

राजीव मसंद
मुंबई। करिश्मा कपूर ने विक्रम भट्ट की फिल्म ‘डेंजरस इश्क’ से बॉलीवुड में वापसी की। फिल्म में उनकी एक्टिंग भी अच्छी रही लेकिन वो फिल्म की कमियों को ढकने के लिए काफी नहीं थी। यही वजह है कि फिल्म समीक्षक राजीव मसंद फिल्म को पांच में से महज डेढ़ नंबर देते हैं। क्या कारण रहे मसंद के इतने कम नंबर देने के ये जानने के लिए वीडियो देखें।

मुंबई। उत्तर भारत के एक काल्पनिक शहर में बसी ये फिल्म है दो राजनीतिक परिवारों चौहान और कुरैशी के बीच की लड़ाई के बारे में है जो आने वाले चुनावों में जीत हासिल करने के लिए एक दूसरे के जानी दुश्मन बने हुए हैं। इसी गहमागहमी के बीच निर्देशक हबीब फैजल अपनी रोमियो जूलियट की कहानी बनाते हैं।
फिल्म में अर्जुन कपूर चौहान खानदान के सबसे बड़े बेटे परमा के किरदार में है जो आसपास के दुकानदारों को लूटता है और उनकी दुकानों में आग लगा देता है। परिणिति चोपड़ा जोया के किरदारा में है जो कुरैशी परिवार की बेटी है जिसे बंदूकों को शौक है। ज्यादातर हिंदी फिल्मों की तरह फिल्म की शुरुआत गलत तरीके से होती है। पहले दोनों मुख्य किरदारों में लड़ाई होती है और फिर प्यार हो जाता है।

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नई दिल्ली। जाने-माने फिल्म समीक्षक राजीव मसंद ने की हॉलीवुड की 3डी फिल्म यूगो की समीक्षा और दिए पांच में से साढ़े चार नंबर। क्यों और कैसे ये जानने के लिए वीडियो देखें।

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नई दिल्ली। जाने-माने फिल्म समीक्षक राजीव मसंद ने की रणवीर शौरी और गुल पनाग की फिल्म फैटसो की समीक्षा और दिए पांच में से दो नंबर। क्यों और कैसे ये जानने के लिए वीडियो देखें।

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नई दिल्ली। जाने-माने फिल्म समीक्षक राजीव मसंद ने की इमरान हाशमी और ईशा गुप्ता की फिल्म जन्नत-2 की समीक्षा और दिए पांच में से ढाई नंबर। क्यों और कैसे ये जानने के लिए वीडियो देखें।

मुंबई (राजीव मसंद)। कॉमिक बुक फैंस जो ‘द एवेंजर्स’ के आने के इंतजार में इंटरनेट पर इससे जुड़ी हर खबर पर नजर गडा़ए थे, ये जान कर खुश होंगे कि ‘द एवेंजर्स’ इनकी उम्मीदों से कहीं ज्यादा बेहतर है। सच तो यह है कि आप भले ही मार्वल यूनिवर्स और उसके सुपरहीरोज से वाकिफ ना हों पर फिर भी बड़े पर्दे पर इनके किरदारों को देख कर वाहवाही करना नहीं भूलेंगे।
फिल्मों को चाहने वालों को आयरन मैन, हल्क, कैप्टन अमेरिका, और थॉर जैसी फिल्मों को दिखाने के बाद इन सभी को एक साथ पर्दे पर लाना एक बड़ा फैसला है। लेखक डायरेक्टर जॉस व्हेडन ने इस चैलेंज को बखूबी लिया है। फिल्म में इन सभी हीरो को अपने आप को भुलाकर एक दुश्मन से लड़ना है।

मुंबई (राजीव मसंद)। अच्छा है कि प्रियदर्शन खुद को अपनी फिल्मों का निर्देशक नहीं बताते, इसके बजाय वो फिल्म के अंत में लिखते हैं प्रियदर्शन द्वारा फिल्माई गई। फिल्म ‘तेज’ में भी उनका योगदान महज शूट करने तक सीमित है। इसे जापानी फिल्म ‘द बुलेट ट्रेन’ से कॉपी किया गया लगता है।
अजय देवगन लंदन में काम करने वाले इंजीनियर हैं जिन्हें इमिग्रेशन के कानून का पालन ना करने की वजह से लंदन से वापस भारत भेज दिया जाता है। सालों बाद वो लंदन इस बात का बदला लेने वापस आते हैं कि उनकी पत्नी कंगना रनाउत को उनसे अलग कर दिया गया था।

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मुंबई। किसी भी एक्शन फिल्म को जज करने के मापदंड उसमें होने वाले धमाके ही हैं तो मैं कहना चाहूंगा कि निर्देशक पीटर बर्ग की ‘बैटलशिप’ सबसे ऊपर के पायदान पर खड़ी नजर आती है। बर्ग माइकल बे से प्रेरित होकर एक शोरभरी पर काफी बोरिंग फिल्म बनाते हैं।
ये फिल्म ‘ट्रांसफोर्मर्स आन दी हाई सीज’ के तौर पर भी काम कर सकती है। ये शायद इत्तफाक ही हो कि दोनों फिल्में हसबोरो गेम पर आधारित है।

मुंबई। ये कहना मुश्किल है कि दर्शकों को ‘बिट्टू बॉस’ में क्या ज्यादा पसंद आता है। फिल्म का प्यारा सा हीरो या फिर उसका विडियो कैमरा। फिल्म का मुख्य किरदार एक छोटे से गांव आनंदपुर में अपने इलाके का हीरो है जिसके बिना हर शादी अधूरी है।
जैसे ही ये हीरो कैमरा घुमाता हुआ किसी भी शादी में एंट्री लेता है तो चारों तरफ रोशनी हो जाती है। तो आप समझ ही सकते हैं कि बिट्टू यानी पुल्कित सम्राट कोई आम फोटोग्राफर नहीं है। पर अफसोस निर्देशक सुपवित्र बाबुल कहानी की शुरुआत तो अच्छे से करते हैं पर फिर फिल्म का दूसरा भाग कुछ पाठ पढ़ाता सा लगता है और घिसा पिटा लगने लगता है।
फिल्म तब मोड़ लेती है जब अमृता पाठक जिसे बिट्टू पसंद करता है उसे उसकी साधारण सी सोच और काम के लिए काफी बेइज्जत करती है। और इसके बाद बिट्टू पैसा कमाने के लिए पॉर्न विडियो शूट करने का फैसला लेता है। फिल्म के अंत में आपको प्यार और सेक्स पर एक लंबी सी स्पीच सुनने को मिलेगी। स्पीच के इर्द गिर्द का खोखलापन शायद आपको अच्छा ना लगे। यहां परेशानी ये नहीं कि फिल्म क्या कहती है पर परेशनी ये है कि कैसे कहती है।

मुंबई। ये देखना बहुत ही मजेदार लगता है कि हाउसफुल-2 का सबसे हंसाने वाला चुटकुला फिल्म खत्म होने के बाद आता है। फिल्म के अंत में अक्षय कुमार आसिन को अपने पिता से मिलवाने ले जाता है जो एक घटिया सा आदमी है जिसका किरदार निभाया है रंजीत ने। निर्देशक साजिद खान की फिल्म हाउसफुल-2 जाहिर तौर पर अपनी पिछली फिल्म से काफी बड़ी है, पर इसे बेहतर बिल्कुल भी नहीं कहा जा सकता।
मुझसे अगर पूछा जाए कि हाउसफुल और हाउसफुल-2 में मुझे कौन सी फिल्म बेहतर लगी तो मैं कहूंगा कि ये ऐसा होगा जैसे माइग्रेन के दर्द और हरनिया में से आप किसे चुनेंगे। ये बोर सा सीक्वल फिर वही सड़कछाप ह्यूमर ले कर आता है। ऋषि कपूर और रणधीर कपूर हमेशा झगड़ने वाले सौतेले भाई के किरदार में हैं और इन्हें तलाश है एक अमीर दूल्हे कि अपनी बेटी आसिन और जैक्लीन के लिए।






















