

नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिक अब एक ऐसा टीका बनाने में लगे हैं जिससे डेंगू की रोकथाम हो सकेगी। जो व्यक्ति यह टीका लगवा लेगा उसके शरीर में मच्छर डेंगू के वायरस नहीं छोड़ पाएंगे। ये ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिक 2012 में भारत की साझेदारी में काम करने के लिए दिल्ली आए थे। उस वक्त यहां सबसे अधिक 37,000 डेंगू के मामले सामने आए थे। इतने मामले देखकर इन वैज्ञानिकों ने डेंगू की रोकथाम के लिए टीका तैयार करने की योजना बनाई। इस योजना पर अभी काम चल रहा है।
ये वैज्ञानिक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'एलिमिनेट डेंगू रिसर्च प्रोग्राम' चला रहे हैं। यह लाभरहित कार्यक्रम ऑस्ट्रेलिया, वियतनाम, इंडोनेशिया, चीन, सिंगापुर, कोलंबिया और ब्राजील में चलाया जा रहा है। शोधकार्य में जुटे इन वैज्ञानिकों ने एक फल-मक्खी के शरीर से वोल्बाचिना बैक्टीरिया को निकालकार कुछ मच्छरों में प्रवेश कराया और पाया कि ये मच्छर मानव शरीर में डेंगू का वायरस छोड़ने में कामयाब नहीं हो पाए।

हिसार। सेहत को नुकसान पहुंचाये बगैर दिल और कैंसर के मरीज भी चिकन खाने की अपनी ख्वाहिश पूरी कर सकते हैं।
लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के अनुसार फाइबर युक्त और कम वसा के चिकन रोल तथा सॉस बनाने की नई विधि खोजकर इससे रेशों और कम वसा के रोल बनाए जा सकेंगे। दिल और कैंसर के मरीज भी इस चिकन रोल को आसानी से खा सकते हैं। यह उनके सेहत को किसी तरह का नुकसान भी नहीं पहुंचाएंगे। क्योंकि इनमें आम चिकन के मुकाबले पंद्रह प्रतिशत तक वसा कम होगी।

टोक्यो। वैज्ञानिकों का कहना है कि नियमित रूप से ग्रीन टी और कॉफी को अपने आहार में शामिल करना दिल के लिए फायदेमंद हो सकता है। जापान में किए गए एक शोध में यह बात सामने आई है। शोध अमेरिका में प्रकाशित हुआ है।
अमेरिकी हार्ट एसोसिएशन की पत्रिका में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, यदि आप नियमित रूप से ग्रीन टी और कॉफी का सेवन करते हैं तो इससे हृदयाघात का खतरा कम हो जाता है। जापान के नेशनल सेरेबरल एंड कार्डियोवैसक्युलर सेंटर के प्रमुख शोधकर्ता योशिहिरो कोकुबो ने कहा, ग्रीन टी और कॉफी के सेवन से हृदयाघात का खतरा कम होने के बारे में यह पहला व्यापक अध्ययन है।
नई दिल्ली। फेसबुक, ऑनलाइन चैटिंग, कम्प्यूटर गेम और टेलीविजन स्कूली बच्चों को नींद से वंचित कर रहे हैं। विश्व नींद दिवस के सिलसिले में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि फेसबुक और चैटिंग जैसे संवाद के नए माध्यमों के बढ़ते इस्तेमाल से स्कूली बच्चों के साथ बड़े लोग भी अनिंद्रा का शिकार हो रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने शोध के माध्यम से बताया कि बदलती जीवन शैली के कारण बड़े शहरों में करीब तीस प्रतिशत स्कूली बच्चे पूरी नींद नहीं ले पा रहे हैं। जिसके कारण वे एंग्जाइटी, डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन, याददाश्त की कमी, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, देर से प्रतिक्रिया देने, सीखने की क्षमता में कमी, तेजी से सोचने की क्षमता में कमी और गलतियों या दुर्घटनाओं से बचने की क्षमता में कमी, कई तरह के कार्यों को करने की क्षमता में कमी, उर्जा में कमी और थकावट महसूस होने जैसी कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त हो रहे हैं।

मेलबोर्न। ऑस्ट्रेलिया के मेलबोर्न में आयोजित आईएफबीबी ऑस्ट्रेलिया प्रो ग्रैंड प्रिक्स XIII में पोज देते हुए बॉडी बिल्डर। इस प्रतियोगिता में कई प्रतिभागियों ने अपनी बॉडी और फिटनेस का प्रदर्शन किया।
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वाशिंगटन। अमेरिका में एक घातक बैक्टीरिया के तेजी से संक्रमण फैलाने के अनेक मामले सामने आ रहे हैं। इस घातक संक्रमण पर रोग प्रतिरोधक दवाओं का भी कोई असर नहीं हो रहा है। अमेरिका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के डॉक्टरों ने कहा है कि अस्पताल और स्वास्थ्य कर्मियों को मरीजों को संक्रमण से बचाने के लिए जल्द से जल्द जरूरी उपाय करने होंगे।
सीडीसी के निदेशक टॉम फ्रिडेन ने कहा कि हमारी सबसे असरदार रोग प्रतिरोधक दवाएं भी असर नहीं दिखा पा रही हैं जिसकी वजह से मरीज लाइलाज संक्रमण से निकल नहीं पा रहे हैं। फ्रिडेन के मुताबिक, अब तक इस बैक्टीरिया से रक्त के जरिए संक्रमित मरीजों में से आधे मरीजों की जान जा चुकी है। संक्रमण के लिए अंतिम विकल्प के रूप में दी जाने वाली कार्बापेनेम श्रेणी की रोग प्रतिरोधक दवाओं का भी इस बैक्टीरिया पर कोई असर नहीं हो रहा है।

वाशिंगटन। मछली तेल से बने पूरक आहार की तुलना में मछली खाना स्वास्थ्य के लिए ज्यादा बेहतर होता है। हाल ही में हुए एक शोध में यह तथ्य सामने आया है।
हालांकि मछली तेल में पाया जाने वाला ओमेगा-3 वसा अम्ल मानव शरीर के स्नायु तंत्र, हृदय रक्षा प्रणाली जैसे विभिन्न तंत्रों को मजबूत बनाता है, लेकिन इसी तरह के एक वसा अम्ल 'डोकोसाहेक्जोनिक(डीएचए)' की प्रक्रिया विधि और उससे उत्पन्न होने वाला प्रभाव, स्वास्थ्य के लिहाज से अभी अनसुलझा व अनुत्तरित है।

हर महिला सुंदर दिखने के लिए कुछ ना कुछ नया करती हैं। जैसे कि ब्यूटी पॉर्लर जाना, चेहरे पर फेशियल करना साथ ही और न जाने कितने प्रयोग करने में भी संकोच नहीं करती हैं। एक समय था जब महिलाओं के लिए शादी के कुछ साल बाद तक ही सुंदर दिखना जरूरी समझा जाता था। लेकिन सौंदर्य के प्रति बढ़ती जागरुकता से अब महिलाएं अपने आपको हमेशा सुंदर बनाए रख सकती हैं।

नई दिल्ली। भरपूर धूप के बावजूद भारतीयों में विटामिन डी की कमी है। इससे भारतीयों की हड्डियां कमजोर हो रही हैं। इसी सप्ताह राज्यसभा में मनोनीत सदस्य एच.के. दुआ के एक प्रश्न का जवाब देते हुए स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने कहा कि भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा भारत में किए गए एक सर्वेक्षण से पता चला है कि प्रचुर धूप के बावजूद लोगों में विटामिन डी की कमी है।
उन्होंने कहा कि विटामिन की न्यूनता सभी उम्र समूहों में 10 से लेकर 90 फीसदी तक है। शरीर में विटामिन डी का संश्लेषण कई कारकों पर निर्भर करता है। मसलन, धूप की अवधि व समय, अक्षांश, पर्यावरणीय प्रदूषण और त्वचा का रंग।
सिडनी। मोटापे की शिकार महिलाओं द्वारा जन्म दिए गए बच्चों में हृदय रोग के प्रारंभिक लक्षण और धमनी का मोटा होना पाया गया। सिडनी विश्वविद्यालय में हुए एक नए अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है। हृदय रोग के प्रमुख कारक, शरीर की प्रमुख रक्तवाहिनियों में से एक बाईं धमनी का मोटा होना और नवजात शिशु के वजन पर निर्भर नहीं करता।
'आर्काइव्स ऑफ चाइल्डहुड' पत्र के फीटल एंड नीयोनेटल अंक में प्रकाशित रपट के अनुसार इस शोध के अध्ययनकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि इससे यह पता लगाया जा सकता है कि किस प्रकार मोटापे की शिकार माताएं अपने बच्चों के हृदय रक्तवाहिनियों से संबंधित रोगों की चपेट में आने के खतरे को बढ़ाने का काम करती हैं।









































































































