नई दिल्ली। अपराधियों को चुनाव लड़ने से रोकने की बात चाहे जितनी हो, लेकिन असल में उन्हें रोकना टेढ़ी खीर है। खासतौर पर जब राजनीतिक दल उन्हें इसका मौका दे रहे हों। पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट से बीएसपी के टिकट पर मैदान में उतरे हाजी युनुस भी ऐसे ही दागी हैं। हाजी युनुस पर हत्या और सर्कस की लड़कियों के यौन शोषण समेत 33 गंभीर मुकदमे दर्ज हैं।
पुलिस रिकार्ड में हाजी युनुस गैंगेस्टर हैं लेकिन मायावती की नजर में बहुजन आंदोलन के नायक। कई राज्यों में मिलाकर हाजी युनुस के खिलाफ 33 गंभीर मुकदमे दर्ज हैं। लेकिन हाजी सभी को झूठा करार देते हैं।
वे कहते हैं कि मेरे खिलाफ तीन दर्जन नहीं बल्कि तीस मुकदमे दर्ज हैं। मुझ पर लगाए गए सारे मुकदमे झूठे हैं। तभी तो एक-एक कर खारिज हो रहे हैं।
पुलिस रिकार्ड के मुताबिक हाजी युनुस के खिलाफ सबसे पहला आपराधिक मुकदमा 1989 में बुलंदशहर में दर्ज हुआ। उसके बाद 2008 तक इनके खिलाफ नोएडा, बरेली, अहमदाबाद, जयपुर, सिकंदराबाद और दिल्ली में 33 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज हुए। ये मुकदमे हत्या, लूट, मारपीट, गुंडागर्दी, जबरन वसूली, यौन शोषण, एनएसए और टाडा के तहत दर्ज किये गए।
गुजरात पुलिस ने हाजी युनुस के खिलाफ टाडा के तहत मुकदमा दर्ज किया था। अहमदाबाद पुलिस की मानें तो अहमदाबाद के एक नाइट क्लब में हाजी युनुस ने अंधाधुंध फायरिंग की थी जिसमें आठ से अधिक लोगों की मौत हो गई थी।
आजाद घूम रहे हाजी युनुस और उनके विधायक भाई हाजी अलीम के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी है। दरअसल दोनों भाई अपोलो सर्कस चलाते हैं। 2003 में सर्कस में काम करने वाली लड़कियों ने दोनों भाइयों पर यौन शोषण का आरोप लगाया था। पुलिस ने सर्कस से 23 नेपाली लड़कियों को मुक्त कराया था। बाद में इसकी जांच सीबीसीआईडी को सौंप दी गई। अदालत में हाजिर न होने पर इसी साल चार अप्रैल मुजफ्फरनगर कोर्ट ने इनके खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी कर दिया। लेकिन ये कोर्ट की पहुंच से बाहर ही हैं।
कायदे से तो उत्तर प्रदेश पुलिस को हाजी युनुस को तुरंत गिरफ्तार करके वारंट की तामील करनी चाहिए, लेकिन सत्तारूढ़ पार्टी जिसे टिकट दे रही हो, उसके खिलाफ वो कार्रवाई करे भी तो कैसे।
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