जलाभिषेक का पानी बचाने में जुटे पंडित पुरुषोत्तम गौड़

| Jul 14, 2008 at 07:23pm

जयपुर। क्या कभी आपने सोचा है कि शिवलिंग पर चढ़ाया गया पवित्र जल कहां जा रहा है। कहीं नालियों में तो नहीं। अगर ऐसा हो रहा है तो क्या भगवान के अनादर के आप भागीदार नहीं हैं।

आप ये जानकर हैरान हो सकते हैं कि अकेले जयपुर में बरसात के मौसम में हर दिन पचास लाख लीटर जल शिवलिंग पर चढ़ाया जाता है।

जलाभिषेक के पानी को वापस ज़मीन तक पहुंचाने की मुहिम अपने मंदिर से शुरू की पंडित पुरुषोत्तम गौड़ ने। गौड़ ने मंदिर के पास दो गड्ढे खुदवाए। एक तीस फीट गहरा, दूसरा पांच फीट।

इन गड्ढों को गौड़ ने शिवलिंग की जलहरी से जोड़ दिया। इससे शिवलिंग पर चढ़ाया जाने वाला पानी पहले गड्ढे में और दूध दूसरे गड्ढे में जाने लगा। इस मुहिम का नतीजा ये हुआ कि अब पानी वापस ज़मीन में पहुंचने लगा।

भगवान के ऊपर चढ़ाया गया जल रोड पर, गटर में या नालियों में बहना हमारी धार्मिक मान्यताओं के अनुकूल नहीं है। इसलिए जल को रिसायकल कर वापस भूगर्भ तक पहुंचाने के लिए गौड़ ने इस मुहिम को हाथ में लिया।

आज तक वे ये काम जयपुर में 300 मंदिरों में कर चुके हैं। जयपुर के सिविल लाइंस में लंबी जद्दोजहद के बाद वाटर हारवेस्टिंग सिस्टम लगवाया गया।

इससे शिवलिंग के पानी के फैलने से गंदगी में रहने वाला शिवालय आज हरा भरा है और भूमिगत जल का स्तर बढ़ने से मंदिर के सूखे हैण्डपंप में अब पानी आ गया है।

अकेले इस मंदिर में ही नहीं उनकी खुद की कालोनी के सूखे कुएं में हारवेस्टिंग सिस्टम लगने के छह साल बाद सूखे कुएं में पानी आ चुका है, सूखा हैंडपंप चलने लगा है।

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