कौशांबी। कौशांबी से बीएसपी के उम्मीदवार गिरीश पासी आजकल सफेद पायजामा कुर्ता में नजर आते हैं लेकिन उनका इतिहास काफी काला है। इलाके में उनके नाम का डंका बजता है और पुलिस रिकॉर्ड में वो हिस्ट्रीशीटर कहलाते हैं।
जुर्म की दुनिया की काली परछाई धुल जाएगी अगर जनता ने संसद में पहुंचा दिया। शायद यही सोचकर गिरीश पासी ने जुर्म की दुनिया से राजनीति के गलियारे में कदम रखने का इरादा कर लिया है। पहले ग्राम प्रधान का चुनाव जीता और अब लोकसभा का चुनाव जीतने का दावा ठोंक दिया। गिरीश पासी के मुताबिक उनके खिलाफ सारे मुकदमें फर्जी लादे गए हैं।
गिरीश कहते हैं कि मेरे खिलाफ 24 मुकदमे हैं जिन्हें जानबूझकर लादा गया है। मैं पहले ग्राम प्रधान था। उस समय मुझे हत्या एवं हत्या के प्रयास जैसे मुकदमों में फंसा दिया गया।
पासी के खिलाफ कौशांबी के अलग-अलग थानों में 25 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। इनमें हत्या, हत्या की कोशिश, गुंडा एक्ट, आर्म्स एक्ट, जमीन पर कब्जे जैसे संगीन आरोप भी शामिल हैं। अपने ऊपर लगे आरोपों की फेहरिस्त को गिरीश ने अपने नामांकन में कबूल भी कर लिया है।
लेकिन कहीं उनका नामांकन रद्द ना हो जाए इसलिए सेफ्टी के लिए अपनी पत्नी को निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर भी उतार दिया है।
आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवार को भले ही सत्ता में बैठी मायावती ने टिकट दे दिया हो लेकिन पुलिस के आला अधिकारियों की मानें तो वो गिरीश पासी पर विशेष नजर बनाए हुए हैं।
आईजी रेंज इलाहाबाद, सूर्य कुमार शुक्ल कहते हैं कि ऐसे लोगों को छोड़ा नहीं जायेगा। ऐसे आपराधिक पृष्ठभूमि के उम्मीदवार एवं इनके समर्थकों पर नजर रखी जा रही है।
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