नयी दिल्ली। सिख कौम को 1984 के दंगों में इंसाफ नहीं मिलने से आहत होकर गृह मंत्री पी चिदम्बरम पर जूता फेकने वाले युवा सिख पत्रकार जरनैल सिंह ने आज अपने सबसे बड़े लोकतांत्रिक हथियार का इस्तेमाल करना जरूरी नहीं समझा।
दिल्ली के लाजपत नगर क्षेत्र में रहने वाले पत्रकार जरनैल सिंह ने कहा कि वह किसी भी दल को वोट देने के हक में नहीं है और वोटिंग मशीन में सभी दलों के उम्मीदवारों को खारिज करने का विकल्प भी नहीं है। लिहाजा वह वोट नहीं दे रहा है।
आज से ठीक तीस दिन पहले कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में जरनैल ने चिदम्बरम की ओर जूता फेंक कर बवाल मचा दिया था। यह युवा सिख पत्रकार इस बात से खफा था कि चुनाव के ऐन मौके पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कांग्रेस के नेता जगदीश टाइटलर को क्लीन चिट दे दी थी। इस घटना के बाद आनन फानन में कांग्रेस ने अपने दो उम्मीदवारों सज्जन कुमार और टाइटलर के टिकट वापस ले लिए थे।
लेकिन इस घटना के एक महीने बाद जरनैल ने वोट डालने से यह कहते हुए कन्नी काट ली कि। आज की तारीख में कोई भी पार्टी मेरा वोट पाने का हक नहीं रखती। पत्रकार ने कहा कि राजनीतिक दल हमारे संविधान के मूल्यों का पालन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने ऐसी चुनींदा धर्म निरपेक्षता को अपना रखा है जो उनकी वोट बैंक की राजनीति में फिट बैठती है। खुद निर्वाचन आयुक्त वाई एस कुरैशी ने इस बात की वकालत की है कि सभी उम्मीदवारों को खारिज करने का विकल्प होना चाहिये।
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