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कहीं सेहत न बिगाड़ दें चमकने वाले फल!


Published on Jul 15, 2014 at 08:33
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लखनऊ। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए अक्सर फलों को चमकाया जाता है। बाजार में बिक रहे ये फल कहीं आपकी सेहत न बिगाड़ दें! फलों में चमक लाने के लिए वार्निश जैसे रसायनों का इस्तेमाल धड़ल्ले से हो रहा है। कार्बेट पाउडर का भी व्यापारी धड़ल्ले से उपयोग कर रहे हैं। चिकित्सकों की मानें तो इससे मानव शरीर में टॉक्सिन की मात्रा बढ़ती जाती है और यह लीवर व किडनी को भी नुकसान पहुंचाता है।

चिकित्सकों के अनुसार, शरीर में फल व जूस ही मिनरल पहुंचाते हैं। दुकानदार खुलेआम फलों को चमकाने की चाह में उस पर पॉलिश और पकाने के लिए कार्बेट का इस्तेमाल कर रहे हैं। जाहिर है कि अगर इसे बिना धुले खाया गया तो खाने वाले की सेहत बनने के बजाय बिगड़ेगी। ऐसे फलों के खाने से इसमें मौजूद केमिकल शरीर के अंदर जाकर शरीर के ऑर्गन को खराब कर सकते हैं। खासकर सबसे ज्यादा केमिकल युक्त फलों के सेवन से लीवर खराब हो जाता है। बाद में इसका प्रभाव शरीर के और हिस्सों मे पड़ने लगता है।

मधुमेह समेत कई रोगों में रामबाण है जामुन


Published on Jul 13, 2014 at 13:31
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लखनऊ। फल मंडियों में आम के साथ-साथ आजकल धूम मचा रहे खूबसूरत जामुन में इसके औषधीय गुण चार चांद लगाते हैं क्योंकि यह महामारी का रुप ले रही मधुमेह समेत कई बीमारियों के इलाज में रामबाण का काम करता है।

जामुन में एंटी ऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं। इसके सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है। यह पाचन तंत्र के लिए लाभकारी है। खास बात यह है कि डायबिटीज से पीड़ित लोग भी इसका सेवन कर सकते हैं। हल्का मीठा होने के बावजूद यह डायबिटीज में लाभकारी है। जामुन में फलेवोनॉइड्स, फेनॉल्स प्रोटीन और कैल्शियम भी पाया जाता है। जो सेहत के लिए पायदेमंद होता है। फल वैज्ञानिकों के अनुसार इसमें केरोटीन, आयरन, फोलिक एसिड, पोटेशियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और सोडियम भी पाया जाता है। इस वजह से यह शुगर लेवल मेंटेन रखता है।

आपकी स्किन भी सूंघ सकती है चंदन की खुशबू!


Published on Jul 10, 2014 at 09:26
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लंदन| गंध को सूंघने की क्षमता केवल नाक में ही नहीं होती। त्वचा कोशिकाओं में चंदन की खुशबू सूंघने के तत्व मौजूद होने की खोज हुई है। अगर इन अभिग्राहकों (ओलफैक्ट्री रिसेप्टर) को सक्रिय किया जाए, तो न केवल कोशिकाओं का प्रजनन तेजी से होता है, बल्कि घाव भरने में भी सहायता मिलती है।

जर्मनी के बोकम स्थित रूर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हंस हट् का कहना है कि अब तक के परिणामों से पता चलता है कि उनमें चिकित्सकीय और कॉस्मेटिक क्षमता है। निष्कर्ष के अनुसार, त्वचा की बाहरी स्तरों को बनाने वाली 'किरेटिनोसाइट्स' कोशिकाओं में घ्राण अभिग्राहक होते हैं। शोधकर्ताओं ने त्वचा में मौजूद घ्राण अभिग्राहकों 'ओआर2एटी4' का अध्ययन किया। खोज में यह बात सामने आई कि इसे कृत्रिम चंदन की खुश्बू 'सैंडलोर' से सक्रिय किया जा सकता है। यह अध्ययन पत्रिका 'इंवेस्टिगेटिव डरमेटोलॉजी' में प्रकाशित हुआ है।

रमजान में डायबिटीज रोगी इन बातों का रखें ध्यान!


Published on Jul 08, 2014 at 10:42 | Updated Jul 08, 2014 at 16:57
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नई दिल्ली| दुनियाभर में मुस्लिम रमजान के पाक महीने में रोज़े रखते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने मधुमेह पीड़ित लोगों को रमजान के दौरान अपने स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि देर तक भूखे रहने की वजह से मधुमेह पीड़ितों का चयापचय बदल जाता है क्योंकि वे लंबे समय तक कुछ नहीं खाते।

फोर्टिस सी-डॉक के वरिष्ठ परामर्शदाता चिकित्सक अतुल लूथरा ने कहा कि चयापचय का बदलना देर तक भूखे रहने का नतीजा है, जो आहार और दवा समायोजन के संदर्भ में मधुमेह प्रबंध योजना को जरूरी बना देता है। रमजान के दौरान अधिकांश लोग 12 से 15 घंटों के अंतराल में दो बार भारी भोजन करते हैं।

रक्तदान कीजिए, स्वस्थ रहेगा आपका दिल!


Published on Jul 04, 2014 at 12:54
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लंदन। अगर आप शिफ्ट के हिसाब से काम करते हैं तो रक्तदान एक ऐसा आसान तरीका है जिससे आप हृदय रोग के खतरों को घटा सकते हैं। यह जानकारी एक अध्ययन में दी गई है।

पारियों में काम करने वाले कामगारों में हृदय रोग के मामलों का दर उच्च देखा गया है। इसका कारण संभवत: थकान हो सकती है जिससे शरीर की जैविक घड़ी बाधित होती है और उसका खून में मौजूद लाल रक्त कणिकाओं पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।

जानकारी: स्किन कैंसर से नहीं बचाती सन्सक्रीन!


Published on Jul 03, 2014 at 10:35 | Updated Jul 03, 2014 at 13:38
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न्यूयॉर्क| जब त्वचा कैंसर से खुद को बचाने की बात हो, तो मन में थोड़ा डर होना जरूरी है। शोधकर्ताओं का कहना है कि त्वचा कैंसर के डर और चिंता से ग्रस्त लोग इस बीमारी के उत्पन्न होने की वजहों को जानने और सावधानी बरतने के बजाय त्वचा पर सन्सक्रीन लगाने का विकल्प चुनते हैं।

अमेरिका में यूनिवर्सिटी ऑफ बफ्फेलो में सहायक प्रोफेसर मार्क कीविनेमी ने कहा कि शोध में पता चला कि चिकित्सक लोगों को सन्सक्रीन के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करने के दौरान मरीज की भावनाओं को ज्यादा ध्यान में रखना चाहते हैं। शोध के तहत करीब 1,500 लोगों से उनके सन्सक्रीन इस्तेमाल से संबंधित प्रश्न पूछे गए। इन लोगों को व्यक्तिगत रूप से त्वचा के कैंसर का अनुभव नहीं था। प्रतिभागियों से त्वचा कैंसर के खतरे का अनुमान लगाने और इस बारे में उनकी चिंता से संबंधित प्रश्न पूछे गए।

आफत बना फास्टफूड!


Published on Jun 30, 2014 at 10:59 | Updated Jun 30, 2014 at 11:56
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कानपुर। व्यस्त जीवनशैली के बीच तेजी से पनपती फास्ट फूड संस्कृति लोगों की हड्डियों को दीमक की तरह चाट रही है जिससे देश में हड्डियां खोखली कर देने वाली बीमारी ओस्टियोपोरोसिस महामारी का रूप धारण करती जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आकड़ों के अनुसार साल 2003 तक भारत में ओस्टियोपोरोसिस के मरीजों की संख्या करीब चार करोड़ थी। अगले दशक के मध्य तक यह आंकड़ा नौ करोड़ तक पहुंचने की आशंका है।

मालूम हो कि ओस्टियोपोरोसिस में हड्डियों का आकार घटने लगता है। वृद्धावस्था में 60 और 65 साल की आयु के बीच इस मर्ज से ग्रसित होने की आशंका ज्यादा रहती है।

दुनिया में 27 लाख लोग नशीली दवाओं की गिरफ्त में!


Published on Jun 30, 2014 at 08:42 | Updated Jun 30, 2014 at 13:56
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नोएडा। दुनिया में 27 लाख लोग गंभीर रूप से नशीली दवाओं का इस्तेमाल करते हैं, जिनमें से 250,000 लोगों की मौत हो जाती है। यह जानकारी रविवार को एक सेमिनार में डॉ. विनोद कुमार ने दी। आईटीएस डेंटल कॉलेज में नशीली दवाओं के खिलाफ आयोजित सेमिनार में सेंट स्टीफन हॉस्पिटल के जनरल मेडिसिन के विभागाध्यक्ष डॉ. कुमार ने बतौर मुख्य वक्ता नशीली दवाओं से होने वाले शारीरिक, व्यावहारिक लक्षणों के बारे में बताया।

उन्होंने कहा कि सुस्त दिखना, नाक बहना, झुर्रियां दिखना, भार कम होना, गैर जिम्मेदाराना व्यवहार, बहस करना, प्रेरणा की कमी होना जैसे व्यवहार व लक्षणों को देखकर जल्द इलाज कराना चाहिए। कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. पुनीत आहुजा ने कहा कि नशीली दवाओं को हमें समाज हटाने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए और सरकार को नशीली दवाओं के खिलाफ कठोर कानून को लागू करना चाहिए।

जितनी ज्यादा टीवी देखेंगे, उतनी जल्दी मौत!


Published on Jun 26, 2014 at 20:34 | Updated Jun 26, 2014 at 20:59
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वाशिंगटन। एक नए शोध में कहा गया है कि एक दिन में लगातार तीन घंटे या उससे ज्यादा समय तक टेलीविजन देखने वाले लोगों में अकाल मृत्यु का जोखिम अपेक्षाकृत कम टेलीविजन देखने वालों की तुलना में दोगुना होने की आशंका रहती है।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के शोधकर्ताओं ने तीन किस्म के सुस्त व्यवहार और सभी वजहों: टेलीविजन देखने के समय, कंप्यूटर पर काम करने के समय और वाहन चलाने के समय से होने वाली मौत के खतरे के बीच का संबंध पता लगाने के लिए स्पैनिश यूनिवर्सिटी के 13 हजार 284 युवा एवं सेहतमंद स्नातकोत्तरों का मूल्यांकन किया।

फिट रहना है तो आसपास का वातावरण रखें ठंडा


Published on Jun 24, 2014 at 09:41
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मेलबर्न। एक अध्ययन में पता चला है कि ठंडे वातावरण में रहने से स्वस्थ रहा जा सकता है। अध्ययन के अनुसार, शांत वातावरण ब्राउन फैट को बढ़ने से रोकता है, जो गर्मी पैदा करने के लिए ऊर्जा खर्च करता है और इस तरह मधुमेह और मोटापे के खतरे को कम करता है। अध्ययन में पता चला है कि परिवेश का तापमान मनुष्यों में ब्राउन फैट के बढ़ने या घटने पर प्रभाव डालता है। ठंडे वातावरण में ब्राउन फैट बढ़ने की संभावना कम होती है, जबकि गर्म वातावरण नुकसानदेह होता है।

ऑस्ट्रेलिया के गारवन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल रिसर्च में एंडोक्राइनोलॉजिस्ट पॉल ली ने कहा कि इस अध्ययन से पहले तक हमें यह नहीं पता था कि क्या ब्राउन फैट को मानव शरीर में बढ़ाया या घटाया जा सकता है? ली ने कहा कि हमें पता चला कि इंसुलीन की संवेदनशीलता और ब्राउन फैट भविष्य में ग्लूकोज के मेटाबॉलिज्म के उपचार में नए आयाम खोल सकता है। यह शोध जर्नल डायबिटीज में प्रकशित हुई है।





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हैल्थ

अगर आपकी उम्र 60 के ऊपर है, तो हर रोज शराब के एक या दो पैग का सेवन आपकी याददाश्त बढ़ाने में मददगार हो सकता है। यह जानकारी एक शोध में सामने आई है।
मौसम में अचानक बदलाव से आंख की बीमारी से बड़ी संख्या में लोग परेशान हो रहे हैं। इस मौसम में आंखों में लाली, पानी गिरना, सूजन व खुजली से लोग परेशान हैं।
क्या आप मां बनने वाली हैं? यह तो खुशी की बात है, मगर दिवाली में पटाखों से निकलने वाला धुआं, धमाके की आवाज और कठोर रसायन गर्भवती महिलाओं के लिए हानिकारक होते हैं।
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अगर आपकी उम्र 60 के ऊपर है, तो हर रोज शराब के एक या दो पैग का सेवन आपकी याददाश्त बढ़ाने में मददगार हो सकता है। यह जानकारी एक शोध में सामने आई है।
मौसम में अचानक बदलाव से आंख की बीमारी से बड़ी संख्या में लोग परेशान हो रहे हैं। इस मौसम में आंखों में लाली, पानी गिरना, सूजन व खुजली से लोग परेशान हैं।
क्या आप मां बनने वाली हैं? यह तो खुशी की बात है, मगर दिवाली में पटाखों से निकलने वाला धुआं, धमाके की आवाज और कठोर रसायन गर्भवती महिलाओं के लिए हानिकारक होते हैं।
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