प्रतापगढ़। पढ़ाई में फिसड्डी, अपराध में अव्वल। ये पहचान है अतीक अहमद की। क्राइम की दुनिया में डंका बजाने के बाद वो पॉलिटिक्स का ढोल बजाने लगा। इलाहाबाद और फूलपुर के बाद उसने रुख किया है प्रतापगढ़ का। अभी वो जेल में है लेकिन लड़ रहा है चुनाव।
अपराध की ऐसी कोई धारा नहीं जो अतीक पर न लगी हो। उसके खिलाफ चालीस से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। हत्या, हत्या की कोशिश, अपहरण, जमीन कब्जा, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, किसी से भी मनमाफिक दाम पर फैक्ट्री और अन्य किसी भी तरह की संपत्ति लिखवा लेना अतीक के लिए कोई मुश्किल काम नहीं है।
जब मायावती ने बहुजन समाज पार्टी में शामिल नहीं किया तो वो प्रतापगढ़ से अपना दल के टिकट पर चुनाव मैदान में ताल ठोंक रहा है। लेकिन जब महसूस हुआ कि कहीं नामांकन रद ना हो जाए तो अपनी पत्नी शाइस्ता परवीन को भी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा दाखिल करवा दिया।
शाइस्ता कहती हैं- प्रशासन मेरे पति का नामांकन रद्द करना चाहता है इसलिए मुझे नामांकन करना पड़ा। सरकार एवं प्रशासन मेरे पति अतीक की हत्या करने की साजिश रच रहे हैं।
अतीक अपनी दबंगई के बल पर ही इलाहाबाद पश्चिमी विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक रहे और फूलपुर से एक बार सांसद बने। बीएसपी विधायक राजू पाल की हत्या के आरोप में अतीक अभी जेल में है।
फूलपुर की जनता के सामने कभी देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जैसी शख्सियत वोट मांगने आती थी। नेहरू यहां से तीन बार सांसद बने। और अब अतीक जैसे उम्मीदवार। तो आपका नेता कैसा होगा ये फैसला अब आपके हाथ में है। आखिर आपके पास ही सत्ता की चाभी है। अन्य दागी उम्मीदवारों के बारे में जानने के लिए यहां क्लिक करें।
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