नई दिल्ली। फैशन जगत की बात करते ही जहन में एक ऐसी दुनिया की तस्वीर सामने आ जाती है जहां हर तरफ चकाचौंध कर देने वाली रोशनी तालियों की गडगड़हट, रेम्प पर जलवा बिखेरती खुबसूरत मॉडल्स दिखाई देती है।
लेकिन इस हकीकत की जिंदगी उतनी ही छोटी है। ऐसा करियर जो मॉडल्स का ताउम्र साथ नहीं दे सकता। आखिर करियर की चमक फीकी होने पर क्या करें हसीन बालाएं। इसी का हल ढूंढने के लिए सामने आया है FASHION DESIGN COUNCIL OF INDIA.
रैंप पर केटवॉक करतीं मॉडल्स के पास नेम फेम और सक्सेस होता है। लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए इनको कितने पापड़ बेलने पड़ते हैं इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। सालों की मशक्कत के बाद रैंप पर जलवे बिखेरने का मौका मिलता है।
लेकिन ये जलवा कितने दिन रहेगा। इस सवाल का जवाब किसी मॉडल के पास नहीं है। चार दिन की चांदनी कब अंधेरी रात में तब्दील जाएगी और फिर क्या होगा। यही सवाल फैशन जगत की मल्लिकाओं के जहन में कोंदता रहता है।
ग्लैमर की दुनिया को अलविदा कहना इनके लिए खुदकुशी से कम नहीं है। हजारों मॉडल्स की इसी परेशानी को समझते हुए FASHION DESIGN COUNCIL OF INDIA ने ऐसी मॉडल्स को RE-ESTABLISH करने का बीड़ा उठाया है। जिसके तहत मॉडलिंग का करियर खत्म होने पर उनको इसी इंडस्ट्री में काम और दाम मिल सके।
फैशन इंडस्ट्री में करियर जरूर चमकदार होता है लेकिन उसकी उम्र भी उतनी कम होती है। करियर खत्म होते ही मॉडल्स को दूसरा करियर चुनना बहुत ही मुश्किल होता होता है। क्योंकि रोजाना की चमचमाती जिंदगी को छोड़कर दूसरा काम करना उनके लिए आसान नहीं होता।
कम उम्र में मॉडलिंग की शुरुआत करने वाली मॉडल कुछ सालों में ही फेड आउट होने लगती हैं। बढती उम्र के साथ उनकी जगह दूसरी कम उम्र की मॉडल्स लेने लगती हैं। ऐसे में खुद को साबित करना अपनी मार्केट वैल्यु बरकरार रखने का प्रेशर उनको झेलना पड़ता है।
इसमें कोई दो राय नहीं कि एक मॉडल की जिंदगी बहुत कम होती है। बहुत कम मॉडल्स ही इस मिथ तोड़ पाने में कामयाब रहती हैं। ऐसे में फैशन जगत की इन हसीनाओं को बचाने के लिए ये एक कारगर कदम साबित हो सकता है। भले ही जिंदगी में वो पुरानी चकाचौंध न रहे लेकिन कम से कम चैन तो बचा रह ही सकता है।
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