपर बात करने के लिए मौजूद थे दिल्ली से स्वास्थ्य राज्य मंत्री दिनेश त्रिवेदी, पटना से आईएमए के पूर्व अध्यक्ष अजय कुमार, हड़ताली डॉक्टरों के नेता डॉक्टर प्रताप और चंडीगढ़ से वरिष्ठ वकील केटीएस तुलसी। एंकरिंग मैनेजिंग एडिटर आशुतोष ने की।






















































