

हाथरस। सिटिजन जर्नलिस्ट अजय शर्मा ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि उत्तरप्रदेश के हाथरस जिले में एक नहर को बचाने के लिए करोड़ों रुपये जारी हुए लेकिन उन पैसों का इस्तेमाल कहां हुआ किसी को नहीं पता। (वीडियो देखें)

जम्मू। जम्मू के कठुआ इलाके में आबादी के बीच एक ऐसा रेल ट्रैक है जहां रेलवे प्रशासन बरसों से एक रेल फाटक नहीं बनवा पा रहा है। फिर भी सिटीजन जर्नलिस्ट मोहिंदर सिंह प्रशासन से लोगों की जान बचाने के लिए जंग लड़ रहे है। (वीडियो देखें)

गाजियाबाद। सार्वजनिक जगाहों पर अवैध धार्मिक स्थल सभी शहरों की समस्या बनते जा रहे हैं। इनके खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत कोई नहीं करता। लेकिन गाजियाबाद की सिटीजन जर्नलिस्ट शशिकांता अपनी जान जोखिम में डालकर ऐसे ही एक अवैध निर्माण को रुकवाने के लिए संघर्ष कर रही हैं। (वीडियो देखें)

दमोह। दमोह मध्य प्रदेश के दमोह में पानी की भारी किल्लत की वजह से प्रशासन टैंकरों के जरिए रोज नागरिकों को पानी उपलब्ध कराता है। इस पर जो खर्च आता है उसे कागजों पर कई गुना दिखा कर सरकारी अधिकारी अपनी जेबें भर रहे हैं। सिटिजन जर्नलिस्ट अनुराग हजारी पिछले 11 साल से पानी के माफिया के खिलाफ जंग लड़ रहे है। (वीडियो देखें)

मुंबई। मुंबई से सटे मीरा भायंदर इलाके के लोग एक समस्या से लंबे वक्त से जूझ रहे हैं। ऑटो वालों की मनमानी यहां के लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन चुकी है लेकिन सीजे रवींद्र रघुवंशी ऑटो रिक्शा चालकों की मनमानी के खि़लाफ़ लगातार लड़ाई लड़ रहे हैं।
ठाणे डिस्ट्रिक का मीरा भायंदर इलाक़ा, शहरों की तरह यहां भी ऑटो रिक्शा चलते हैं लेकिन वो किसी कानून को नहीं मानते। सवारियों से पैसा वो अपनी मर्ज़ी से वसूलते हैं। लोगों की इस समस्या के लिये रवींद्र रघुवंशी लड़ाई लड़ रहे हैं लेकिन प्रशासन शायद इसे समस्या ही नहीं मानता। यहां आप किसी भी ऑटो में बैठें लेकिन किराया ऑटो वाले की मर्ज़ी से देना होगा क्योंकि ऑटो वाले मीटर से नहीं चलते। लगभग एक किलोमाटर के लिये सवारी से 40 से 50 रुपये मांगे जाते हैं। शायद पूरे देश में इतना मंहगा ऑटो किराया कहीं नहीं होगा। अगर आप मीटर से चलने के लिये दबाव बनाते हैं तो आपसे मार-पीट भी की जा सकती है।

सुल्तानपुर। किसानों की मदद के लिए ही ज़िला सहकारी बैंकों को शुरू किया गया था लेकिन सुल्तानपुर सहकारी बैंक का खजाना ख़ाली हो चुका है और खाताधारक सड़क पर आ गए हैं क्योंकि जिनका पैसा जमा है उन्हें वो मिल ही नहीं रहा है। हमारे सिटिज़न जर्नलिस्ट हृदय राम वर्मा तमाम खाताधारकों की आवाज़ बन कर लंबे समय से लड़ाई लड़ रहे है।
सुल्तानपुर का जिला सहकारी बैंक जो अब दिवालिया होने की कगार पर है। इसके ग्राहक जिनका लाखों रुपये यहां जमा था अपनी गाढ़ी कमाई हासिल करने के लिये इधर उधर धक्के खा रहे हैं। बैंक की इस बदहाली की वजह भी सुन लीजिए। 2004 में केंद्र सरकार ने किसानों का कर्ज़ माफ़ कर दिया। इस प्रक्रिया में सहकारी बैंक ने किसानों का लगभग 74 करोड़ रु माफ़ किया। बाद में ये राशि केंद्र सरकार से बैंक को मिलनी थी लेकिन वो पैसा आज तक सुल्तानपुर सहकारी बैंक को नहीं मिला।

कानपुर। कानपुर में बेघर ग़रीबों के लिये सरकार ने फ्लैट बना दिये हैं जिनकी हालत ये है कि लोग रहने से डरते हैं। जो रह रहे हैं उनमें से कई लोग छतें ढहने से जख्मी हो चुके हैं। कानपुर की मलिन बस्ती में रहने वाले कमलेश बताते हैं करीब 7O साल पुरानी इस बस्ती में करीब पंद्रह हजार लोग रहते हैं। 1980 में केंद्र सरकार ने देश भर में मलिन बस्ती मालिकाना हक नाम से एक योजना लागू की थी। इस बस्ती को भी इस योजना में शामिल किया गया। मालिकाना हक देने की प्रक्रिया भी शुरू की गई लेकिन फिर सब कुछ ठप्प पड़ गया।
कई साल बाद सरकार को फिर मलिन बस्तियों की याद आयी। 15 जनवरी 2009 में उत्तर प्रदेश सरकार ने

नई दिल्ली। दिल्ली से सिटीजन जर्नलिस्ट विशाल ने ये वीडियो भेजा है। ये वीडियो कश्मीरी गेट मेट्रो पर हुई लापरवाही को उजागर करता है।(वीडियो देखें)

हाथरस। ताज महल के आस पास के एक निर्धारित क्षेत्र में प्रदूषण फैलाने वाले तमाम कारखानों पर पाबंदी है। हाथरस शहर का एक बड़ा हिस्सा इस दायरे में आता है लेकिन इस इलाके में धड़ल्ले से अवैध दाल मिले चल रही हैं। सीजे गौरव अग्रवाल ने जब इन कारखानों के खिलाफ आवाज उठाई, तो प्रशासन ने उनके लिए ही मुश्किलें बढ़ाना शुरू कर दीं। लेकिन हमारे सीजे फिर भी डटे हुए हैं। (वीडियो देखें)

मथुरा। मथुरा के सिटीजन जर्नलिस्ट गोर निताई की बेटी को लापता हुए 2 साल बीत गए। उनकी लगातार कोशिश की और दो साल बाद अब पुलिस इस मामले में कार्रवाई करने पर मजबूर हो गई। (वीडियो देखें)






















































