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जानकारी: स्किन कैंसर से नहीं बचाती सन्सक्रीन!


Published on Jul 03, 2014 at 10:35 | Updated Jul 03, 2014 at 13:38
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न्यूयॉर्क| जब त्वचा कैंसर से खुद को बचाने की बात हो, तो मन में थोड़ा डर होना जरूरी है। शोधकर्ताओं का कहना है कि त्वचा कैंसर के डर और चिंता से ग्रस्त लोग इस बीमारी के उत्पन्न होने की वजहों को जानने और सावधानी बरतने के बजाय त्वचा पर सन्सक्रीन लगाने का विकल्प चुनते हैं।

अमेरिका में यूनिवर्सिटी ऑफ बफ्फेलो में सहायक प्रोफेसर मार्क कीविनेमी ने कहा कि शोध में पता चला कि चिकित्सक लोगों को सन्सक्रीन के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करने के दौरान मरीज की भावनाओं को ज्यादा ध्यान में रखना चाहते हैं। शोध के तहत करीब 1,500 लोगों से उनके सन्सक्रीन इस्तेमाल से संबंधित प्रश्न पूछे गए। इन लोगों को व्यक्तिगत रूप से त्वचा के कैंसर का अनुभव नहीं था। प्रतिभागियों से त्वचा कैंसर के खतरे का अनुमान लगाने और इस बारे में उनकी चिंता से संबंधित प्रश्न पूछे गए।

आफत बना फास्टफूड!


Published on Jun 30, 2014 at 10:59 | Updated Jun 30, 2014 at 11:56
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कानपुर। व्यस्त जीवनशैली के बीच तेजी से पनपती फास्ट फूड संस्कृति लोगों की हड्डियों को दीमक की तरह चाट रही है जिससे देश में हड्डियां खोखली कर देने वाली बीमारी ओस्टियोपोरोसिस महामारी का रूप धारण करती जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आकड़ों के अनुसार साल 2003 तक भारत में ओस्टियोपोरोसिस के मरीजों की संख्या करीब चार करोड़ थी। अगले दशक के मध्य तक यह आंकड़ा नौ करोड़ तक पहुंचने की आशंका है।

मालूम हो कि ओस्टियोपोरोसिस में हड्डियों का आकार घटने लगता है। वृद्धावस्था में 60 और 65 साल की आयु के बीच इस मर्ज से ग्रसित होने की आशंका ज्यादा रहती है।

दुनिया में 27 लाख लोग नशीली दवाओं की गिरफ्त में!


Published on Jun 30, 2014 at 08:42 | Updated Jun 30, 2014 at 13:56
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नोएडा। दुनिया में 27 लाख लोग गंभीर रूप से नशीली दवाओं का इस्तेमाल करते हैं, जिनमें से 250,000 लोगों की मौत हो जाती है। यह जानकारी रविवार को एक सेमिनार में डॉ. विनोद कुमार ने दी। आईटीएस डेंटल कॉलेज में नशीली दवाओं के खिलाफ आयोजित सेमिनार में सेंट स्टीफन हॉस्पिटल के जनरल मेडिसिन के विभागाध्यक्ष डॉ. कुमार ने बतौर मुख्य वक्ता नशीली दवाओं से होने वाले शारीरिक, व्यावहारिक लक्षणों के बारे में बताया।

उन्होंने कहा कि सुस्त दिखना, नाक बहना, झुर्रियां दिखना, भार कम होना, गैर जिम्मेदाराना व्यवहार, बहस करना, प्रेरणा की कमी होना जैसे व्यवहार व लक्षणों को देखकर जल्द इलाज कराना चाहिए। कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. पुनीत आहुजा ने कहा कि नशीली दवाओं को हमें समाज हटाने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए और सरकार को नशीली दवाओं के खिलाफ कठोर कानून को लागू करना चाहिए।

जितनी ज्यादा टीवी देखेंगे, उतनी जल्दी मौत!


Published on Jun 26, 2014 at 20:34 | Updated Jun 26, 2014 at 20:59
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वाशिंगटन। एक नए शोध में कहा गया है कि एक दिन में लगातार तीन घंटे या उससे ज्यादा समय तक टेलीविजन देखने वाले लोगों में अकाल मृत्यु का जोखिम अपेक्षाकृत कम टेलीविजन देखने वालों की तुलना में दोगुना होने की आशंका रहती है।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के शोधकर्ताओं ने तीन किस्म के सुस्त व्यवहार और सभी वजहों: टेलीविजन देखने के समय, कंप्यूटर पर काम करने के समय और वाहन चलाने के समय से होने वाली मौत के खतरे के बीच का संबंध पता लगाने के लिए स्पैनिश यूनिवर्सिटी के 13 हजार 284 युवा एवं सेहतमंद स्नातकोत्तरों का मूल्यांकन किया।

फिट रहना है तो आसपास का वातावरण रखें ठंडा


Published on Jun 24, 2014 at 09:41
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मेलबर्न। एक अध्ययन में पता चला है कि ठंडे वातावरण में रहने से स्वस्थ रहा जा सकता है। अध्ययन के अनुसार, शांत वातावरण ब्राउन फैट को बढ़ने से रोकता है, जो गर्मी पैदा करने के लिए ऊर्जा खर्च करता है और इस तरह मधुमेह और मोटापे के खतरे को कम करता है। अध्ययन में पता चला है कि परिवेश का तापमान मनुष्यों में ब्राउन फैट के बढ़ने या घटने पर प्रभाव डालता है। ठंडे वातावरण में ब्राउन फैट बढ़ने की संभावना कम होती है, जबकि गर्म वातावरण नुकसानदेह होता है।

ऑस्ट्रेलिया के गारवन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल रिसर्च में एंडोक्राइनोलॉजिस्ट पॉल ली ने कहा कि इस अध्ययन से पहले तक हमें यह नहीं पता था कि क्या ब्राउन फैट को मानव शरीर में बढ़ाया या घटाया जा सकता है? ली ने कहा कि हमें पता चला कि इंसुलीन की संवेदनशीलता और ब्राउन फैट भविष्य में ग्लूकोज के मेटाबॉलिज्म के उपचार में नए आयाम खोल सकता है। यह शोध जर्नल डायबिटीज में प्रकशित हुई है।

आपके दिमाग के विकास के लिए जरूरी है ये जीन!


Published on Jun 23, 2014 at 10:25
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टोरंटो| शोधकर्ताओं ने उस जीन का पता लगाया है, जिसके कारण स्वस्थ मस्तिष्क का उपयुक्त विकास होता है। 'एसएनएफ2एच' नामक जीन संतुलन के लिए, अच्छे मोटर नियंत्रण और जटिल शारीरिक गतिविधियों के लिए मस्तिष्क के सबसे बड़े नियंत्रण केंद्र के विकास के लिए उत्तरदायी है।

शोधकर्ताओं ने जब यह जीन एक चूहे से जल्दी निकाल लिया तो उसके मस्तिष्क का विकास सामान्य से केवल एक तिहाई ही हुआ। चूहे को चलने, संतुलन बनाने और गतिविधियों से समन्वय बनाने में भी कठिनाई हुई, जिसे अनुमस्तिष्कीय गतिविभ्रम कहते हैं, जो कि कई तंत्रिका अपक्षयी रोगों का घटक है।

इस मौसम में ऐसे बचाएं स्किन और आंखें


Published on Jun 19, 2014 at 11:13
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लखनऊ। मौसम का मिजाज बदलने के साथ अब संक्रामक रोगों के पैर पसारने का खतरा मंडराने लगा है। भयंकर गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच अब काफी छिटपुट बरसात तो कभी उमस के बीच कई तरह की बीमारी होना आम बात है। इनमें सबसे ज्यादा स्किन और आंखों की बीमारियां लोगों को परेशान करती हैं।

ऐसे में चिकित्सक त्वचा पर विशेष ध्यान देने और सफाई पर जोर दे रहे हैं, जिससे स्किन सम्बन्धी रोगों से बचा जा सके और ये फैले नहीं वहीं इस मौसम में सबसे ज्यादा आंखों पर ध्यान देने की सलाह भी विशेषज्ञ दे रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक बदलते मौसम में अक्सर लोग अपनी आंख को लेकर लापरवाह हो जाते हैं, जो कभी-कभी बड़ी समस्या की वजह बन जाता है। इस मौसम में आंखों में वायरल संक्रमण होने का खतरा ज्यादा रहता है। चिकित्सकों के मुताबिक कुछ छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखकर इन परेशानियों से बचा जा सकता है।

दिमाग की बत्ती गुल कर सकती है टेंशन


Published on Jun 19, 2014 at 07:51 | Updated Jun 19, 2014 at 11:20
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न्यूयॉर्क| बिना वजह के तनाव से दूर रहिए, वरना समय से पहले ही आपकी स्मरण शक्ति कमजोर हो सकती है। शोधकर्ताओं के अनुसार, तनाव पैदा करने वाले हार्मोन का स्तर अधिक होता है, वृद्धावस्था में उनके मस्तिष्क में रचनात्मक परिवर्तन और स्मरण शक्ति में अल्पकालिक कमी दिखाई पड़ता है। चूहों पर किए गए इस शोध में शोधकर्ताओं ने अल्पकालिक स्मृति के लिए जिम्मेदार मस्तिष्क के प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स के कोशिकाओं की जांच की। गौरतलब है कि चूहों में तनाव के लिए जिम्मेदार हार्मोन 'कॉर्टिकोस्टेरॉन' मानवों में पाए जाने वाले हार्मोन 'कॉर्टिसोल' के समान ही होता है।

शोधकर्ताओं के अनुसार जिन चूहों में कॉर्टिकोस्टेरॉन का स्तर अधिक था, उनके प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स की कोशिकाओं के बीच का संयोजन, अपेक्षाकृत कम कॉर्टिकोस्टेरॉन वाले चूहों से बेहद कम था। स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय के प्राध्यापक रॉबर्ट सैपोस्की ने कहा कि मष्तिस्क के प्रीफ्रंटल क्षेत्र में यह हार्मोन उम्र बढ़ाने वाले एक पेसमेकर की तरह काम कर सकता है। सैपोस्की हालांकि इस शोध से जुड़े नहीं हैं। रैडली कहते हैं कि अध्ययन से पता चलता है कि मष्तिस्क में इस हॉर्मोन का प्रभाव जैसा पहले समझा जाता था उससे कहीं ज्यादा पड़ता है।

हर साल होगी दिल के 500 मरीजों की फ्री सर्जरी


Published on Jun 18, 2014 at 14:49 | Updated Jun 18, 2014 at 16:41
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नई दिल्ली। दिल्ली में दिल की बीमरियों से रोजाना 50 लोगों की मौत होती है। ऐसे लोगों को बचाने के लिए हार्ट केयर फाउंडेशन ने एक फंड बनाया है जिसके तहत जरूरतमंद लोगों की दिल की सर्जरी नि:शुल्क की जाएगी। फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ के के अग्रवाल ने यहां 21वें परफेक्ट हेल्थ मेले का थीम जारी करने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में यह आंकड़े साझा करते हुए बताया कि समीर मलिक हार्ट केयर फाउंडेशन फंड के तहत हर साल 500 मरीजों का दिल का नि:शुल्क ऑपरेशन करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि यह संख्या ज्यादा भी हो सकती है। ऑपरेशन से पहले और बाद में होने वाली हर तरह की जांच अस्पताल में रहने और दवाओं का खर्च और डाक्टरों की फीस भी फंड से ही दी जाएगी।

डॉ. अग्रवाल ने बताया कि फंड से उन मरीजों को पैसा दिया जाएगा जिनके पास ऑपरेशन के लिए पैसा नहीं है या फिर उनका इलाज किया जाएगा जिन्हें आपरेशन की तत्काल जरूरत है, लेकिन दूसरे अस्पतालों में प्रतीक्षा सूची लंबी होने के कारण उनका ऑपरेशन नहीं हो पा रहा है। उन्होंने बताया कि इस मुहिम में मेदांता और जयपुर गोल्डेन समेत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के कई अस्पताल हार्ट केयर फाउंडेशन के साथ जुड़े हैं। मेदांता ने हर साल 52 बच्चों की नि:शुल्क सर्जरी करने का बीड़ा उठाया है। डा. अग्रवाल ने कहा कि फंड की औपचारिक शुरुआत सितंबर महीने में होगी।

मधुमक्खी का जहर भी होता है बेहद फायदेमंद!


Published on Jun 18, 2014 at 11:29
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लखनऊ। सैंकडों बीमारियों में गुणकारी माना जाने वाला शहद ही नहीं मधुमक्खी के डंक का जहर भी स्वास्थ्य के लिए मुफीद है। मधुमक्खी के डंक से निकला जहर गठिया के लिए काफी लाभप्रद है। एक शोध से पता चला है कि मधुमक्खी के डंक के जहर के साथ एक रासायनिक पदार्थ मिलाकर लगाने से गठिया ठीक हो सकता है। यही नहीं मधुमक्खी के रायल जेली की मदद से एड्स जैसी घातक बीमारियों के साथ ही सेक्सुअल मेडिसिन भी तैयार की जाती है।

सेन्ट्रल बी रिर्सच इन्स्टीट्यूट पुणे के सहायक निदेशक आर के सिंह ने कहा कि मधुमक्खी पालन से किसानों के आर्थिक हालात में जहां खासा परिवर्तन हो सकता है। सिंह ने बताया कि हाल ही में आयोजित एक सेमिनार से रिजल्ट निकलकर सामने आया कि सभी तरीकों के स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े डॉक्टर मानते हैं कि मधुमक्खी का शहद ही नहीं इसकी प्रत्येक चीज मानव उपयोग में आ सकती है। उनका कहना था कि सेमिनार में आए विद्वानों ने माना कि रायल जेली एड्स में बेहद गुणकारी है।





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स्वास्थ्य संबंधी कई दिशा-निर्देश हैं, जिसका पालन हम सालों से करते आ रहे हैं। विशेषज्ञों ने मिथक बन चुके इन दिशा-निर्देशों का अब खुलासा किया है।
अगर आप बीमारी से मुक्त, खुशहाल और लंबी जिंदगी जीना चाहते हैं तो अपने आहार में फलों और सब्जियों की मात्रा बढ़ाकर, हर दिन इनकी कम से कम पांच खुराक लीजिए।
चाय का सेवन कुछ लोग थकान दूर करने तो कुछ आदतन करते हैं, लेकिन चाय की एक प्याली हमारे जीवन के अलग-अलग आयामों के लिए लाभदायक हो सकती है।
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स्वास्थ्य संबंधी कई दिशा-निर्देश हैं, जिसका पालन हम सालों से करते आ रहे हैं। विशेषज्ञों ने मिथक बन चुके इन दिशा-निर्देशों का अब खुलासा किया है।
अगर आप बीमारी से मुक्त, खुशहाल और लंबी जिंदगी जीना चाहते हैं तो अपने आहार में फलों और सब्जियों की मात्रा बढ़ाकर, हर दिन इनकी कम से कम पांच खुराक लीजिए।
चाय का सेवन कुछ लोग थकान दूर करने तो कुछ आदतन करते हैं, लेकिन चाय की एक प्याली हमारे जीवन के अलग-अलग आयामों के लिए लाभदायक हो सकती है।
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हैल्थ

स्वास्थ्य संबंधी कई दिशा-निर्देश हैं, जिसका पालन हम सालों से करते आ रहे हैं। विशेषज्ञों ने मिथक बन चुके इन दिशा-निर्देशों का अब खुलासा किया है।
अगर आप बीमारी से मुक्त, खुशहाल और लंबी जिंदगी जीना चाहते हैं तो अपने आहार में फलों और सब्जियों की मात्रा बढ़ाकर, हर दिन इनकी कम से कम पांच खुराक लीजिए।
चाय का सेवन कुछ लोग थकान दूर करने तो कुछ आदतन करते हैं, लेकिन चाय की एक प्याली हमारे जीवन के अलग-अलग आयामों के लिए लाभदायक हो सकती है।
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