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दमे के शिकार बच्चों के लिए संतरा खतरनाक!


Published on Nov 07, 2014 at 08:16 | Updated Nov 07, 2014 at 08:25
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न्यूयॉर्क| आपको यह बात जानकर हैरानी होगी कि संतरे के कारण आपका बच्चा जानलेवा एलर्जी (एनाफायलैक्सिस) का शिकार हो सकता है। पेंसिलवानिया में संतरा खाने के बाद एक बच्चे के साथ ऐसा ही कुछ हुआ। इतनी कम उम्र में इस तरह का यह पहला मामला सामने आया है। एनाफायलैक्सिस एलर्जी का एक गंभीर प्रकार है, जिसके कारण मृत्यु तक हो सकती है। त्वचा पर खुजली, गले में सूजन और रक्त चाप कम होना इसके लक्षण हैं। कीड़ों के काटने, कुछ दवाएं लेने या कुछ खाद्य पदार्थो से आमतौर पर ऐसे लक्षण सामने आते हैं।

अमेरिकी कॉलेज ऑफ एलर्जी, अस्थमा एंड इम्यूनोलॉजी के सदस्य और एलर्जी विशेषज्ञ सिगरिद दा वेगा ने कहा, संतरा खाने के बाद ढाई साल की बच्ची गंभीर एनाफायलैक्सिस की शिकार हो गई।

देर तक काम करने से याददाश्त होती है कमजोर!


Published on Nov 05, 2014 at 12:30 | Updated Nov 05, 2014 at 12:43
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लंदन| लंबी शिफ्ट में काम करने से आप ज्यादा पैसे जरूर कमा सकते हैं, पर यह आपके दिमाग पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इससे आपके दिमाग के काम करने की शक्ति कम हो सकती है और आपकी याददाश्त कमजोर हो सकती है, यह बात एक शोध में सामने आई है। शोधकर्ताओं ने बताया कि लंबी शिफ्ट में काम करने से शरीर की गतिविधि में रुकावट आती है जो शारीरिक तनाव पैदा कर सकता है, जो आपके दिमाग की गतिविधि को प्रभावित कर सकता है। शोधकर्ताओं ने चेताया कि भारी जोखिम भरी स्थितियों में रात में नौकरियों की बढ़ती हुई संख्या न केवल व्यक्ति की सुरक्षा, बल्कि पूरे समाज की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं।

फ्रांस के टुलूज विश्वविद्यालय के जीन-क्लाउडे मर्कुइए के नेतृत्व में किए गए इस शोध में पाया गया कि एक बार अगर लोगों ने शिफ्ट में काम करना बंद कर दिया तो वे कमजोर याददाश्त की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। लेकिन इसमें पांच साल तक का लंबा समय लग सकता है। शोधकर्ताओं ने इस शोध प्रक्रिया में 1996, 2001 और 2006 में 3000 से अधिक ऐसे लोगों जो विभिन्न क्षेत्रों में या तो काम कर रहे थे या फिर सेवानिवृत्त हो चुके थे, की दिमागी क्षमता पर नजर रखी।

जानें कैसे पड़ा था 'इबोला वायरस' का नाम


Published on Nov 02, 2014 at 10:22
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नई दिल्ली। आज से कुछ 38 साल पहले जब कांगो गणराज्य के जाएरे में एक छोटे से गांव में पहली बार एक बीमारी सामने आई तब इसे कोई इबोला के रूप में नहीं जानता था। साल 1967 में हालांकि अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक टीम को इस रहस्यमय बीमारी की जांच का जिम्मा सौंपा गया था और इसी दौरान एक नदी पर इसका नामकरण किया गया। इबोला आज दुनियाभर में चिंता का विषय बन चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित दुनिया भर की चिकित्सा संस्थाएं और एजेंसियां पश्चिमी अफ्रीकी देशों में महामारी के रूप में फैले इबोला वायरस को विश्व के लिए बड़े खतरे के रूप में देख रही हैं।

वैज्ञानिकों की टीम में शामिल चिकित्सक एवं शोधकर्ता पीटर पायट ने अपने संस्मरण 'नो टाइम टू लूज - ए लाइफ इन परस्यूट ऑफ डेडली वायरस' में लिखा है कि वैज्ञानिकों की टीम ने बीमारी की जड़ यानी वायरस का पता लगाया तो वे उससे होने वाली बीमारी और नतीजों से सकते में आ गए थे।

80% भारतीय विटामिन डी की कमी से पीड़ित


Published on Oct 31, 2014 at 20:55
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नई दिल्ली। भारत की 80 फीसदी आबादी विटामिन डी की कमी से पीड़ित है, जिसके कारण उन्हें मधुमेह, हृदय रोग जैसी बीमारियों का खतरा है। विशेषज्ञों ने आज यह जानकारी दी। विटामिन डी की कमी का कोई प्रारंभिक लक्षण नहीं होता है। काफी समय बाद ऐसे लोगों को कई बीमारियां घेर लेती हैं, जिसमें जल्दी मृत्यु की संभावना 45 फीसदी होती है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक एम सी मिश्रा ने कहा है कि भारत के लोग इस बात को भूल जाते हैं कि विटामिन डी की कमी से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं जैसे मधुमेह, हृदय रोग यहां तक कि कैंसर तक हो सकता है।

देश में विटामिन डी की कमी के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से दवा कंपनी ग्लेनमार्क द्वारा एम्स के सहयोग से 'बोन डी लाइट अभियान' की शुरुआत के मौके पर उन्होंने ये बातें कहीं। देश के 15 शहरों में इस अभियान से स्थानीय चिकित्सकों को जोड़ा जाएगा। इस दौरान चिकित्सक विटामिन डी की कमी से पड़ने वाले प्रभावों के बारे में बताएंगे। विशेषज्ञों के मुताबिक, देश के 70 फीसदी वयस्क विटामिन डी की कमी से पीड़ित हैं।

हैदराबाद में हुआ अजन्मे बच्चे का ऑपरेशन


Published on Oct 30, 2014 at 18:25 | Updated Oct 31, 2014 at 20:01
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हैदराबाद। आंध्र प्रदेश की राजधानी स्थित केयर अस्पताल में चिकित्सकों ने एक अजन्मे बच्चे का माता के भ्रूण में दिल का ऑपरेशन (फीटल हर्ट प्रॉसिड्योर) किया है। दावे के मुताबिक भारत में इस तरह का यह पहला ऑपरेशन है। मुख्य हृदय रोग विशेषज्ञ (शिशु) डॉ. के. नागेश्वर राव के नेतृत्व में आठ चिकित्सकों के दल ने 27 सप्ताह की गर्भवस्था वाले शिशु का ऑपरेशन किया।

जांच के दौरान पता चला था कि 25 वर्षीय शिरिशा के गर्भ में पल रहे बच्चे के महाधमनी वॉल्व (एओरटिक वॉल्व) में रुकावट है, जिसके कारण बायां निलय (लेफ्ट वेंट्रिकिल) शरीर को रक्त पंप करने में असमर्थ था। मिटरल वॉल्व में भी क्षति की बात सामने आई, साथ ही दिल का बायां चैंबर सिकुड़ गया था।

योग करें और धूम्रपान की लत से छुटकारा पाएं


Published on Oct 30, 2014 at 09:08 | Updated Oct 30, 2014 at 09:18
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नई दिल्ली| धूम्रपान के नुकसान से तो हर कोई वाकिफ है, लेकिन इस लत को छोड़ पाने में सभी बेहद लाचार साबित होते हैं। लेकिन ताजा अध्ययन में पता चला है कि योग के जरिए धूम्रपान की लत से छुटकारा पाने में आसानी होती है। प्राण योग के विशेषज्ञ दीपक झा ने बताया कि योग, धूम्रपान छोड़ने का एक समग्र समाधान है। साथ ही दीपक यह भी बताते हैं कि योग केवल धूम्रपान की आदतों से ही लोगों को दूर नहीं रखता बल्कि शरीर पर हुए दुष्प्रभाव को भी दूर कर देता है।

धूम्रपान छोड़ने के लिए यूं तो बाजार में तमाम तरह के रासायनिक विकल्प उपलब्ध हैं, लेकिन इनके सहारे धूम्रपान छोड़ना उतना आसान नहीं होता। सिगरेट के धुएं से निकलने वाला विषाक्त पदार्थ शरीर में प्रवेश कर खून का गाढ़ापन बढ़ा देता है और धीरे-धीरे एक थक्के के रूप में जम जाता है। यह रक्तचाप और हृदय की गति को भी प्रभावित करता है। साथ ही यह धमनियों को संकरा कर अंगों में ऑक्सीजन युक्त रक्त परिसंचरण की मात्रा को कम कर देता है।

'भारत में डॉक्टर कम, एक्सपर्ट डॉक्टर ज्यादा'


Published on Oct 29, 2014 at 15:44 | Updated Oct 29, 2014 at 15:52
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नई दिल्ली। भारत को स्वास्थ्य समस्या पर ध्यान देने के लिए अतिरिक्त सामान्य चिकित्सकों (फिजिशियन) की जरूरत है, वहीं विशेषज्ञ मानते हैं कि देश में एमबीबीएस से ज्यादा विशेषज्ञ चिकित्सक मौजूद हैं। मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजी विभाग के नरेश गुप्ता कहते हैं कि इस देश में औसतन हर वर्ष 50 हजार एमबीबीएस चिकित्सक तैयार होते हैं, जिनमें से 30 हजार विशिष्ट और अति-विशिष्ट डिग्री की तरफ रुख करते हैं।

उन्होंने कहा कि अन्य देशों की अपेक्षा भारत में विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या अधिक है। गुप्ता ने कहा कि 398 मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ चिकित्सक तैयार होते हैं। गुप्ता ने यह बात मंगलवार शाम स्पेशियलाइजेशन एंड सुपर-स्पेशियलाइजेशन इन मेडिसिन-द मोर द मेरियर' के दौरान कही, जिसका आयोजन कंज्युमर इंडिया ने इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के सहयोग से किया था।

मानसिक बीमारियों से दिल को होता है खतरा


Published on Oct 28, 2014 at 08:44 | Updated Oct 28, 2014 at 09:19
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टोरंटो। अवसाद सहित तमाम मानसिक रोगों से निजात पाने के लिए अगर आप मनोरोग संबंधी दवाओं का सेवन कर रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। क्योंकि मानसिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों को दिल की बीमारियों का खतरा दोगुना होता है। हालिया शोध में यह बात सामने आई है। निष्कर्ष के मुताबिक, मनोरोग संबंधी दवाएं, अस्वस्थ गतिविधियां तथा स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच तीन महत्वपूर्ण कारक हैं, जो जोखिम को बढ़ाते हैं।

कनाडा के टोरंटो स्थित सेंटर फॉर एडिक्शन एंड मेंटल हेल्थ के अध्ययन में प्रमुख लेखक केटी गोल्डी ने कहा कि ऐसी आबादी ज्यादा जोखिम में है और जो लोग कई तरह की मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं से जूझ रहे हैं, उन्हें और भी ज्यादा खतरा है। अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने कनाडियन कम्युनिटी हेल्थ सर्वे के आंकड़ों का इस्तेमाल किया। यह अध्ययन सिजोफ्रेनिया, द्विध्रुवी विकार, अवसाद और तनाव के रोगियों पर किया गया।

मोटापा देता है आपके लिवर को बीमारी का न्योता


Published on Oct 27, 2014 at 13:10 | Updated Oct 27, 2014 at 14:33
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नई दिल्ली| मोटापे के कारण अनियंत्रित मधुमेह से ग्रस्त 52 साल कि शीला जोशी (बदला हुआ नाम) को शायद इसका अंदाजा भी नहीं है कि वह धीरे-धीरे लिवर की बीमारी की तरफ बढ़ रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला सिर्फ जोशी का ही नहीं है, बल्कि अधिकांश भारतीय इस परिस्थिति से नावाकिफ होते हैं और जब मामला गंभीर हो जाता है तब सचेत होते हैं।

सर गंगाराम हॉस्पिटल में सेवारत लैप्रोस्कोपिक, रोबोटिक और बैरिएट्रिक सर्जन तरुण मित्तल ने कहा कि भारत में लोगों की आम धारणा है कि लीवर की बीमारियां शराब पीने वाले लोगों में ही होती है और शराब न पीने वालों को लीवर की बीमारी न के बराबर ही होती है। लेकिन ताजा अध्ययनों और शराब न पीने वाले लोगों में होने वाली लिवर की बीमारी के जागरुकता अभियानों में स्पष्ट किया गया है कि यह सिर्फ शराब पीने से संबंधित नहीं है।

बच्चों को जंकफूड की ओर ढकेल रहा है फेसबुक


Published on Oct 26, 2014 at 16:43 | Updated Oct 26, 2014 at 16:57
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सिडनी। आपके किशोर होते बच्चे यदि पिज्जा, बर्गर जैसे जंक फूड से अलग कुछ नहीं खाना चाहते, तो इसके लिए आप फेसबुक को दोष दे सकते हैं। एक अध्ययन के अनुसार, सोशल मीडिया वेबसाइटों का किशोरों के बीच जंक फूड के प्रचार और विज्ञापन में बड़ा हाथ है।

ऑस्ट्रेलिया में यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी के शोधकर्ताओं ने यह पता लगाया कि कैसे कम पोषक वाले खाद्य पदार्थों का प्रचार सोशल मीडिया पर खास तौर पर उस वर्ग को ध्यान में रखकर किया जाता है, जिनकी इन चीजों में ज्यादा दिलचस्पी है।





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नेफ्रोलाजी विशेषज्ञों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा पानी पीना किडनी के लिए हानिकारक हो सकता है। चिकित्सकों ने किडनी रोग से बचाव के लिए फास्ट फूड से परहेज की सलाह भी दी।
व्यायाम के साथ-साथ कभी कभार उपवास रखना दिमाग के न्यूरॉन को बढ़ावा देने के लिए अच्छा होता है, यह बात एक शोध में सामने आई है।
दुनिया में तकरीबन 74.8 करोड़ लोगों को नियमित रूप से साफ पानी नहीं मिल रहा है और करीब 18 लाख लोगों को दूषित पानी से अपनी जरूरतें पूरी करनी पड़ रहीं हैं।
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नेफ्रोलाजी विशेषज्ञों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा पानी पीना किडनी के लिए हानिकारक हो सकता है। चिकित्सकों ने किडनी रोग से बचाव के लिए फास्ट फूड से परहेज की सलाह भी दी।
व्यायाम के साथ-साथ कभी कभार उपवास रखना दिमाग के न्यूरॉन को बढ़ावा देने के लिए अच्छा होता है, यह बात एक शोध में सामने आई है।
दुनिया में तकरीबन 74.8 करोड़ लोगों को नियमित रूप से साफ पानी नहीं मिल रहा है और करीब 18 लाख लोगों को दूषित पानी से अपनी जरूरतें पूरी करनी पड़ रहीं हैं।
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नेफ्रोलाजी विशेषज्ञों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा पानी पीना किडनी के लिए हानिकारक हो सकता है। चिकित्सकों ने किडनी रोग से बचाव के लिए फास्ट फूड से परहेज की सलाह भी दी।
व्यायाम के साथ-साथ कभी कभार उपवास रखना दिमाग के न्यूरॉन को बढ़ावा देने के लिए अच्छा होता है, यह बात एक शोध में सामने आई है।
दुनिया में तकरीबन 74.8 करोड़ लोगों को नियमित रूप से साफ पानी नहीं मिल रहा है और करीब 18 लाख लोगों को दूषित पानी से अपनी जरूरतें पूरी करनी पड़ रहीं हैं।
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व्यायाम के साथ-साथ कभी कभार उपवास रखना दिमाग के न्यूरॉन को बढ़ावा देने के लिए अच्छा होता है, यह बात एक शोध में सामने आई है।
दुनिया में तकरीबन 74.8 करोड़ लोगों को नियमित रूप से साफ पानी नहीं मिल रहा है और करीब 18 लाख लोगों को दूषित पानी से अपनी जरूरतें पूरी करनी पड़ रहीं हैं।
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