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दिल की बीमारी, डायबिटीज की दवाएं होंगी महंगी


Published on Sep 23, 2014 at 13:07
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नई दिल्ली। दिल की बीमारी और डायबिटीज की 108 दवाएं महंगी हो जाएंगी। सरकार ने 108 दवाओं को प्राइस कंट्रोल के दायरे में लाने की गाइडलाइंस वापस ले ली है और इन दवाओं को सस्ती दवा की सूची से बाहर कर दिया है। इसका सन फार्मा, ल्यूपिन, रैनबैक्सी, सिप्ला जैसी कंपनियों को फायदा मिलेगा।

ध्यान रहे कि 10 जुलाई को ही इन दवाओं को सस्ती दवा की सूची में डाला गया था लेकिन फार्मा कंपनियां सरकार के इस फैसले का विरोध कर रही थीं। सरकार के इस फैसले के खिलाफ फार्मा कंपनियां बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंची थी। सेंट्रम ब्रोकिंग के सीनियर वीपी रणजीत कपाड़िया के मुताबिक एनपीपीए का अपना प्राइस कंट्रोल का ऑर्डर वापिस लेने से सनोफी, जायड्स, कैडिला, रैनबैक्सी और ल्युपिन को घाटा नही होगा। एनपीपीए के इस फैसले से बाकी कंपनियों को भी फायदा होगा लेकिन ज्यादा फायदा इन कंपनियों को ही होगा। ऑर्डर वापिस लिए जाना पूरी इंडस्ट्री के लिए अच्छी खबर होगी। वहीं फाइजर के पूर्व एमडी केवल हांडा ने एनपीपीए के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहां कि फार्मा कंपनियों के लिए ये एक अच्छी खबर है।

पुरुषों को होता है ज्यादा हार्टअटैक का खतरा


Published on Sep 22, 2014 at 10:38
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रायपुर। विदेशों की अपेक्षा भारत में हृदय रोगियों की संख्या बढ़ रही है। इसके लिए लोगों का खान-पान, रहन-सहन और आधुनिक जीवनशैली बड़ा कारण है। खाने-पीने के चीजों में मिलावट भी हृदय रोगियों के लिए घातक है। पहले 50 साल की उम्र के बाद हार्टअटैक आने की आशंका रहती थी, लेकिन अब छोटी उम्र में भी अटैक आने लगा है। हार्टअटैक को दिल के दौरे के रूप में जाना जाता है।

यह महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में अधिक होता है। अपोलो हॉस्पिटल, चेन्नई के जानेमाने हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ.पी. रामचंद्रन ने बातचीत के दौरान कहा कि हार्टअटैक से सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, मिचली, उल्टी, घबराहट व पसीना आता है। लेकिन इस अटैक से बचने के लिए अपनी जीवनशैली में परिवर्तन कर खतरे को कम किया जा सकता है। लोगों को नियमित व्यायाम करना चाहिए, खान-पान में हरी सब्जियों व ताजे फल का उपयोग ज्यादा से ज्यादा करना चाहिए। फास्ट फूड से परहेज करना चाहिए।

रोज करें योग तो रहेंगे बीमारियों से दूर


Published on Sep 18, 2014 at 09:34 | Updated Sep 18, 2014 at 15:40
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नई दिल्ली। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक चिंता, तनाव और मनोरोग दूर करने का आसान और सबसे बेहतरीन तरीका योग है। इससे न सिर्फ शरीर स्वस्थ होता है, बल्कि तनाव संबंधी हॉर्मोन भी नियंत्रित होते हैं। उनके मुताबिक, यह साबित हो चुका है कि योग आहार संबंधी समस्याएं, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल और मोटापा दूर करने में बेहद प्रभावी भूमिका निभाता है।

गंगाराम अस्पताल के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ एस सी मनचंदा ने कहा कि योग जीवन जीने का तरीका है। बीमारी होने के बाद उससे निजात पाने के लिए लोग असमंजस में पड़ जाते हैं कि योग करें या एलोपैथिक दवाओं का सेवन करें। लेकिन उन्हें यह समझने की जरूरत है कि योग हृदय रोग या मधुमेह जैसी बीमारियों के इलाज के दौरान या उसके बाद मानसिक तनाव कम करने में फायदेमंद है।

सेहत के लिए फायदेमंद हैं दूध की बनी चीजें


Published on Sep 18, 2014 at 08:36
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वॉशिंगटन। ये तो हम सभी जानते हैं कि दूध से बने उत्पादों का सेवन स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, लेकिन एक नए शोध में खुलासा हुआ है कि दूध से बने का सेवन करने से मोटापा और मधुमेह जैसे चयापचय रोगों का खतरा भी कम होता है। आहार दिशा निर्देशों में दिन में 2-4 भाग दूध आधारित उत्पाद जैसे दूध, दही, पनीर, क्रीम और मक्खन का सेवन करने की सलाह दी जाती है।

सीएचयू डी क्यूबेग शोध केंद्र में अंत: स्त्राविका (एंडोक्रिनोलॉजी) और नेफ्रोलॉजी विभाग में वैज्ञानिक इवोना रुदकोस्का ने बताया कि दूध उत्पादों का सेवन बढ़ाने से खराब और स्वस्थ पाचन वाले लोगों के चयापचय स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव सुनिश्चित करने के लिए अच्छी तरह डिजाइन किए हुए अतिरिक्त अध्ययनों की जरूरत है। उन्होंने यह भी देखा कि किस तरह दुग्ध उत्पाद का सेवन चयापचय स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। ये परिणाम 'अप्लाइड फिजियोलॉजी, न्यूट्रीशन एंड मटैबलिजम' जर्नल में प्रकाशित हुए।

पैदा होते ही 10 लाख बच्चों की हो जाती है मौत!


Published on Sep 17, 2014 at 11:15
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न्यूयार्क। दुनिया भर में हर साल 10 लाख बच्चे बीमारियों और कारणों की वजह से अपने जीवन का दूसरा दिन तक नहीं देख पाते। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष यूनीसेफ की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि हर साल 10 लाख मासूम ऐसी बीमारियों के कारण जन्म लेने के 24 घंटे के अंदर काल के गाल में समा जाते हैं जिनका समय रहते आसान इलाज संभव है।

यूनीसेफ की कार्यकारी उप निदेशक गीता राव गुप्ता ने एक बयान में कहा कि महज कुछ लापरवाहियों और अज्ञानता के कारण संसार भर के करीब 10 लाख बच्चों को जन्म के पहले दिन ही जान गंवानी पड़ती है। गर्भावस्था बच्चे के जन्म के दौरान और उसके बाद नवजात और माताओं के स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जाए तो शिशुओं की मौत को बहुत हद तक रोका जा सकता है।

महिला के पेट से निकला 8 किलो का ट्यूमर


Published on Sep 15, 2014 at 10:19
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रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी से 77 किलोमीटर दूर धमतरी जिले में डॉक्टरों ने एक महिला के पेट से 8 किलो का ट्यूमर निकाला है। महिला पिछले तीन साल से पेटदर्द से काफी परेशान थी। महिला को स्थानीय बठेना अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां डॉ प्रफुल्ल कुमार पैकरा ने सफल ऑपरेशन कर उसके पेट से 8 किलो का ट्यूमर निकाला। डॉक्टर का कहना है कि ऑपरेशन नहीं हुआ होता तो महिला की जान भी जा सकती थी।

जानकारी के अनुसार, कांकेर जिले के बरगांव पचौरी निवासी 55 साल की ये महिला इतवारी बाई पिछले तीन साल से पेटदर्द से काफी परेशान थी। पिछले तीन माहिने से वह अपना इलाज कई डॉक्टरों से करा चुकी थी। आखिर में बठेना अस्पताल में इलाज कराने पहुंची। यहां डॉ प्रफुल्ल कुमार पैकरा ने महिला का इलाज शुरू किया। डॉक्टर ने उसका सोनोग्राफी कराया, तब पता चला कि महिला के पेट में ट्यूमर है। डॉ पैकरा ने अपने अनुभव के आधार पर महिला का सफल ऑपरेशन कर उसके पेट से 8 किलो का ट्यूमर निकाला।

AB ब्लड ग्रुप वालों की याददाश्त होती है कमजोर!


Published on Sep 12, 2014 at 08:17
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वॉशिंगटन। एक शोध में कहा गया है कि जिन लोगों का ब्लड ग्रुप एबी है उनमें ज्यादा सोचने और याददाश्त कमजोर पड़ने की समस्या ज्यादा होती है। इसी वजह से भविष्य में उन्हें अन्य रक्त समूहों वाले लोगों की अपेक्षा मनोभ्रंश होने का खतरा ज्यादा रहता है। बर्लिगटन में यूनिवर्सिटी ऑफ वरमॉन्ट के कॉलेज ऑफ मेडिसीन में शोधरत मेरी कशमैन ने बताया कि हमारे शोध में ब्लड ग्रुप और संज्ञानामत्मक हानि पर अध्ययन किया गया।

जिन लोगों का रक्त समूह एबी होता है उनमें स्मृति संबंधी समस्याएं होने का खतरा अन्य लोगों की अपेक्षा 82 फीसदी ज्यादा होता है। ब्लड ग्रुप स्ट्रोक जैसी दिल की बीमारियों से भी संबंधित हैं, इसलिए परिणाम संवहनी और मस्तिष्क स्वास्थ्य के बीच संबंध को दर्शाते हैं। यह अध्ययन एक बड़े अध्ययन (रीजंस फॉर जियोग्राफिक एंड रेशल डिफरेंसेज इन स्ट्रोक) का हिस्सा था। जिसमें 30,000 से ज्यादा लोग शामिल थे।

मोटे लोगों में क्यों होती है ज्यादा खाने की आदत?


Published on Sep 10, 2014 at 14:55
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वॉशिंगटन| क्या आप जानते हैं कि मोटे लोग सिनेमा हॉल में पॉपकॉर्न की खुशबू से जल्दी आकर्षित क्यों होते हैं? एक अध्ययन के मुताबिक दिमाग की रासायनिक प्रक्रिया में अंतर होने के कारण ऐसा होता है। मोटे लोगों के दिमाग में आदतें निर्मित करने वाले क्षेत्र में डोपामाइन गतिविधि उनके पतले समकक्षों की अपेक्षा ज्यादा तेज होती है।

डोपामाइन एक न्यूरोट्रांसमीटर है जो दिमाग के पुरस्कार और प्रसन्नता वाले केंद्रों को नियंत्रित करने में सहयोग देता है। अमेरिका में नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ से शीर्ष लेखक केविन हॉल ने बताया कि भोजन चेतन की अपेक्षा अचेतन आदतों पर आधारित होता है, खास तौर से तब जब स्वादिष्ट भोजन के संकेत व्यावहारिक रूप से हर जगह मौजूद हों। अध्ययन में मोटे शरीर वाली 43 महिलाओं और पुरुषों को शामिल किया गया।

रोजाना खाएं आम तो ब्लड शुगर रहेगा कंट्रोल


Published on Sep 10, 2014 at 09:36 | Updated Sep 10, 2014 at 09:57
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न्यूयॉर्क| अब आम आपके स्वास्थ्य का ख्याल रखेगा। मोटापा से पीड़ित लोग अगर रोजाना आम का सेवन करें, तो उनके रक्त ब्लड शुगर का स्तर कम हो सकता है। हालिया अध्ययन में यह बात सामने आई है। अमेरिका के ओकलाहोमा स्टेट यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ ह्यूमन साइंस में पोषण विज्ञान के सहायक प्रोफेसर एड्रालिन लुकास ने कहा कि निष्कर्ष में यह सामने आया कि मोटापा से पीड़ित लोग लगभग 100 ग्राम आम का रोजाना सेवन करें, तो यह उनके रक्त शर्करा का स्तर कम करने में मदद कर सकता है।

उल्लेखनीय है कि आम में मैग्निफेरिन समेत कई जैव-सक्रिय यौगिक होते हैं, जो एक एंटीऑक्सिडेंट हैं और रक्त ब्लड शुगर को कम करने में सहायक है। लुकास ने कहा कि इसके अलावा, आम फाइबर से भरपूर होता है, जो रक्त में शर्करा के अवशोषण को कम करता है।

नींद में कमी से आपका दिमाग होता है कमजोर


Published on Sep 05, 2014 at 09:53 | Updated Sep 05, 2014 at 09:55
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लंदन| अगर आप बढ़ती उम्र के साथ पर्याप्त नींद नहीं ले रहे, तो सावधान हो जाइए। आपके दिमाग के घटते आयतन का संबंध कम नींद से हो सकता है। हालिया अध्ययन में यह खुलासा हुआ है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, नींद की कमी का संबंध मस्तिष्क के विभिन्न भागों जैसे अग्रभाग (फ्रंटल), कालिक (टेंपोरल) के आयतन में तेजी से कमी से हो सकता है।

60 साल से ज्यादा उम्र वाले लोगों में यह बहुतायत तौर पर देखा गया। ब्रिटेन में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के अध्ययन लेखक क्लेयर सेक्सटन ने कहा कि हालांकि अभी तक यह ज्ञात नहीं है कि नींद में कमी का संबंध मस्तिष्क की रचना में बदलाव से है। यह अध्ययन 20-84 आयुवर्ग के 147 वयस्कों पर किया गया। शोधकर्ताओं ने नींद में कमी और मस्तिष्क के आयतन के बीच के संबंध का अध्ययन किया।





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क्या आप मां बनने वाली हैं? यह तो खुशी की बात है, मगर दिवाली में पटाखों से निकलने वाला धुआं, धमाके की आवाज और कठोर रसायन गर्भवती महिलाओं के लिए हानिकारक होते हैं।
पानी में मौजूद खतरनाक आर्सेनिक को हटाने में सिगरेट की राख मददगार हो सकती है। एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है।
देश में सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों के पैकेटों के 85 फीसदी हिस्से पर इसके दुष्प्रभाव से संबंधित चेतावनी प्रकाशित करना अनिवार्य कर दिया गया है।
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क्या आप मां बनने वाली हैं? यह तो खुशी की बात है, मगर दिवाली में पटाखों से निकलने वाला धुआं, धमाके की आवाज और कठोर रसायन गर्भवती महिलाओं के लिए हानिकारक होते हैं।
पानी में मौजूद खतरनाक आर्सेनिक को हटाने में सिगरेट की राख मददगार हो सकती है। एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है।
देश में सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों के पैकेटों के 85 फीसदी हिस्से पर इसके दुष्प्रभाव से संबंधित चेतावनी प्रकाशित करना अनिवार्य कर दिया गया है।
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क्या आप मां बनने वाली हैं? यह तो खुशी की बात है, मगर दिवाली में पटाखों से निकलने वाला धुआं, धमाके की आवाज और कठोर रसायन गर्भवती महिलाओं के लिए हानिकारक होते हैं।
पानी में मौजूद खतरनाक आर्सेनिक को हटाने में सिगरेट की राख मददगार हो सकती है। एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है।
देश में सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों के पैकेटों के 85 फीसदी हिस्से पर इसके दुष्प्रभाव से संबंधित चेतावनी प्रकाशित करना अनिवार्य कर दिया गया है।
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