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ग्लोबल वार्मिंग से बचाएगी छोटी सी चींटी!


Published on Aug 04, 2014 at 09:32 | Updated Aug 04, 2014 at 10:28
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वाशिंगटन। चींटी हमें ग्लोबल वार्मिग से बचा सकती है। एक शोध के मुताबिक, चींटियों ने 6.5 करोड़ साल पहले अपनी उत्पत्ति के बाद से बड़ी मात्रा में हवा से कार्बन डाईऑक्साइट को सोखा है। एक चींटी का जीवन एक साल से अधिक का नहीं होता। लेकिन जैसे-जैसे उसकी संख्या बढ़ती है, वैसे वैसे वह वातावरण को ठंडा करने में मदद करती है।

टेंप शहर में स्थित अरिजोना स्टेट विश्वविद्यालय के एक भूगर्भशास्त्री रोनाल्ड डॉर्न ने कहा, कि चींटियां पर्यावरण को बदल रही हैं। डॉर्न ने पाया कि चींटियों की कुछ प्रजाति खनिज में हवा को सोख कर कैल्शियम कार्बोनेट या लाइमस्टोन बनाने में मदद करती है। लाइमस्टोन बनाने की प्रक्रिया में चींटी हवा से कार्बन डाईऑक्साइड की कुछ मात्रा घटा देती है।

1° पारा बढ़ने पर मलेरिया से होती है 65000 मौत!


Published on Aug 03, 2014 at 13:37 | Updated Aug 04, 2014 at 09:56
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नई दिल्ली। मलेरिया, डेंगू और हैजा जैसी बीमारियां जलवायु परिवर्तन के कारण कैसा कोहराम मचाती हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि धरती का तापमान यदि एक डिग्री सेल्सियस भी बढ़ता है तो मलेरिया 65 हजार लोगों की जान ले लेती है।

संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन से संबंधित सम्मेलन की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मानवीय गतिविधियां प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्षरूप से जलवायु परिवर्तन की वजह होती है और कुछ बीमारियां इस परिवर्तन की दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील हैं। एक अनुमान के अनुसार तापमान बढ़ने से सबसे अधिक मलेरिया फैलाता है और यदि धरती का तापमान एक डिग्री सेल्सियस भी बढ़ता है तो मलेरिया दुनिया में 64 हजार 475 लोगों की जान ले लेता है और इससे विश्व समुदाय को करीब तीन अरब डॉलर का नुकसान होता है।

हमेशा सही नहीं होते हेल्थ और फूड के ये फंडे!


Published on Aug 01, 2014 at 10:33
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लंदन। स्वास्थ्य संबंधी कई दिशा-निर्देश हैं, जिसका पालन हम सालों से करते आ रहे हैं। विशेषज्ञों ने मिथक बन चुके इन दिशा-निर्देशों का अब खुलासा किया है। वेबसाइट 'फीमेलफर्स्ट डॉट को डॉट यूके' पर ऑनलाइन बॉडी बिल्डिंग सप्लीमेंट प्रदाता नेचर्स बेस्ट न्यूट्रिशन के विशेषज्ञों ने इन मिथकों की सच्चाई से परदा उठाया है।

लंबे जीवन के लिए रोज खाएं फल और सब्जियां


Published on Jul 30, 2014 at 14:58
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न्यूयॉर्क। अगर आप बीमारी से मुक्त, खुशहाल और लंबी जिंदगी जीना चाहते हैं तो अपने आहार में फलों और सब्जियों की मात्रा बढ़ाकर, हर दिन इनकी कम से कम पांच खुराक लीजिए। एक नए शोध में मुताबिक, फल और सब्जियों के अधिक सेवन से सभी तरह की बीमारियों, खासतौर से दिल की बीमारियों के कारण होने वाली मृत्यु का खतरा कम होता है।

शोधकर्ताओं ने बताया, कि परिणाम दर्शाते हैं कि वर्तमान में फलों और सब्जियों का अधिक सेवन स्वास्थ्य और लंबी आयु को बढ़ावा देता है। शोध के लिए चीन और अमेरिका की टीम ने 8,33,234 प्रतिभागिायों और 56,423 लोगों के निधन से संबंधित 16 अध्ययनों का विश्लेषण किया।

चाय की एक प्याली आपको बनाए खूबसूरत!


Published on Jul 26, 2014 at 16:31
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लंदन।चाय का सेवन कुछ लोग थकान दूर करने तो कुछ आदतन करते हैं, लेकिन चाय की एक प्याली हमारे जीवन के अलग-अलग आयामों के लिए लाभदायक हो सकती है। वेबसाइट 'फीमेलफर्स्ट डॉट को डॉट यूके' के मुताबिक, हाल ही में किए गए एक वैज्ञानिक शोध में यह बात सामने आई है कि चाय मानसिक, भावनात्मक, सामाजिक और शारीरिक दृष्टिकोण से लाभदायी होती है।

वैज्ञानिकों ने हर किस्म के चाय से जुड़े स्वास्थ्य के सभी फायदे का परीक्षण किया, जिसमें पाया गया कि यह न सिर्फ शारीरिक सौंदर्य बल्कि वजन कम करने और त्वचा में नमी बरकरार रखने के लिए भी लाभदायी होती है। टी एडवायजरी पैनल के विशेषज्ञों ने चाय से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराई हैं। इनमें से कुछ इस प्रकार हैं-

अाधुनिक तकनीक से हो TB का इलाज!


Published on Jul 17, 2014 at 10:10 | Updated Jul 17, 2014 at 11:14
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वाशिंगटन। तपेदिक (टीबी) का मुफ्त और अत्यधिक प्रभावी इलाज मौजूद है, फिर भी भारत में हर साल इस बीमारी से हजारों लोग काल के गाल में समा जाते हैं। टीबी को लेकर हुए एक ताजा अध्ययन के अनुसार, देश में टीबी के कई मामलों की तो पुष्टि तक नहीं हो पाती, जिसका मुख्य कारण है निजी चिकित्सकों का बेहद लचर स्वास्थ्य सेवा तकनीक से लैस होना।

अध्ययन के शोधकर्ताओं का कहना है कि निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को टीबी की बेहतर तरीके से जांच के लिए उन्नत एवं अत्याधुनिक तकनीक उपलब्ध कराया जाना चाहिए, क्योंकि मरीज इलाज के लिए सबसे पहले वहीं पहुंचते हैं। अमेरिका के जॉन्स हॉपकिंस ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के मुख्य शोधकर्ता हेनरिक साल्जे ने कहा है कि भारत के अधिकांश लोग टीबी के शुरुआती दौर में निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के पास खांसी का इलाज कराने पहुंचते हैं।

पढ़े: कौन-कौन सी बीमारी से बचाती है तुलसी


Published on Jul 15, 2014 at 09:58
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लखनऊ। आयुर्वेद ही नहीं, अब एलोपैथी भी तुलसी के गुणों को मानने लगी है। विशेषज्ञों ने स्वीकार किया है कि तुसली मनुष्य के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होती है और मलेरिया, डेंगू, खांसी, सर्दी-जुकाम आदि विभिन्न जानलेवा बिमारियों से बचाती है। तुसली के इन्हीं गुणों से आकर्षित होकर कानपुर के जाजमऊ निवासी रामेश्वर कुशवाहा ने कई सालों तक इसके गुणों पर शोध किया और कुछ जड़ी-बूटियों का सम्मिश्रण विशेष पंच तुलसी अर्क (पंचामृत) तैयार किया। यह अर्क काफी लोगों को रोग मुक्त कर चुका है।

कुशवाहा बताते हैं कि 14 साल पहले तुलसी पौधों के गुणकारी नुस्खे उन्होंने आयुर्वेद की एक किताब में पढ़ी तो इस पर शोध की जिज्ञासा जगी। इसके बाद उन्होंने इस पर शोध शुरू किया। इस दौरान उन्होंने आसवन विधि से तुसली अर्क तैयार किया। इस अर्क से वह अलग-अलग बीमारियों का उपचार कर हजारों मरीजों को फायदा दिला चुके हैं।

कहीं सेहत न बिगाड़ दें चमकने वाले फल!


Published on Jul 15, 2014 at 08:33
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लखनऊ। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए अक्सर फलों को चमकाया जाता है। बाजार में बिक रहे ये फल कहीं आपकी सेहत न बिगाड़ दें! फलों में चमक लाने के लिए वार्निश जैसे रसायनों का इस्तेमाल धड़ल्ले से हो रहा है। कार्बेट पाउडर का भी व्यापारी धड़ल्ले से उपयोग कर रहे हैं। चिकित्सकों की मानें तो इससे मानव शरीर में टॉक्सिन की मात्रा बढ़ती जाती है और यह लीवर व किडनी को भी नुकसान पहुंचाता है।

चिकित्सकों के अनुसार, शरीर में फल व जूस ही मिनरल पहुंचाते हैं। दुकानदार खुलेआम फलों को चमकाने की चाह में उस पर पॉलिश और पकाने के लिए कार्बेट का इस्तेमाल कर रहे हैं। जाहिर है कि अगर इसे बिना धुले खाया गया तो खाने वाले की सेहत बनने के बजाय बिगड़ेगी। ऐसे फलों के खाने से इसमें मौजूद केमिकल शरीर के अंदर जाकर शरीर के ऑर्गन को खराब कर सकते हैं। खासकर सबसे ज्यादा केमिकल युक्त फलों के सेवन से लीवर खराब हो जाता है। बाद में इसका प्रभाव शरीर के और हिस्सों मे पड़ने लगता है।

मधुमेह समेत कई रोगों में रामबाण है जामुन


Published on Jul 13, 2014 at 13:31
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लखनऊ। फल मंडियों में आम के साथ-साथ आजकल धूम मचा रहे खूबसूरत जामुन में इसके औषधीय गुण चार चांद लगाते हैं क्योंकि यह महामारी का रुप ले रही मधुमेह समेत कई बीमारियों के इलाज में रामबाण का काम करता है।

जामुन में एंटी ऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं। इसके सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है। यह पाचन तंत्र के लिए लाभकारी है। खास बात यह है कि डायबिटीज से पीड़ित लोग भी इसका सेवन कर सकते हैं। हल्का मीठा होने के बावजूद यह डायबिटीज में लाभकारी है। जामुन में फलेवोनॉइड्स, फेनॉल्स प्रोटीन और कैल्शियम भी पाया जाता है। जो सेहत के लिए पायदेमंद होता है। फल वैज्ञानिकों के अनुसार इसमें केरोटीन, आयरन, फोलिक एसिड, पोटेशियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और सोडियम भी पाया जाता है। इस वजह से यह शुगर लेवल मेंटेन रखता है।

आपकी स्किन भी सूंघ सकती है चंदन की खुशबू!


Published on Jul 10, 2014 at 09:26
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लंदन| गंध को सूंघने की क्षमता केवल नाक में ही नहीं होती। त्वचा कोशिकाओं में चंदन की खुशबू सूंघने के तत्व मौजूद होने की खोज हुई है। अगर इन अभिग्राहकों (ओलफैक्ट्री रिसेप्टर) को सक्रिय किया जाए, तो न केवल कोशिकाओं का प्रजनन तेजी से होता है, बल्कि घाव भरने में भी सहायता मिलती है।

जर्मनी के बोकम स्थित रूर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हंस हट् का कहना है कि अब तक के परिणामों से पता चलता है कि उनमें चिकित्सकीय और कॉस्मेटिक क्षमता है। निष्कर्ष के अनुसार, त्वचा की बाहरी स्तरों को बनाने वाली 'किरेटिनोसाइट्स' कोशिकाओं में घ्राण अभिग्राहक होते हैं। शोधकर्ताओं ने त्वचा में मौजूद घ्राण अभिग्राहकों 'ओआर2एटी4' का अध्ययन किया। खोज में यह बात सामने आई कि इसे कृत्रिम चंदन की खुश्बू 'सैंडलोर' से सक्रिय किया जा सकता है। यह अध्ययन पत्रिका 'इंवेस्टिगेटिव डरमेटोलॉजी' में प्रकाशित हुआ है।





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भारत की 80 फीसदी आबादी विटामिन डी की कमी से पीड़ित है, जिसके कारण उन्हें मधुमेह, हृदय रोग जैसी बीमारियों का खतरा है। विशेषज्ञों ने आज यह जानकारी दी।
भारत में इस तरह का यह पहला ऑपरेशन है। मुख्य हृदय रोग विशेषज्ञ (शिशु) डॉ. के. नागेश्वर राव के नेतृत्व में आठ चिकित्सकों के दल ने ऑपरेशन किया।
प्राण योग के विशेषज्ञ दीपक झा ने बताया कि योग के जरिए धूम्रपान की लत से छुटकारा पाने में आसानी होती है। योग, धूम्रपान छोड़ने का एक समग्र समाधान है।
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भारत में इस तरह का यह पहला ऑपरेशन है। मुख्य हृदय रोग विशेषज्ञ (शिशु) डॉ. के. नागेश्वर राव के नेतृत्व में आठ चिकित्सकों के दल ने ऑपरेशन किया।
प्राण योग के विशेषज्ञ दीपक झा ने बताया कि योग के जरिए धूम्रपान की लत से छुटकारा पाने में आसानी होती है। योग, धूम्रपान छोड़ने का एक समग्र समाधान है।
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हैल्थ

भारत की 80 फीसदी आबादी विटामिन डी की कमी से पीड़ित है, जिसके कारण उन्हें मधुमेह, हृदय रोग जैसी बीमारियों का खतरा है। विशेषज्ञों ने आज यह जानकारी दी।
भारत में इस तरह का यह पहला ऑपरेशन है। मुख्य हृदय रोग विशेषज्ञ (शिशु) डॉ. के. नागेश्वर राव के नेतृत्व में आठ चिकित्सकों के दल ने ऑपरेशन किया।
प्राण योग के विशेषज्ञ दीपक झा ने बताया कि योग के जरिए धूम्रपान की लत से छुटकारा पाने में आसानी होती है। योग, धूम्रपान छोड़ने का एक समग्र समाधान है।
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